Homeन्यूजऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया चलाने पर...

ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया चलाने पर हो Ban, मद्रास हाई कोर्ट का सुझाव

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Social media ban for kids: मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सलाह देते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की संभावना तलाशे।

कोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया के मॉडल का हवाला देते हुए ऐसा कानून बनाने का सुझाव दिया है, जहां कम उम्र के बच्चों को सोशल नेटवर्किंग साइट्स इस्तेमाल करने से रोका गया है।

यह सिफारिश मदुरै बेंच के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान सामने आई।

याचिकाकर्ता एस विजयकुमार ने 2018 में यह मांग की थी कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) को पैरेंटल कंट्रोल सुविधा अनिवार्य रूप से देनी चाहिए, ताकि बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री से बचाया जा सके।

कोर्ट ने इस मामले में गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रहा अश्लील और यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और व्यवहारिक विकास को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।

न्यायाधीशों ने कहा कि इससे बच्चों के सामाजिक और नैतिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जो देश के लिए भी खतरनाक है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना केवल माता-पिता की ही नहीं, बल्कि सरकार की भी जिम्मेदारी है।

 

साइबर बुलिंग, गुमनाम उत्पीड़न और अनुपयुक्त सामग्री तक आसान पहुंच के मद्देनजर, कोर्ट ने तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

जब तक ऐसा कानून नहीं बनता, तब तक जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें अभिभावकों को सोशल मीडिया के नुकसान और बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित करें।

साथ ही, बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां बनाई जाएं।

इस फैसले का मकसद बच्चों को डिजिटल दुनिया के गंभीर खतरों से बचाना और एक सुरक्षित वातावरण तैयार करना है।

अब केंद्र सरकार कोर्ट की इस सलाह पर क्या कार्रवाई करती है, यह भविष्य के लिए अहम होगा।

- Advertisement -spot_img