Homeलाइफस्टाइलकिसने सजाया था पहला क्रिसमस ट्री: कब और कहां से हुई शुरुआत,...

किसने सजाया था पहला क्रिसमस ट्री: कब और कहां से हुई शुरुआत, पूरी दुनिया में कैसे फैली यह परंपरा?

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Christmas Tree History and Importance: क्रिसमस का त्योहार आते ही चारों तरफ रोशनी, उल्लास और सजे हुए क्रिसमस ट्री दिखाई देने लगते हैं।

यह सदाबहार पेड़, जो खिलौनों, रंग-बिरंगी लाइटों, चमकते गहनों और टिंटिंग घंटियों से सजा होता है, इस त्योहार का एक अभिन्न प्रतीक बन गया है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा कहाँ से शुरू हुई? इसका क्या महत्व है?

आइए, इसकी दिलचस्प कहानी जानते हैं।

क्रिसमस ट्री क्या है और इसका क्या महत्व है?

क्रिसमस ट्री आमतौर पर एक सदाबहार कोनिफ़र पेड़ होता है, जैसे फर, स्प्रूस या पाइन, जिसे क्रिसमस के मौके पर विशेष रूप से सजाया जाता है।

इसका महत्व कई स्तरों पर है।

Christmas 2025, Christmas tree, why decorate Christmas tree, importance of Christmas tree, how decorate Christmas tree, Christmas tree decoration, Christmas Eve, Christmas decoration tips, Christmas story, Christmas Tree history, Christmas Tree tradition, History of Christmas tree, Christmas tree origin, Martin Luther, Saint Boniface, Happy Christmas, Merry Christmas, Christmas wishes, Utility News, Religion News, Santa Claus

ईसाई समुदाय इसे ईश्वर के प्रति आभार और यीशु मसीह के जन्म की खुशी के प्रतीक के रूप में देखता है।

सदाबहार पेड़, जो सर्दियों में भी हरा-भरा रहता है, वह जीवन की निरंतरता, आशा और अमरता का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि यह पवित्र वृक्ष घर में सुख-शांति लाता है और इसे सजाने से आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा का इतिहास: कब और कहां से हुई शुरुआत?

क्रिसमस ट्री का इतिहास बहुत पुराना और रोचक है।

इसकी शुरुआत को लेकर कई कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:

1. मार्टिन लूथर वाली कहानी

एक प्रसिद्ध कथा 16वीं सदी के ईसाई धर्म सुधारक मार्टिन लूथर से जुड़ी है।

कहा जाता है कि एक क्रिसमस की पूर्व संध्या पर, वह एक बर्फीले जंगल से गुजर रहे थे।

तारों से भरे आकाश की चमक और चांद की रोशनी में नहाए सदाबहार पेड़ों की खूबसूरती ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने घर जाकर एक छोटा देवदार का पेड़ काटा और लाया।

उन्होंने इस पेड़ को मोमबत्तियों (कैंडल) से सजाया, ताकि आकाश के तारों की उस चमक को अपने परिवार के सामने दोहराया जा सके।

Christmas 2025, Christmas tree, why decorate Christmas tree, importance of Christmas tree, how decorate Christmas tree, Christmas tree decoration, Christmas Eve, Christmas decoration tips, Christmas story, Christmas Tree history, Christmas Tree tradition, History of Christmas tree, Christmas tree origin, Martin Luther, Saint Boniface, Happy Christmas, Merry Christmas, Christmas wishes, Utility News, Religion News, Santa Claus

इस घटना के बाद से घर के अंदर क्रिसमस ट्री सजाने की प्रथा लोकप्रिय हो गई।

2. जर्मनी की प्राचीन परंपरा और सेंट बोनिफेस

एक दूसरी मान्यता के अनुसार, क्रिसमस ट्री की शुरुआत जर्मनी से हुई।

8वीं शताब्दी में एक अंग्रेज धर्मप्रचारक सेंट बोनिफेस जर्मनी में लोगों को ईसाई धर्म का उपदेश दे रहे थे।

कहा जाता है कि उन्होंने देखा कि कुछ लोग एक विशाल ओक के पेड़ (थंडर ओक) के नीचे एक बच्चे की बलि देने वाले थे।

क्रोधित होकर सेंट बोनिफेस ने उस ओक के पेड़ को काट डाला। जब पेड़ गिरा, तो उसकी जड़ के पास से एक छोटा फर का पेड़ उग आया।

सेंट बोनिफेस ने इसे ईश्वर का चमत्कार बताया और इसे सदाबहार होने के कारण अनंत जीवन और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक घोषित किया।

तब से जर्मनी में फर के पेड़ को पवित्र मानकर सजाने की परंपरा शुरू हुई।

Christmas 2025, Christmas tree, why decorate Christmas tree, importance of Christmas tree, how decorate Christmas tree, Christmas tree decoration, Christmas Eve, Christmas decoration tips, Christmas story, Christmas Tree history, Christmas Tree tradition, History of Christmas tree, Christmas tree origin, Martin Luther, Saint Boniface, Happy Christmas, Merry Christmas, Christmas wishes, Utility News, Religion News, Santa Claus

3. प्राचीन काल से जुड़ी परंपराएं

इतिहासकार बताते हैं कि सर्दियों में सदाबहार पेड़ों को सजाने की प्रथा ईसाई धर्म से भी पुरानी है।

प्राचीन मिस्र, रोम और अन्य यूरोपीय सभ्यताओं में, शीतल संक्रांति (विंटर सोल्स्टाइस) के समय सदाबहार पेड़ों, पत्तियों और लताओं को लगाने का चलन था।

इन्हें जीवन शक्ति, वसंत के आगमन और बुरी आत्माओं से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता था।

बाद में, जैसे-जैसे ईसाई धर्म फैला, इन पुरानी परंपराओं को क्रिसमस के नए संदर्भ में ढाल लिया गया।

कैसे फैली दुनिया में यह परंपरा?

19वीं शताब्दी में, जब इंग्लैंड के राजा प्रिंस अल्बर्ट (जो खुद जर्मन थे) ने विंडसर कैसल में एक शानदार क्रिसमस ट्री सजाया, तो यह ब्रिटेन में तेजी से लोकप्रिय हो गया।

अमेरिका में भी जर्मन और यूरोपीय लोगों के साथ यह परंपरा पहुंची और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में क्रिसमस का एक केंद्रीय प्रतीक बन गई।

Christmas 2025, Christmas tree, why decorate Christmas tree, importance of Christmas tree, how decorate Christmas tree, Christmas tree decoration, Christmas Eve, Christmas decoration tips, Christmas story, Christmas Tree history, Christmas Tree tradition, History of Christmas tree, Christmas tree origin, Martin Luther, Saint Boniface, Happy Christmas, Merry Christmas, Christmas wishes, Utility News, Religion News, Santa Claus

क्रिसमस ट्री सजाना केवल एक सजावट नहीं, बल्कि आशा, नवजीवन और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

यह परंपरा सदियों पुराने इतिहास, विभिन्न संस्कृतियों के मेल और मानवीय आस्था की एक सुंदर मिसाल है, जो हर साल क्रिसमस के त्योहार को रोशनी और खुशियों से भर देती है।

- Advertisement -spot_img