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Indore Water Crisis: मौत का आंकड़ा 17 पहुंचा, गंदे पानी ने ली रिटायर्ड पुलिसकर्मी की जान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Indore Water Crisis: इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी (Contaminated Water) के सेवन से 17वीं मौत हो गई है।

रविवार को एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी की मौत के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब केंद्र और राज्य स्तर की विशेषज्ञ टीमें इंदौर में डेरा डाले हुए हैं।

बेटे से मिलने आए पिता की मौत

संक्रमण का ताजा शिकार धार जिले के निवासी 69 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा बने।

वे नए साल के मौके पर अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे।

परिजनों के अनुसार, भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद 1 जनवरी को उन्हें अचानक उल्टी और दस्त की शिकायत हुई।

जब उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में फैले संक्रमण की वजह से उनकी किडनी फेल हो गई है।

हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन रविवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।

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अस्पतालों की स्थिति और स्वास्थ्य सर्वे

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 398 मरीज इस जलजनित संक्रमण के कारण अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं।

इनमें से 256 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, लेकिन 142 मरीज अभी भी शहर के विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

संक्रमण की गहराई मापने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 4 जनवरी को भागीरथपुरा के 2354 घरों का सघन सर्वे किया।

इस दौरान 9416 लोगों की शारीरिक जांच की गई, जिसमें 20 नए मरीज सामने आए।

प्रशासन ने प्रभावित इलाके में 5 एंबुलेंस तैनात की हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया जा सके।

प्रशासनिक कदम और राहत कार्य

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की 17 टीमें लगातार गलियों में घूमकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।

हर घर में 10 ओआरएस पैकेट, 30 जिंक टैबलेट और पानी शुद्ध करने के लिए ‘क्लीन वाटर किट’ बांटी जा रही है।

इलाके में पाइपलाइन की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है और बोरिंग के लीकेज की जांच की जा रही है।

फिलहाल, क्षेत्र में पानी की सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई है और लोगों को टैंकरों व बोतलबंद पानी के जरिए पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

देशभर से आई विशेषज्ञों की टीम

इस संकट की गुत्थी सुलझाने के लिए केवल स्थानीय डॉक्टर ही नहीं, बल्कि कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आए विशेषज्ञ वैज्ञानिक भी सक्रिय हैं।

कोलकाता के डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी की टीम वैज्ञानिक पद्धति से पानी के रैंडम सैंपल ले रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी में किस तरह के घातक बैक्टीरिया या वायरस मौजूद हैं, जो सीधे किडनी और अंगों पर हमला कर रहे हैं।

हाईकोर्ट में सुनवाई और जवाबदेही

इस पूरे घटनाक्रम पर न्यायिक हस्तक्षेप भी शुरू हो गया है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है।

मंगलवार को राज्य शासन को हाईकोर्ट में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी है।

इस रिपोर्ट में अब तक हुई मौतों का कारण, मरीजों के इलाज की व्यवस्था, दूषित पानी के स्रोत की पहचान और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा देना होगा।

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