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असम में पॉलिगामी बिल पास: दूसरी शादी करने पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Assam Polygamy Bill Pass: असम सरकार ने बहुविवाह (पॉलिगामी) पर रोक लगाने के लिए एक सख्त कानून पारित किया है।

‘असम प्रोहिबिशन ऑफ पॉलिगामी बिल, 2024’ के तहत, बिना पहला विवाह विच्छेद किए दूसरी शादी करना अब एक गंभीर अपराध होगा, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।

क्या हैं नए कानून के मुख्य नियम?

नए बिल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं:

सामान्य सजा: यदि कोई व्यक्ति पहला विवाह वैध होते हुए भी दूसरी शादी करता है, तो उसे 7 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

बढ़ी हुई सजा: यदि कोई अपनी पहली पत्नी या परिवार को धोखा देकर दूसरा विवाह करता है, तो सजा बढ़कर 10 साल तक की कैद हो जाएगी।

दोहराने पर दोगुनी सजा: अगर कोई व्यक्ति इस अपराध को दोबारा करता पाया जाता है, तो हर बार सजा दोगुनी कर दी जाएगी।

सामाजिक प्रतिबंध: बहुविवाह करने वाले व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होंगे और निकाय चुनाव (जैसे नगर निगम या पंचायत का चुनाव) भी नहीं लड़ सकेंगे।

हालांकि, इस कानून का दायरा पूरे राज्य पर एक समान नहीं है।

इसे छठी अनुसूची के क्षेत्रों (स्वायत्त जिला परिषद वाले इलाके) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों पर लागू नहीं किया गया है।

सरकार का तर्क है कि इन क्षेत्रों की स्थानीय प्रथाओं और स्वायत्तता का सम्मान करने के लिए यह छूट दी गई है।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार का लक्ष्य

इस बिल को पेश करते हुए असम सरकार ने इसे महिला अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

सरकार का मानना है कि बहुविवाह की प्रथा में अक्सर महिलाओं को ही सबसे ज्यादा भावनात्मक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

यह कानून महिलाओं की गरिमा और कानूनी हक़ की रक्षा करने, और परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान 

विधानसभा में बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने कहा, “इस्लाम बहुविवाह को बढ़ावा नहीं दे सकता। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो आपको एक सच्चा मुसलमान होने का मौका मिलेगा।

उन्होंने तुर्की और पाकिस्तान जैसे मुस्लिम बहुल देशों में भी बहुविवाह पर प्रतिबंध का हवाला दिया।

असम में लागू होगा UCC

सीएम सरमा ने भविष्य की अपनी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि यदि वे अगली सरकार बनाते हैं, तो अपने पहले ही सत्र में असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करेंगे।

साथ ही, उन्होंने ‘लव-जिहाद’ और ‘धोखे से की गई शादी’ के खिलाफ भी जल्द ही एक कानून लाने की बात दोहराई।

असम ने बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर देश में एक नई कानूनी और सामाजिक बहस छेड़ दी है, जिसका मकसद महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।

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