Avimukteshwaranand controversy: प्रयागराज के संगम तट पर चल रहे माघ मेला स्नान का विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है।
ज्योतिष्पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी प्रशासन के बीच यह टकराव 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) से शुरू हुआ।
उस दिन शंकराचार्य अपनी पारंपरिक पालकी में स्नान के लिए जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
इसके बाद हुई धक्का-मुक्की और प्रशासन द्वारा शंकराचार्य से उनकी पदवी का प्रमाण (सर्टिफिकेट) मांगने की घटना ने पूरे संत समाज को आक्रोशित कर दिया है।

तीनों शंकराचार्यों का मिला साथ
इस विवाद में अब द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज खुलकर सामने आए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य परंपरा उत्तराधिकार से चलती है।
स्वामी सदानंद ने कहा, “शंकराचार्य का शिष्य ही शंकराचार्य होता है। हम दोनों (सदानंद और अविमुक्तेश्वरानंद) एक ही गुरु के शिष्य हैं और श्रृंगेरी के शंकराचार्य ने उनका अभिषेक किया है। प्रशासन को यह पूछने का कोई हक नहीं है कि असली शंकराचार्य कौन है।”
हां, कोई भी शंकराचार्य न कहलवाए, इसलिए अन्य शंकराचार्यों का समर्थन जरूरी है। अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन असली शंकराचार्यों का महत्व कम करने के लिए ‘नकली’ लोगों को मेले में स्थान दे रहा है।
वे कई लोगों को जगद्गुरु की उपाधि दे रहे हैं, शंकराचार्य की उपाधि दे रहे हैं, नकली शंकराचार्य बना रहे हैं।
Those claiming that Avimukteshwaranand Ji is not a Shankaracharya have received a strong response from Dwarka Peeth Shankaracharya Swami Sadanand Saraswati.
He clarified that Shankaracharyas are appointed through the traditional guru–disciple lineage, not by the government or… pic.twitter.com/XyoSJh2QMX
— Desh Ka Verdict (@DeshKaVerdict) January 23, 2026
ब्राह्मणों पर पुलिसिया कार्रवाई से भड़के
शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने प्रशासन द्वारा ब्राह्मण बच्चों और शिष्यों के साथ की गई मारपीट की कड़े शब्दों में निंदा की है।
उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन को रोकना ही था, तो वे बच्चों को सम्मानपूर्वक हिरासत में ले सकते थे, लेकिन उनके साथ निर्दयता से मारपीट करना अधार्मिक है।
स्वामी जी का मानना है कि राजा (प्रशासक) को धार्मिक होना चाहिए और प्रजा के हित में काम करना चाहिए, न कि उनके धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा डालनी चाहिए।
स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन से भूल हुई है। उन्होंने छोटे-छोटे बच्चों को मारा है और उन्हें क्षमा मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी क्या कह रहे हैं, प्रशासन जाकर क्षमा मांग ले, वे स्नान करें, पूरा विवाद खत्म हो जाएगा।
The Shankaracharya of Dwarka’s Sharada Peeth, Swami Sadanand Saraswati, has also expressed support for Shankaracharya Avimukteshwaranand.
— Desh Ka Verdict (@DeshKaVerdict) January 21, 2026
पिटाई से नाराज PCS अफसर का इस्तीफा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से पिटाई से नाराज बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने 5 पेज के लेटर में लिखा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़ी गई। इससे आहत होकर उन्होंने यह फैसला लिया।
ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। इससे ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ सोच के साथ काम कर रहे हैं। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ब्राह्मण की बात करने वाला कोई नहीं है।

राजनीति और ‘बुलडोजर’ वाले नारे
इस विवाद में राजनीतिक रंग भी गहराता जा रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि मौर्य एक समझदार नेता हैं, लेकिन उन्हें ‘दबाया’ जा रहा है।
बताओ कितना बाधा गया है केशव प्रसाद मौर्य जी को,
ये जाना तो चाहते है लेकिन जा नहीं सकते है।
बताओ ये पिछड़े या मौर्या समाज का सम्मान कैसे दिला पाएंगे।pic.twitter.com/aFoXpiwf3L
— A.K. Stalin (@iamAKstalin) January 25, 2026
दूसरी ओर, शिविर में कुछ युवकों द्वारा ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया है।
शंकराचार्य ने इसे प्रशासन की तानाशाही बताया और साफ कर दिया कि वे किसी भी जुल्म के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
गोल्डन बाबा का अलग नजरिया
वहीं, दूसरी ओर ‘गोल्डन बाबा’ ने इस पूरे विवाद को सनातन विरोधी ताकतों की साजिश बताया है।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जानबूझकर इस विवाद में घसीटा जा रहा है ताकि हिंदू समाज में फूट डाली जा सके।
उनके अनुसार, यह स्थिति हिंदुओं को आपस में बांटने के लिए पैदा की गई है।
Google Golden Baba
₹5 करोड़ के सोने के जेवरात पहनने वाले गूगल गोल्डन बाबा उर्फ मनोज आनंद ने अपने सिर पर CM आदित्यनाथ योगी को फोटो वाला मुकुट पहना हुआ है. फोटो के पास लिखा है “भावी प्रधानमंत्री”#Kanpur के यह बाबा Prayagraj माघ मेले में विराजमान है pic.twitter.com/zciVo0oLa2
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) January 16, 2026
समाधान क्या है?
फिलहाल अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं।
प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर मेले से प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है।
वहीं, संतों का कहना है कि अगर प्रशासन अपनी भूल स्वीकार कर ले और माफी मांग ले, तो यह विरोध तुरंत खत्म हो सकता है।
यह विवाद अब केवल एक स्नान का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के सम्मान और प्रशासनिक दखल के बीच की लड़ाई बन चुका है।


