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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म: युमनाम खेमचंद सिंह बनेंगे CM, राज्यपाल से मिलकर पेश किया दावा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Manipur New CM Y Khemchand: मणिपुर में पिछले करीब एक साल से चला आ रहा राजनीतिक अनिश्चितता का दौर अब खत्म होने जा रहा है।

राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) को आधिकारिक तौर पर हटा लिया गया है और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।

गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के बाद अब राज्य की कमान एक बार फिर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में होगी।

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कैसे बदली राज्य की तस्वीर?

फरवरी 2025 में मणिपुर की स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी।

तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे और राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया था।

पिछले एक साल से राज्य का पूरा प्रशासन केंद्र और राज्यपाल के जरिए चलाया जा रहा था।

13 फरवरी 2025 से लागू हुआ यह शासन 12 फरवरी 2026 को अपनी अवधि पूरी करने से पहले ही हटा लिया गया है, क्योंकि राज्य में अब धीरे-धीरे शांति बहाल हो रही है।

वाई. खेमचंद सिंह: नए मुख्यमंत्री के रूप में एक मजबूत चेहरा

बीजेपी ने इस बार राज्य की कमान युमनाम खेमचंद सिंह को सौंपने का फैसला किया है।

बुधवार को एनडीए विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया।

कौन हैं खेमचंद सिंह?

62 वर्षीय खेमचंद सिंह मेतई समुदाय से आते हैं और सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं।

  • वह पेशे से एक इंजीनियर रहे हैं और आरएसएस (संघ) के काफी करीबी माने जाते हैं।
  • बीरेन सिंह की सरकार में उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायती राज और आवास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला था।
  • उनकी सबसे बड़ी खूबी उनका निष्पक्ष स्वभाव माना जाता है, जो उन्होंने विधानसभा स्पीकर के पद पर रहते हुए दिखाया था।

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समावेशी राजनीति का बड़ा संकेत

इस बार सरकार गठन के दावे में सबसे खास बात यह रही कि खेमचंद सिंह के साथ राजभवन जाने वाले डेलिगेशन में कुकी-जो बहुल जिलों (चुराचांदपुर और फेरजॉल) के दो विधायक भी शामिल थे।

मणिपुर जैसे राज्य में, जो पिछले काफी समय से जातीय संघर्ष से जूझ रहा है, कुकी विधायकों का भाजपा के साथ दिखना एक बेहद सकारात्मक संकेत है।

यह दिखाता है कि नई सरकार राज्य के सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी।

बीजेपी की रणनीतिक तैयारी

नई सरकार के गठन की नींव पिछले साल दिसंबर में ही रखी जा चुकी थी।

दिल्ली में हुई हाई-लेवल बैठकों में बीएल संतोष और संबित पात्रा जैसे दिग्गज नेताओं ने मणिपुर के विधायकों के साथ लंबी चर्चा की थी।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर मणिपुर भेजा गया था, ताकि बिना किसी गुटबाजी के नए नेता का चुनाव हो सके।

आगे की चुनौतियां और उम्मीदें

भले ही राष्ट्रपति शासन हट गया हो, लेकिन नए मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के सामने चुनौतियों का पहाड़ है।

उन्हें न केवल राज्य में पूरी तरह शांति बहाल करनी है, बल्कि बेघर हुए लोगों का पुनर्वास और समुदायों के बीच टूटे भरोसे को फिर से जोड़ना होगा।

60 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, ऐसे में अगले एक-डेढ़ साल राज्य के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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