Homeन्यूजमहिला खतना पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस,...

महिला खतना पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस, जानें क्यों खतरनाक है ये?

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Female Genital Mutilation: सुप्रीम कोर्ट ने ‘महिला खतना’ (Female Genital Mutilation- FGM) की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर एक बार फिर से सुनवाई शुरू की है।

कोर्ट ने इस मामले को ‘गंभीर’ बताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह मामला नाबालिग बच्चियों के संवैधानिक अधिकारों और उनके शारीरिक स्वत्रंता से जुड़ा हुआ है।

याचिका का आधार: POCSO का उल्लंघन और धार्मिक जबरदस्ती

यह याचिका ‘चेतना वेलफेयर सोसाइटी’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा दायर की गई है।

याचिका में मुख्य रूप से तीन बड़े दावे किए गए हैं:

  1. POCSO एक्ट का सीधा उल्लंघन: याचिका में कहा गया है कि किसी नाबालिग बच्ची के जननांगों को गैर-चिकित्सकीय कारणों से छूना, काटना या उनमें कोई छेड़छाड़ करना, POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट) के तहत एक गंभीर अपराध है। चूंकि खतना आमतौर पर नाबालिग लड़कियों का ही किया जाता है, इसलिए यह कानून का सीधा-साधा उल्लंघन है।
  2. इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं: याचिकाकर्ताओं का दावा है कि महिला खतना इस्लाम धर्म का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं है। न तो कुरान में इसका स्पष्ट उल्लेख है और न ही यह किसी मूल धार्मिक ग्रंथ में शामिल है। फिर भी, इसे एक धार्मिक रिवाज़ के रूप में थोपा जा रहा है।
  3. संवैधानिक और मानवाधिकारों का हनन: यह प्रथा बच्चियों के जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21), गरिमा के साथ जीने के अधिकार और शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 15) का gross उल्लंघन करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया सुनवाई को महत्व?

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “बच्चों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मामला है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।”

कोर्ट का यह रवैया दर्शाता है कि वह धार्मिक प्रथाओं के नाम पर की जा रही ऐसी कुरीतियों को बर्दाश्त नहीं करने वाला है जो बच्चों के कल्याण और अधिकारों के विरुद्ध हों।

Female Genital Mutilation, FGM, Supreme Court, POCSO Act, Dawoodi Bohra, Women Rights, Child Rights, Central Government Notice, Religious Practice, WHO, Human Rights, Article 21, Protection of Children, Mahila Khatna, Khatna, Muslim

महिला खतना क्यों है खतरनाक? WHO और UN की चेतावनी

महिला खतना को लेकर दुनिया भर की स्वास्थ्य संस्थाएं लगातार आगाह करती रही हैं।

  • शारीरिक नुकसान: इस प्रक्रिया के तहत महिलाओं के बाहरी जननांगों के एक हिस्से को आंशिक या पूरी तरह से काट दिया जाता है। इससे दर्द, हैवी ब्लीडिंग (अत्यधिक रक्तस्राव), संक्रमण और यूरिन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • दीर्घकालिक प्रभाव: इसके कारण यौन संबंध के दौरान दर्द, मासिक धर्म में गंभीर समस्याएं, प्रसव के दौरान जटिलताएं और नसों में चोट जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
  • मानसिक आघात: यह प्रक्रिया बच्ची के मन पर गहरा मनोवैज्ञानिक आघात छोड़ती है, जिससे वह आजीवन पीड़ित रह सकती है। चिंता, अवसाद और PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी समस्याएं होना आम बात है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने महिला खतना को “लड़कियों और महिलाओं के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन” करार दिया है।

संयुक्त राष्ट्र भी लगातार दुनिया के सभी देशों से इस प्रथा को खत्म करने का आह्वान करता रहा है।

केंद्र सरकार का पहले का रुख और आगे की राह

यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

साल 2018 में भी ऐसी ही एक याचिका पर सुनवाई हुई थी, जिसमें केंद्र सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा था कि “धर्म की आड़ में लड़कियों का खतना करना एक अपराध है और सरकार इस पर रोक का समर्थन करती है।”

सरकार ने यह भी कहा था कि ऐसे कृत्यों के लिए दंड विधान (Indian Penal Code, अब BNS) में सात साल तक की कैद का प्रावधान मौजूद है।

Female Genital Mutilation, FGM, Supreme Court, POCSO Act, Dawoodi Bohra, Women Rights, Child Rights, Central Government Notice, Religious Practice, WHO, Human Rights, Article 21, Protection of Children, Mahila Khatna, Khatna, Muslim

सुप्रीम कोर्ट के ताजा नोटिस के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या जवाब देती है और क्या वह इस प्रथा पर स्पष्ट रूप से रोक लगाने के लिए एक विशिष्ट कानून बनाने पर विचार करती है, जैसा कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में है।

महिला खतना का मुद्दा सिर्फ एक धार्मिक या सामाजिक प्रथा का सवाल नहीं है, बल्कि यह नाबालिग बच्चियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और मौलिक अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मानवीय संकट है।

- Advertisement -spot_img