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11 हजार 501 करोड़ का प्रोजेक्ट, फिर भी सवारी को तरसी इंदौर मेट्रो: अब सिर्फ 25 मिनट चलेगी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Indore Metro Passenger Issue: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में यातायात की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए 11,501 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी।

लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि जिस मेट्रो को शहर की लाइफलाइन बनना था, वह अब दिन में मात्र 25 मिनट के एक सिंगल फेरे तक सिमट कर रह गई है।

मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने हाल ही में ये चौंकाने वाला फैसला लिया है।

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क्यों लिया गया यह फैसला?

रविवार से मेट्रो का संचालन दिन में केवल एक बार किया जाएगा।

यह ट्रेन दोपहर 3:00 बजे गांधी नगर स्टेशन से रवाना होगी और 3:25 बजे सुपर कॉरिडोर-03 से वापस आएगी।

इसके बाद यात्रियों के लिए गेट बंद कर दिए जाएंगे।

अधिकारियों का तर्क है कि यात्रियों की संख्या न के बराबर होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।

शेष समय में तकनीकी परीक्षण और ट्रायल रन किए जाएंगे।

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विफलता के तीन मुख्य कारण

किसी भी शहर में मेट्रो की सफलता के लिए तीन चीजें अनिवार्य होती हैं, जो फिलहाल इंदौर मेट्रो में नदारद दिखती हैं:

  1. अधूरा कॉरिडोर: वर्तमान में मेट्रो केवल 5 स्टेशनों के बीच चल रही है। जब तक यह मुख्य शहर और कामकाजी इलाकों को नहीं जोड़ती, तब तक आम जनता इसे परिवहन के विकल्प के रूप में नहीं अपनाएगी।
  2. लास्ट माइल कनेक्टिविटी की कमी: स्टेशन तक पहुँचने के लिए फीडर बसें या ई-रिक्शा जैसी सुविधाओं का अभाव यात्रियों को निजी वाहनों की ओर धकेलता है।
  3. गलत टाइमिंग: केवल दोपहर में एक फेरा लगाने से ऑफिस जाने वाले या कॉलेज जाने वाले छात्रों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
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प्लानिंग पर सवाल

अर्बन ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना को टुकड़ों में शुरू करना एक “प्लानिंग फेलियर” है।

जब तक पूरा नेटवर्क तैयार नहीं होता, लोग मेट्रो की आदत नहीं डालते।

31 मई 2025 को शुरू हुई यह सेवा अब अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।

अगर मार्च 2026 तक पूरा कॉरिडोर शुरू नहीं हुआ, तो यह भारी राजस्व घाटे का कारण बन सकता है।

एम डी एस. कृष्ण चैतन्य का कहना है कि काम अभी जारी है और जल्द ही अन्य स्टेशनों को जोड़ने के बाद यात्रियों की संख्या में इजाफा होगा।

लेकिन सवाल वही है क्या 11 हजार करोड़ के निवेश के बाद जनता को सिर्फ 25 मिनट की सेवा मिलना उचित है?

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