Ram Lala Surya Tilak: 6 अप्रैल, रविवार 2025 को पूरे देश में राम नवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।
खासकर राम जन्मभूमि अयोध्या में तो इस पर्व के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।
राम मंदिर को महीनों पहले से सजाया जा रहा है और इस बार तो रामलला का सूर्य तिलक भी होगा।
रामलला का सूर्य तिलक देखने के लिए भक्त गढ़ काफी उत्साहित हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूर्य तिलक क्या है और इसका क्या महत्व है।
अगर नहीं तो इस आर्टिकल में जानेंगे ये सभी बातें, साथ ही आपको बताएंगे घर बैठे अयोध्या का सूर्य तिलक देखने का तरीका…
क्या है सूर्य तिलक (What is Surya Tilak)
सबसे पहले जानते हैं कि आखिर सूर्य तिलक है क्या?
सूर्य तिलक एक खास प्रकार का तिलक है, जिसे सूर्य की किरणों से तैयार किया गया है।
रामनवमी के दिन जब सूर्य की किरण रामलला के मस्तक पर पड़ेगी, तो यह तिलक सोने की तरह चमकेगा।

खास सिस्टम के जरिए हुआ तैयार
यह सूर्य तिलक खगोलशास्त्र, वास्तुशास्त्र और आध्यात्मिक सिद्धांतों के आधार पर खास सिस्टम के जरिए तैयार किया गया है।
इससे जब रामनवमी के दिन सूर्य की पहली किरण रामलला के मस्तक पर पड़ेगी, तो यह तिलक दिव्य आभा के साथ चमक उठेगा।
इसे तैयार करने में कई विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आपको बता दें कि यह सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और ज्योतिष का अद्भुत संगम है।
पिछले साल भी हुआ था सूर्य तिलक
साल 2024 में भी राम नवमी के शुभ अवसर पर पहली बार रामलला के मस्तक पर सूर्य तिलक किया गया था।

सूर्य तिलक ही क्यों?
भगवान श्रीराम का जन्म सूर्यवंश में हुआ था, जिसके चलते इस वंश के लोग मुख्य रूप से सूर्यदेव की पूजा करते थे और सूर्यवंशी कहलाते थे।
सूर्यवंशी राजा के ध्वज पर भी सूर्य का ही चिह्न होता था।
सूर्यदेव की स्तुति के बाद ही श्रीराम ने राक्षसराज रावण का वध किया था।
ऐसे में ये सूर्य तिलक उनकी कुल परंपरा, दिव्यता और उनके सूर्यवंशी होने का प्रतीक है।
सूर्य तिलक को किसने डिजाइन किया? (Who Designed Surya Tilak)
सूर्य तिलक के लिए IIT रुड़की सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम तैयार किया है।
इस सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणें करीब 4 मिनट तक रामलला के मस्तक को प्रकाशित करेंगी।
इसका निर्माण विशेष धातुओं और रत्नों से किया गया है, जिससे यह सूर्य की किरणों को प्रतिबिंबित कर सके।
IIT रुड़की, IIT चेन्नई के वैज्ञानिकों के अलावा देश के विख्यात संस्थानों के वैज्ञानिकों ने इसका ट्रॉयल भी किया था।

सूर्य तिलक के पीछे क्या है साइंस? (Science Technology Behind Surya Tilak)
सूर्य तिलक का सिद्धांत मुख्य रूप से खगोल भौतिकी, प्रकाशिकी (Optics) और प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला पर आधारित है।
इसके लिए परावर्तन और अपवर्तन के सिद्धांतों का सही उपयोग किया गया है।
हर साल चैत्र शुक्ल नवमी यानी रामनवमी के दिन, दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणों की इस तरह से गणना की गई हैं कि वे ठीक रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी।
अगले 20 साल तक हर रामनवमी पर सूर्य तिलक
हाल ही में श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने इस संबंध में पूरी जानकारी दी थी।
उन्होंने बताया था कि अगले 20 साल तक हर रामनवमी में रामलला का सूर्यतिलक होगा।
इसके लिए जरूरी सिस्टम को मंदिर में स्थाई तौर पर लगाया जा रहा है।
किन चीजों का होगा उपयोग, कितनी लागत?
सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम तैयार किया गया है।
इसमें 4 लेंस, 4 मिरर, पीतल के पाइप और 19 गियर के जरिए गर्भ गृह तक रामलला के मस्तक पर किरणें पहुंचाई जाएगी।
सूर्य तिलक के लिए इतने करोड़ खर्च
सूर्य तिलक के लिए जितनी भी चीजों का उपयोग हुआ है, उसकी कुल लागत लगभग 1 से डेढ़ करोड़ रुपए है।
रामनवमी पर राम मंदिर का शेड्यूल?
Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra ने सोशल मीडिया एक्स के जरिए राम नवमी का शेड्यूल जारी किया है। इसके मुताबिक-
सुबह 9.30 बजे से 10.30 बजे तक रामलला का अभिषेक होगा
सुबह 10.30 बजे से 10.40 बजे तक पर्दा रहेगा
सुबह 10.40 बजे से 11.45 बजे तक पर्दा खुला रहेगा
सुबह 11.45 बजे भोग लगेगा जिस वक्त पर्दा रहेगा
श्रीरामलला का जन्म दोपहर 12.00 बजे होगा। इस दौरान आरती व सूर्य-तिलक होगा।

घर बैठे ऐसे देख पाएंगे सूर्य तिलक
अगर आप इस अद्भुत पल को देखने अयोध्या नहीं जा सकते तो निराश होने की कोई बात नहीं है क्योंकि आप घर बैठे ही इसके दर्शन कर सकते हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट ने कहा है कि भक्त अपने-अपने घरों में टेलीविजन पर ही इस सम्पूर्ण कार्यक्रम का आनन्द प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra के सोशल मीडिया अकाउंट https://x.com/shriramteerth?lang=en पर भी आप ये सूर्य तिलक देख सकते हैं।
राम नवमी के लिए कड़ी सुरक्षा
बता दें कि राम नवमी के मौके पर भारी भीड़ को देखते हुए अयोध्या में पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
कई रूट्स पर डाईवर्जन की तैयारी है और माना जा रहा है कि कुछ रास्तों को रोका भी जाएगा।
अयोध्या में बैरिकेडिंग लगा दी गई है. कई जगह होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं.
भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को होल्डिंग एरिया में रोका जाएगा।
वहीं से धीरे-धीरे श्रद्धालुओं को छोड़ा जाएगा. ताकि, श्रद्धालु आसानी से प्रभु का दर्शन कर सके।
इसके अलावा सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे से भी अयोध्या की निगरानी की जा रही है।
येलो जोन में बकायदा कंट्रोल रूम बनाया गया हैं और वही से अयोध्या की निगरानी जाती है।