Pashupatinath Lok Mandsaur: 29 जनवरी, गुरुवार का दिन मध्यप्रदेश के मंदसौर के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।
आज प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक ऐसे प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने जा रहे हैं, जो न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि आस्था का भी एक बड़ा केंद्र बनेगा।
मंदसौर में शिवना नदी के पावन तट पर स्थित भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में ‘पशुपतिनाथ लोक’ बनकर तैयार हो चुका है।
करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से बना यह भव्य कॉरिडोर अब आम जनता और शिव भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा।

महाकाल लोक की तर्ज पर बना पशुपतिनाथ लोक
इस लोक को उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक की तरह ही डिजाइन किया गया है।
15 बीघा जमीन पर फैले इस कॉरिडोर को राजस्थान के विशेष लाल पत्थरों से तराशा गया है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तुकला है। जैसे ही भक्त यहां प्रवेश करेंगे, उन्हें अयोध्या की शैली में बने विशाल प्रवेश द्वार दिखाई देंगे।
इस लोक की कुछ मुख्य विशेषताएं जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देंगी:
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22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र: परिसर में भगवान शिव का एक विशाल त्रिनेत्र बनाया गया है, जिसके बीच में रुद्राक्ष स्थापित है। यह श्रद्धालुओं के लिए सेल्फी पॉइंट और श्रद्धा का केंद्र होगा।
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विशाल डमरू: कॉरिडोर में एक बहुत बड़ा डमरू भी स्थापित किया गया है, जो शिव भक्ति का प्रतीक है।
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म्यूरल वॉल (दीवारों पर शिव गाथा): यहां की दीवारों पर भगवान शिव की लीलाओं को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। पेंटिंग्स और नक्काशियों के जरिए भगवान पशुपतिनाथ के इतिहास और उनकी महिमा को दर्शाया गया है।
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सुविधाएं: यहां आने वाले भक्तों के लिए गार्डन, सरोवर, पूजा सामग्री की दुकानें, रेस्टोरेंट, पार्किंग और विश्राम गृह जैसी आधुनिक सुविधाएं बनाई गई हैं।

दुनिया की इकलौती अष्टमुखी प्रतिमा
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव की अष्टमुखी (आठ मुख वाली) प्रतिमा है, जिसे विश्व में अपनी तरह की इकलौती माना जाता है।
आमतौर पर नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में लोग जानते हैं, लेकिन वहां प्रतिमा चतुर्मुखी (चार मुख वाली) है।
मंदसौर का यह मंदिर इसलिए खास है क्योंकि यहां महादेव के आठ मुख हैं।
मान्यता है कि ये आठ मुख मानव जीवन की विभिन्न अवस्थाओं और भावों को दर्शाते हैं।

1500 साल पुरानी है प्रतिमा
इतिहासकारों का मानना है कि यह प्रतिमा लगभग 1500 साल पुरानी (विक्रम संवत 575 ईस्वी) है।
यह करीब 46 क्विंटल वजनी है और एक ही विशाल पत्थर को तराशकर बनाई गई है।
इसके आठ मुख मानव जीवन की आठ अलग-अलग भावनाओं और अवस्थाओं को दर्शाते हैं।
कहा जाता है कि 1940 में ‘उदाजी धोबी’ नाम के व्यक्ति को शिवना नदी के भीतर इस प्रतिमा के दर्शन हुए थे।
करीब 21 साल तक यह प्रतिमा नदी के किनारे ही रही और फिर 1961 में मंदिर की स्थापना कर इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
An extremely rare and massive 8-faced Shivalingam at Pashupatinath Mandir, Mandsaur.
Har Har Mahadev … pic.twitter.com/a9YG4YrEOe
— (@VoiceOfSaurabh5) December 8, 2023
ASI ने किया संरक्षण
हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक विशेषज्ञ टीम ने इस प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण का कार्य पूरा किया है।
समय के साथ प्राचीन प्रतिमा पर कुछ खरोंचें और दरारें आने लगी थीं।
इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक विशेषज्ञ टीम, जो खास तौर पर पश्चिम बंगाल से बुलाई गई थी, उसने प्रतिमा के संरक्षण का काम किया है।
प्रतिमा की पुरानी चमक वापस लाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया है।

दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था
वर्तमान में संरक्षण कार्य के चलते गर्भगृह में प्रवेश वर्जित है, ऐसे में भक्तों के लिए बाहर से दर्शन की उचित व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल प्रतीक्षालय, पार्किंग, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, भोजनशाला और अतिथि विश्राम गृह जैसी सुविधाएं भी विकसित की हैं।
सुरक्षा के लिए आधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क और अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाया गया है।

कैसे साकार हुआ यह सपना?
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब मंदसौर आए थे, तब स्थानीय लोगों ने महाकाल लोक जैसा कॉरिडोर बनाने की मांग रखी थी।
इस परियोजना की घोषणा दिसंबर 2022 में शिवराज सिंह चौहान ने की थी और अक्टूबर 2023 में इसका भूमि पूजन किया गया था।
पिछले 2 साल और 4 महीनों से मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात के लगभग 100 कुशल मजदूर रात-दिन इस काम में जुटे थे।
सुरक्षा के लिहाज से भी प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
पूरे परिसर की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जाएगी।
Madhya Pradesh News-
Grand spiritual complex at Pashupatinath Lok in Mandsaur is nearing completion.
Alongside construction, special care is being taken to preserve ancient 8 faced idol of Lord Pashupatinath.
Vibrant paintings depict real story from appearance of idol to its… pic.twitter.com/DQsWrjgGMl
— News Arena India (@NewsArenaIndia) December 17, 2025
पशुपतिनाथ की महिमा
हिंदू धर्म में भगवान शिव को ‘पशुपति’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘सभी जीवों के स्वामी’।
शिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति पशुपतिनाथ के दर्शन करता है, उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं। साथ ही आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
मंदसौर की यह अष्टमुखी प्रतिमा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार पुरुषार्थों का भी बोध कराती है।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पशुपतिनाथ लोक के शुरू होने से मंदसौर में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी।
जिस तरह उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद वहां श्रद्धालुओं की संख्या करोड़ों में पहुंच गई, वैसी ही उम्मीद मंदसौर के लिए भी की जा रही है।
इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, होटल इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी और शहर की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

आज शाम जब शिवना नदी के तट पर विशेष दीपदान और आरती होगी, तो पशुपतिनाथ लोक की छटा देखते ही बनेगी।
रंग-बिरंगी लाइटों से सराबोर यह कॉरिडोर अब सदियों तक सनातन संस्कृति और कला का गवाह बनेगा।


