Homeन्यूजकाशी में बिना सूचना तोड़ी गई अहिल्याबाई की विरासत: मलबे में दबीं...

काशी में बिना सूचना तोड़ी गई अहिल्याबाई की विरासत: मलबे में दबीं प्राचीन मूर्तियां, PM-CM से हस्तक्षेप की मांग

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ahilyabai Holkar Manikarnika Ghat : काशी में विश्व प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और श्मशान घाट विकास परियोजना के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला सामने आया है।

मालवा की रानी देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक हिस्सों को बिना किसी पूर्व सूचना के ढहाए जाने से ‘खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट’ और देशभर के सनातन धर्मावलंबियों में भारी नाराजगी है।

क्या है पूरा विवाद?

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का एक बड़ा हिस्सा, जिसका निर्माण वर्ष 1791 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था, हाल ही में विकास कार्यों के नाम पर तोड़ दिया गया।

ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत राव होलकर का आरोप है कि प्रशासन और नगर निगम ने इस ध्वस्तीकरण से पहले न तो ट्रस्ट को सूचित किया और न ही ऐतिहासिक मूर्तियों के संरक्षण की कोई व्यवस्था की।

इस कार्रवाई के दौरान अहिल्याबाई होलकर की प्राचीन प्रतिमाएं, धार्मिक प्रतीक और एक शिवलिंग के मलबे में दबने व क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई हैं।

यशवंत राव होलकर ने खुद वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि जिस अहिल्याबाई ने काशी का जीर्णोद्धार किया, आज उन्हीं की विरासत को विकास के नाम पर कुचला जा रहा है।

इंदौर में फूटा गुस्से का गुबार

इस घटना की गूंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से लेकर देवी अहिल्याबाई की कर्मभूमि इंदौर तक सुनाई दे रही है।

इंदौर के निवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों (धनगर, पाल, बघेल समाज) ने इसे आस्था पर सीधा प्रहार बताया है।

लोगों का कहना है कि यह केवल पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र था।

विशेष रूप से अहिल्याबाई होलकर के 300वें जन्म वर्ष के समापन के समय इस तरह की घटना ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है।

PM मोदी और CM योगी से अपील

होलकर ट्रस्ट और राजपरिवार ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

ट्रस्ट की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  2. दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
  3. मलबे में दबी मूर्तियों को सुरक्षित निकालकर ट्रस्ट को सौंपा जाए।
  4. इन ऐतिहासिक मूर्तियों को पूर्ण सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाए।

ट्रस्ट ने पत्र में यह भी लिखा है कि प्रधानमंत्री ने खुद काशी विश्वनाथ धाम में अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा लगाकर उन्हें सम्मान दिया था, लेकिन उनके अधीनस्थ विभाग उन्हीं की विरासत को नष्ट कर रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष और प्रोजेक्ट की लागत

वाराणसी प्रशासन के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से श्मशान घाट पुनर्विकास परियोजना चल रही है।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य घाट पर दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।

जिलाधिकारी (DM) का कहना है कि मूर्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है, बल्कि उन्हें सुरक्षित कर जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

हालांकि, धरातल पर मलबे में दबी मूर्तियों की तस्वीरों ने प्रशासन के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

ऐतिहासिक महत्व

मणिकर्णिका घाट केवल एक श्मशान घाट नहीं है, बल्कि काशी का दिल है।

18वीं शताब्दी में जब हिंदू मंदिरों और घाटों की स्थिति जर्जर थी, तब महारानी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में इनका पुनर्निर्माण कराया था।

मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियां और वहां स्थापित शिव आराधना से जुड़ी प्रतिमाएं स्थापत्य कला और धार्मिक इतिहास का अनमोल हिस्सा हैं।

- Advertisement -spot_img