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अजित पवार के बाद अब कौन बनेगा NCP का ‘पावर सेंटर’, महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ajit Pawar NCP Successor: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक युग का अंत हो गया है।

राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख नेता अजित पवार का आज सुबह (28 जनवरी, 2026, बुधवार) पुणे के बारामती एयरपोर्ट के पास विमान हादसे में निधन हो गया।

यह हादसा सुबह करीब 8:48 बजे हुआ। जिसमें अजित पवार के साथ उनके सुरक्षाकर्मी और विमान चालक दल के सभी सदस्यों की मौत हो गई।

वे बारामती में जिला परिषद चुनाव के लिए होने वाली जनसभाओं में शामिल होने जा रहे थे।

इस दुखद घटना के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में राजकीय शोक की घोषणा की है।

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कौन संभालेगा बारामती की विरासत?

अजित पवार के निधन से न केवल पवार परिवार और एनसीपी, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।

‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार पिछले चार दशकों से राज्य की सत्ता की दिशा तय करने वाली शख्सियत थे।

उनकी समझदारी, जमीन से जुड़ाव और फैसले लेने की दृढ़ता के लिए उन्हें जाना जाता था।

उनके जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि महाराष्ट्र की राजनीति का यह ‘पावर हाउस’ अब क्या खत्म हो जाएगा?

और कौन संभालेगा उनकी राजनीतिक विरासत, खासकर उनके गढ़ बारामती और मराठवाड़ा को?

कौन होगा अजित पवार का उत्तराधिकारी? 

अजित पवार के निधन के बाद अब सबकी नजरें उनके परिवार और एनसीपी पर टिकी हैं।

सवाल यह है कि बारामती की कमान अब कौन संभालेगा?

अजित पवार ने खुद कोई राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं छोड़ा है, लेकिन परिवार में कुछ चेहरे ऐसे हैं जो इस भूमिका में आ सकते हैं:

पार्थ पवार:

अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार का नाम सबसे पहले लिया जा रहा हैं।

उन्होंने 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, हालांकि वह हार गए थे।

पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उन पर आ सकती है और उन्हें जल्द ही सक्रिय राजनीति में आगे आना पड़ सकता है।

जय पवार:

अजित पवार के दूसरे बेटे जय पवार अब तक पारिवारिक व्यवसायों की देखरेख करते रहे हैं।

लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें भी राजनीति में प्रवेश करने पर विचार करना पड़ सकता है।

सुनेत्रा पवार:

अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हैं।

वह पहले से ही बारामती के सामाजिक और विकास कार्यों में सक्रिय रही हैं।

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि वह परिवार की विरासत संभालने के लिए सबसे मजबूत दावेदार हो सकती हैं।

उनका जमीन से जुड़ाव और साफ छवि उनके लिए बड़ा प्लस पॉइंट है।

इसके अलावा, पवार परिवार के दूसरे सदस्य जैसे अजित के बड़े भाई और सफल बिजनेसमैन श्रीनिवास पवार, जिनकी सलाह अजित पवार लिया करते थे, अब परिवार की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

वहीं, अजित पवार के भतीजे और शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार भी इस समीकरण का हिस्सा हैं।

क्या NCP के दोनों गुट फिर होंगे एक? 

पिछले कुछ सालों में एनसीपी दो धड़ों – अजित पवार गुट और शरद पवार गुट में बंट गई थी।

लेकिन अजित पवार के निधन के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी के ये दोनों गुट फिर से एक हो जाएंगे?

हाल ही में, अजित पवार और शरद पवार गुट की नेता सुप्रिया सुले (जो खुद बारामती की सांसद हैं और अजित की चचेरी बहन हैं) के बीच बढ़ती नजदीकी के संकेत मिले थे।

दोनों गुटों ने कुछ संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किए थे।

एनसीपी नेता संजय राउत ने भी एक बयान में कहा था कि अजित पवार का दिल हमेशा अपने परिवार (शरद पवार) के साथ था।

ऐसे में, यह समय पारिवारिक और राजनीतिक एकजुटता का हो सकता है।

शरद पवार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने भतीजे की राजनीतिक विरासत को सहेजना और पूरे कुनबे को एक सूत्र में बांधे रखना होगा।

इसमें सुप्रिया सुले की भूमिका एक ‘ब्रिज’ के रूप में बेहद खास होगी।

महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? 

अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

वह न केवल सत्ताधारी महायुति गठबंधन के एक मजबूत स्तंभ थे, बल्कि मराठा राजनीति की एक बड़ी आवाज भी थे।

उनके बिना आने वाले नगर निकाय और जिला परिषद चुनावों में सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और जीत दिलाने में माहिर थे।

हालांकि, यह कहना कि पवार परिवार का ‘पावर हाउस’ खत्म हो जाएगा, जल्दबाजी होगी।

पवार परिवार की जड़ें महाराष्ट्र, खासकर बारामती की मिट्टी में काफी गहरी हैं।

शरद पवार जैसा दिग्गज नेता अभी मौजूद है। परिवार की अगली पीढ़ी के सदस्य राजनीति में आने को तैयार हैं।

ऐसे में, संभव है कि थोड़े समय के संकट और पुनर्गठन के बाद पवार परिवार एक बार फिर से एकजुट होकर अपनी ताकत को कायम रखे।

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बारामती की विरासत अब तक कई उतार-चढ़ाव देख चुकी है और इस बार भी परिवार इसे संभालने में सक्षम होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

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