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सीनियर सिटिजन्स को डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों ठगे, इंदौर क्राइम ब्रांच ने किया गिरोह का भंडाफोड़

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Digital Arrest Accused: इंदौर क्राइम ब्रांच ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है।

क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली से मुख्य आरोपी ऋतिक जाटव को अरेस्ट किया।

आरोपी किराए के एक फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर देशभर के सीनियर सिटिजन्स को शिकार बना रहा था।

इससे पहले पुलिस इस मामले में यूपी के कन्नौज से मदरसा संचालक पिता-पुत्र को भी गिरफ्तार कर चुकी है।

आरोपी ने ऐसे ठगे 46 लाख रुपये

ढाई महीने पहले इंदौर की 65 वर्षीय महिला ने NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।

महिला ने बताया कि उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें खुद को TRAI अधिकारी बताया गया।

कॉलर ने महिला की सिम से अवैध गतिविधियों का आरोप लगाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी।

कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल आया, जिसमें आरोपी ने खुद को CBI अधिकारी बताया।

इसके बाद महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी और टेरर फंडिंग जैसे संगीन आरोप लगाए।

आरोपी ने महिला को वारंट और गिरफ्तारी का डर दिखाकर धीरे-धीरे 46 लाख रुपये ठग लिए।

कमरे में बने कॉल सेंटर से चलता था खेल

ऋतिक जाटव दिल्ली में बैठे-बैठे फर्जी अधिकारियों की स्क्रिप्ट पर बुजुर्गों को धमकाता था।

गैंग के पास देशभर के लाखों सीनियर सिटिजन का डेटा था।

जिसमें आधार, पैन, बैंक डिटेल्स, परिवार की जानकारी तक शामिल थी।

खासतौर पर पेंशनर्स इस गिरोह के निशाने पर थे।

आरोपी हाईटेक सेटअप और फर्जी स्क्रिप्ट से लोगों को फंसाता था।

दिल्ली में छापेमारी के दौरान पुलिस ने देखा कि आरोपी ने एक कमरे में कॉल सेंटर बना रखा था।

पुलिस ने मौके से 7 वायरलेस सेट, 6 लैंडलाइन फोन, सैकड़ों क्लोनिंग सिम, लिखी हुई स्क्रिप्ट वाली 10 डायरी, 1 मॉनीटर, प्रिंटर और नेटवर्क बूस्टर जब्त किया है।

इसके अलावा आरोपी के पास से 20 हजार इंदौर के सीनियर सिटीजन का डेटा भी मिला है।

2019 से कर रहा ठगी, पहले हो चुकी है गिरफ्तारियां

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह BA पास है और 2019 से इस ठगी के कारोबार में शामिल है।

अब तक वह 3 हजार से ज्यादा सिम कार्ड का इस्तेमाल कर चुका है।

हर वारदात के बाद आरोपी सिम तोड़कर फेंक दिए जाते थे।

2024 में ही 500 से ज्यादा सिम VI कंपनी के इस्तेमाल कर ठगी की गई।

पुलिस 5 दिन की रैकी के बाद आरोपी को पकड़ने में कामयाब हुई।

क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली में 50 से ज्यादा बिल्डिंग्स की तलाशी ली।

पुलिस टीम कभी इंटरव्यू देने के बहाने तो कभी सिम रिचार्ज कैनोपी लगाने के बहाने इलाके में घूमती रही

। कई दिन की निगरानी और सर्विलांस के बाद आरोपी को नेहरू नगर की एक बिल्डिंग से धर दबोचा।

इस मामले में पहले ही उत्तरप्रदेश के कन्नौज से मदरसा संचालक अली अहमद खान और असद अहमद खान गिरफ्तार हो चुके हैं।

दोनों ने ठगी गैंग को अपने मदरसा समिति के बैंक खाते 50% कमीशन पर उपलब्ध कराए थे।

क्राइम ब्रांच की अपील, सीनियर सिटीजन रहें सतर्क

क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने आरोपी से ठगी का लाइव डेमो करवाया।

जिसमें उसने बताया कि कैसे कॉलिंग स्क्रिप्ट तैयार होती है।

कैसे बुजुर्गों को डराकर पैसे ऐंठे जाते हैं।

कैसे डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लोगों को मेंटली टॉर्चर किया जाता है।

राजेश त्रिपाठी ने बताया कि यह गैंग पूरे देश में सीनियर सिटीजन को निशाना बनाता था।

दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर बनाकर डिजिटल अरेस्ट और सरकारी जांच के नाम पर ठगी की जाती थी।

इंदौर में 46 लाख की ठगी के बाद हमारी टीम ने लगातार 5 दिन की रैकी कर आरोपी को पकड़ा है।

वहीं क्राइम ब्रांच की टीम ने सीनियर सिटीजन से सतर्क रहने की अपील की है।

कोई भी सरकारी अधिकारी, पुलिस या CBI कभी फोन पर डिजिटल अरेस्ट या ऑनलाइन भुगतान की मांग नहीं करती।

ऐसे कॉल आने पर तुरंत 112 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

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