RBI Repo Rate Cut: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने देश के आम लोगों को नए साल का एक बड़ा तोहफा देते हुए एक अहम फैसला किया है।
बुधवार, 03 दिसंबर को समाप्त हुई अपनी तीन दिनों की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद, आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट) की कटौती की घोषणा की है।
इस घोषणा के साथ ही रेपो रेट 5.5 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है।
आरबीआई गवर्नर श्री संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
होम लोन-कार लोन सस्ते
यह कटौती सीधे तौर पर देश के करोड़ों लोगों की जेब पर असर डालेगी, क्योंकि इससे बैंकों से मिलने वाले कर्ज़, खासकर होम लोन और कार लोन, सस्ते होंगे और उनकी मासिक किस्त (ईएमआई) कम हो जाएगी।
इससे न सिर्फ लोगों के महीने के खर्च में राहत मिलेगी, बल्कि बाजार में खपत बढ़ने और अर्थव्यवस्था को गति मिलने की भी उम्मीद है।
#WATCH | Mumbai | RBI Governor Sanjay Malhotra says, “… The real GDP growth for this year is projected at 7.3%. This is up by about half a per cent from our earlier projections. Q3 is projected at 7% and Q4 at 6.5%. Real GDP growth for Q1 next year is projected at 6.7% and Q2… pic.twitter.com/iUAnQniFJf
— ANI (@ANI) December 5, 2025
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर? फायदा और नुकसान
1. लोन लेने वालों के लिए राहत (सीधा लाभ):
- ईएमआई कम होगी: होम लोन, कार लोन या अन्य रीटेल लोन पर लगने वाली ब्याज दरें घटने से उनकी मासिक किस्त (ईएमआई) कम हो जाएगी। इससे लोगों के महीने के बजट पर दबाव कम होगा और उनके हाथ में अतिरिक्त नकदी बचेगी।
- नया लोन लेना सस्ता: जो लोग नया घर या कार खरीदने की योजना बना रहे थे, उनके लिए कर्ज की लागत कम हो जाएगी। इससे रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

2. बचत करने वालों के लिए चुनौती (संभावित नुकसान):
- एफडी पर कम ब्याज: रेपो रेट कम होने का एक पहलू यह भी है कि बैंक अपनी जमा योजनाओं, खासकर सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट – एफडी) पर दी जाने वाली ब्याज दरें भी घटा सकते हैं। इसका मतलब यह है कि बैंकों में पैसा जमा करने वाले लोगों को अपनी बचत पर पहले के मुकाबले कम ब्याज मिलेगा।
- बचत के वैकल्पिक रास्ते: इसलिए, बचतकर्ताओं को अब अपने निवेश के विकल्पों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्हें म्यूचुअल फंड, डिबेंचर्स या अन्य बाजार-आधारित योजनाओं की ओर रुख करने पर भी ध्यान देना होगा।
#WATCH | Mumbai | On Repo Rate cut by 25 basis points to 5.25%, VP Research, Motilal Oswal Financial Services Sneha Poddar says, “25 basis points rate cut that the RBI has announced was largely factored in by the market, and that is the reason why we haven’t seen any knee-jerk… pic.twitter.com/42HusSfAM5
— ANI (@ANI) December 5, 2025
इस साल लगातार चौथी कटौती: कुल 1.25% की गिरावट
यह वर्ष 2025 में आरबीआई की चौथी रेपो रेट कटौती है।
इससे पहले फरवरी में 0.25%, अप्रैल में 0.25% और जून में 0.50% की कटौती की गई थी।
इस प्रकार, इस वर्ष अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है।
अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में आरबीआई ने रेपो रेट को अपरिवर्तित रखा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के लिए आने वाले समय में और कटौती की गुंजाइश बनी हुई है।
#BREAKING | RBI cuts repo rate by 25 basis points to 5.25 %
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— Moneycontrol (@moneycontrolcom) December 5, 2025
महंगाई घटी, विकास दर बढ़ी
आरबीआई ने इस बैठक में देश की आर्थिक स्थिति के बारे में अपने अनुमानों को भी अपडेट किया है, जो बहुत ही सकारात्मक संकेत दे रहे हैं:
- महंगाई (मुद्रास्फीति) का अनुमान घटाया: वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई का अनुमान पहले के 2.6% से घटाकर केवल 2% कर दिया गया है। यह आरबीआई के लक्ष्य से भी नीचे है। विभिन्न तिमाहियों के लिए भी अनुमानों में कमी की गई है। निम्न महंगाई रेपो रेट में और कटौती के लिए जगह बनाती है।
- आर्थिक विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान बढ़ाया: वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया गया है। इस साल की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में वास्तविक वृद्धि दर 8.2% रही है, जो एक मजबूत आर्थिक पुनरुद्धार की ओर इशारा करती है।
RBI MPC meeting: Repo rate cut by 25 bps, home loan EMIs, interest rates set to fall#RBI #RepoRate #EMI #HomeLoan @thanawala_hiral reports https://t.co/tPHdjQEG2C pic.twitter.com/8cHKDHDkU1
— Moneycontrol (@moneycontrolcom) December 5, 2025
क्या है रेपो रेट और कैसे काम करता है यह?
सरल शब्दों में, रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक देश के व्यावसायिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
जब अर्थव्यवस्था में तरलता (पैसे की उपलब्धता) कम होती है या बैंकों को पैसे की जरूरत होती है, तो वे आरबीआई से रेपो रेट पर कर्ज लेते हैं।
जब आरबीआई रेपो रेट कम करता है, तो बैंकों को उससे कर्ज सस्ते दाम पर मिलता है।
इस सुविधा का लाभ बैंक आमतौर पर अपने ग्राहकों को आगे बढ़ाते हैं। यानी, बैंक भी होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन जैसे विभिन्न ऋणों पर लगने वाली ब्याज दरें घटा देते हैं।
नतीजतन, लोगों को कर्ज लेने की लागत कम हो जाती है और उनकी मासिक ईएमआई घट जाती है।
इससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है और वे अधिक खर्च कर पाते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था सक्रिय होती है।
इसके विपरीत, जब देश में महंगाई (मुद्रास्फीति) बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो आरबीआई रेपो रेट बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में पैसे के प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश करता है।
महंगा कर्ज मिलने पर बैंक भी अपनी दरें बढ़ा देते हैं, लोग कर्ज लेने से हिचकते हैं, खर्च कम होता है और मांग घटती है, जिससे महंगाई पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम
आरबीआई का यह फैसला एक संतुलित और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। ए
क ओर जहां यह लोन लेने वालों और उद्योगों को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराकर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, वहीं दूसरी ओर महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने का भी आश्वासन देता है।
घर और कार जैसी बड़ी खरीदारी करने वालों के लिए तो यह विशेष रूप से फायदेमंद समय है।
हालांकि, बचतकर्ताओं को थोड़ी सतर्कता बरतने और अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने की आवश्यकता है।
आरबीआई गवर्नर श्री मल्होत्रा ने कहा कि पिछला महीना चुनौतियों भरा रहा, लेकिन आगे आने वाले समय में जीडीपी वृद्धि से लेकर महंगाई तक स्थितियां अनुकूल बनी रहने की उम्मीद है।
यह रेपो रेट कटौती निश्चित रूप से इस सकारात्मक रुख को और मजबूती देने का काम करेगी।


