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बसंत पंचमी पर रहेगी सरस्वती पूजा की धूम लेकिन शादी विवाह के मुहूर्त नहीं

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

No Weddings on Basant Panchami: हर साल बसंत पंचमी के त्यौहार को हिंदू धर्म में एक ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश किया जा सकता है।

लेकिन साल 2026 में 23 जनवरी को पड़ने वाली बसंत पंचमी पर परिस्थितियां कुछ अलग होंगी।

इस बार इस पावन तिथि पर विवाह की शहनाइयां नहीं गूंजेंगी।

ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल शुक्र ग्रह (शुक्र तारा) के अस्त होने की वजह से विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।

शुक्र तारा अस्त होने का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को दांपत्य सुख, प्रेम, वैभव और वंश वृद्धि का कारक माना गया है।

शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि जब तक गुरु (बृहस्पति) और शुक्र उदय अवस्था में न हों, तब तक विवाह जैसे संस्कार संपन्न नहीं किए जा सकते।

अगर तारा अस्त हो, तो किए गए मांगलिक कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

इस वर्ष शुक्र का तारा 31 जनवरी 2026 की रात को उदित होगा, जिसके बाद ही शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे।

भले ही शादी न हो, भक्ति में नहीं आएगी कमी

भले ही इस दिन शादियां न हों, लेकिन बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व कम नहीं होगा।

यह दिन मुख्य रूप से ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है।

23 जनवरी को भक्त माता सरस्वती की विशेष आराधना करेंगे।

पीले वस्त्र धारण करना, माता को पीले फूल, बूंदी के लड्डू और मालपुआ अर्पित करना इस दिन की मुख्य परंपरा है।

प्रकृति भी इस समय अपने चरम यौवन पर होती है, जिसे ‘ऋतुराज बसंत’ के आगमन के रूप में मनाया जाता है।

महाकाल और सांदीपनि आश्रम में विशेष उत्सव

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस दिन का विशेष उल्लास देखने को मिलेगा।

भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बसंती फूलों से मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा और संध्या आरती में अबीर-गुलाल उड़ाकर फाग उत्सव की शुरुआत होगी।

वहीं, भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में छोटे बच्चों का ‘विद्यारंभ संस्कार’ यानी पाटी पूजन कराया जाएगा।

मान्यता है कि इस दिन शिक्षा की शुरुआत करने से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है।

कब बजेगी शहनाई? (आगामी मुहूर्त)

शादी की योजना बना रहे परिवारों के लिए फरवरी का महीना राहत लेकर आएगा। पंचांग के अनुसार:

  • फरवरी 2026: 4, 10 और 20 तारीख को विवाह के श्रेष्ठ मुहूर्त हैं।

  • मार्च-अप्रैल: इन महीनों में भी विवाह के कुछ सीमित योग बन रहे हैं।

  • मई 2026: 17 मई से अधिक मास (ज्येष्ठ) शुरू हो जाएगा, जिसके कारण फिर से डेढ़ महीने तक मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी।

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