Indore Boring Water Ban: इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद पूरे शहर में हड़कंप मचा हुआ है।
इसी बीच ये बड़ी खबर सामने आई है कि शहर में 516 बोरिंग का पानी भी दूषित निकला है।
शुरुआत में माना जा रहा था कि केवल नर्मदा की पाइपलाइन में लीकेज की वजह से पानी दूषित हुआ है, लेकिन जब प्रशासन ने जमीन के भीतर के पानी (बोरिंग) की जांच की, तो नतीजे डरावने निकले।
बोरिंग का पानी भी दूषित
शहर के विभिन्न हिस्सों से लिए गए सैंपल में से 35 बोरिंग के पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।
इसके तुरंत बाद, नगर निगम ने 516 बोरिंग के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
इनमें 400 निजी और 116 सरकारी बोरिंग शामिल हैं।
जिन बोरिंग का पानी दूषित मिला है, उन पर लाल निशान (Red Mark) लगा दिए गए हैं ताकि लोग भूलवश भी उनका उपयोग न करें।
इंदौर | इंदौर में 17 मौतों के बाद 516 बोरिंग के पानी पर रोक। लोग RO लगा रहे, टैंकर के पानी पर भी भरोसा नहीं।#Indore #WaterAlert #HealthRisk #News#sanewsmp pic.twitter.com/jDa5RRYpAf
— SA News Madhya Pradesh (@SAnewsMP) January 5, 2026
बैक्टीरिया का हमला: जान पर बनी आफत
माइक्रोबायोलॉजी लैब की जांच में पानी के सैंपल्स में कोलिफार्म (Coliform), ई-कोलाई (E. coli) और शिगेला (Shigella) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
ये बैक्टीरिया आमतौर पर सीवर का पानी पीने के पानी में मिलने के कारण पनपते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पानी शरीर में जाते ही अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से जानलेवा साबित हो रहा है।
आरओ (RO) बना मजबूरी
इलाके में डर का माहौल ऐसा है कि लोग अब सरकारी सप्लाई या टैंकरों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा भेजे जा रहे टैंकरों में भी मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है।
ऐसे में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग भी कर्ज लेकर या किश्तों पर 10 से 12 हजार रुपये खर्च कर आरओ (RO) सिस्टम लगवा रहे हैं।
चाय की दुकानों और होटलों पर अब खाना बनाने और चाय के लिए केवल बोतलबंद पानी का ही उपयोग किया जा रहा है।
‘We’re scared to drink tap water’: After #Indore contamination tragedy, trust on municipal supply dries up; residents turn to bottled supply
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— The Times Of India (@timesofindia) January 4, 2026
सिस्टम की नाकामी पर सवाल
इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद नगर निगम की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं।
रविवार को 112 और नए सैंपल लिए गए, लेकिन उन्हें निजी लैब भेजना पड़ा क्योंकि निगम की अपनी लैब में कर्मचारियों की भारी कमी है।
स्थानीय रहवासियों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।
उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समय रहते कदम नहीं उठाए गए, जिसका खामियाजा मासूम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ओआरएस (ORS) के पैकेट और जिंक की गोलियां बांटकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन स्वच्छ पानी की उपलब्धता अब भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है।


