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चैत्र नवरात्र: सलकनपुर- इसी जगह पर मां बिजासन देवी ने किया था रक्तबीज का संहार

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विंध्यवासनी बिजासन माता का पवित्र सिद्धपीठ जहां माता के भक्तों की हर मुराद पूरी होती है।

ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजासन माता का ये धाम सदियों से मां के भक्तों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है।

बताया जाता है कि जब रक्तबीज नामक दैत्य से प्राणीं त्राही-त्राही कर रहे थे तब माता जगदंबा ने विकराल रूप धारण किया और इसी स्थान पर रक्तबीज कां संहार किया।

तभी से माता बिजासन भी कहलाईं।

कई मान्यताएं और पौराणिक कथाएं सलकनपुर की माता इस मंदिर से जुड़ी हैं।

आइए चैत्र नवरात्रि के इस पावन पर्व पर आपको बताते हैं बीजासन माता के बारे में।

मां बिजासन के धाम के नाम से विश्वविख्यात
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 70 किलोमीटर दूर सुरम्य वादियों में बसा है सलकनपुर।

ये छोटा सा कस्बाई इलाका मां बीजासन के धाम के नाम से विश्वविख्यात है।

यहां विराजी है रक्तबीज का संहार करने वाली मां बिजासन।

ऊचें शिखर पर मां बीजासन का भव्य मंदिर हैं जहां सैकड़ों की तादाद में उनके दर्शनों के लिए आते हैं।

माता के मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 1000 सीढ़ियां है।

ज्यादातर भक्त माता के जयकारे लगाते इन सीढ़ियों के जरिए मां के दरबार तक पहुचंते हैं।

आपको बता दें कि यहां आनेवाले भक्तों की सुविधा को देखते हुए घुमावदार सड़क मार्ग बनाया गया है, साथ ही रोपवे की सुविधा भी है।

सलकनपुर मंदिर का निर्माण और महत्व

सलकनपुर की मां बिजासन और उनके प्राकट्य से जुड़ी वैसे तो कई कथाएं प्रचलित हैं लेकिन उनमें से सबसे ज्यादा प्रचलित कथा हैं

करीब 300 साल पहले पशुओं का व्यापार करने वाले बंजारे इस स्थान पर रुके थे। कि तभी अचानक उनके पशु गायब हो गए।

सभी हैरान परेशान थे कि तभी बंजारों के काफिले में शामिल एक बुजर्ग को इस जंगल में एक कन्या मिली जिसने कहा कि आप यदि इस स्थान पर देवी जी की पूजा अर्चना करेंगे तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

तभी उस कन्या ने एक पत्थर फेंका और वो पत्थर जहां गिरा उस स्थान पर देवी जी ने दर्शन दिए और सभी ने मातारानी की पूजा अर्चना की और कुछ ही क्षणों बाद उनके सारे पशु उन्हे मिल गए।

कहते हैं उन्हीं बंजारों ने यहां माता का मंदिर बनवाया और तब से लेकर आज तक मां बिजासन अपने दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

माता ने यही किया था रक्तबीज का संहार

पुराणों के अनुसार देवी बिजासन माता पार्वती का ही अवतार हैं, जिन्होंने देवताओं के आग्रह पर रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था और सृष्टि की रक्षा की थी।

बिजासन देवी को कई लोग कुलदेवी के रूप में भी पूजते हैं।

नवरात्रि के पर्व पर लगता है बड़ा मेला

सतौर पर नवरात्रि के पर्व पर यहां बड़ा मेला लगता है और लाखों की तादाद में माता के भक्त उनके दर्शनों के लिए यहां आते हैं।

अगर आप भी माता के भक्त हैं तो एक बार जरूर सलकनपुर आइए जहां आपके ऊपर निश्चित ही मां के आशीर्वाद की वर्षा होगी और आपको आध्यात्मिक अनुभूति एहसास होगा। जय माता दी

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