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MP में पेंशन क्रांति: अब बेटे से पहले बड़ी बेटी का हक, दिव्यांग बच्चों और तलाकशुदा बेटियों को भी राहत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Pension Rule Changes मध्य प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है।

राज्य के दशकों पुराने पेंशन नियमों में बड़े परिवर्तन का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य परिवार की बेटियों और दिव्यांग आश्रितों को अधिक सशक्त और सुरक्षित बनाना है।

ये नए नियम आगामी 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में प्रभावी होने की संभावना है।

बेटियों को प्राथमिकता

नए प्रस्तावित नियमों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब परिवार पेंशन के निर्धारण में ‘बड़ा’ होना ही एकमात्र पैमाना होगा, लिंग (Gender) नहीं।

वर्तमान नियमों के अनुसार, अक्सर बेटों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब अगर घर में बेटी बेटे से बड़ी है, तो माता-पिता के निधन के बाद पेंशन की पहली हकदार वही होगी।

यह कदम समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और बेटियों के सम्मान को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है।

अविवाहित और तलाकशुदा बेटियों को सहारा

सरकार ने उन बेटियों की चिंता की है जो आर्थिक रूप से अपने माता-पिता पर निर्भर थीं।

नए नियमों के तहत अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों को अब जीवनभर पेंशन का लाभ मिल सकेगा।

पहले इसके लिए उम्र या अन्य बाधाएं आड़े आती थीं, लेकिन अब वे निश्चिंत होकर अपना जीवन यापन कर सकेंगी।

हालांकि, इसके लिए उन्हें हर साल एक स्व-घोषणा पत्र देना होगा कि उनकी स्थिति (वैवाहिक स्थिति) में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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दिव्यांगों के लिए विशेष 

जो बच्चे शारीरिक या मानसिक दिव्यांगता के कारण आजीविका कमाने में सक्षम नहीं हैं, सरकार ने उन्हें भी आजीवन पेंशन की श्रेणी में रखा है।

इसमें कर्मचारी के दिव्यांग पुत्र, पुत्री और यहां तक कि आश्रित भाई को भी शामिल किया गया है।

पारदर्शिता के लिए, स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में केवल एक बार सत्यापन कराना होगा, जबकि अस्थायी दिव्यांगता के मामलों में हर पांच साल में मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

MP Pension Rule Changes

दोहरी पेंशन और अन्य प्रावधान

  • डबल पेंशन: अगर पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में थे, तो उनकी मृत्यु के बाद बच्चों को दोनों की फैमिली पेंशन का लाभ मिल सकेगा। अब किसी एक पेंशन को छोड़ने की मजबूरी नहीं होगी।

  • गोद ली गई संतान: कानूनी रूप से गोद ली गई संतानों को भी अब सगी संतान की तरह ही पेंशन के समान अधिकार मिलेंगे।

  • आय सीमा का नियम: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अगर पेंशन प्राप्त कर रहा आश्रित स्वयं नौकरी करने लगता है या आय अर्जित करने लगता है, तो उसकी पेंशन बंद कर दी जाएगी। यह योजना शुद्ध रूप से उन आश्रितों के लिए है जिनके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है।

1 अप्रैल से लागू होने वाले ये नियम मध्य प्रदेश के सरकारी सेवा क्षेत्र में एक नई सामाजिक सुरक्षा की नींव रखेंगे।

इससे न केवल बुजुर्गों के जाने के बाद उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि बेटियों को भी समाज में एक मजबूत आर्थिक आधार मिलेगा।

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