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ब्राह्मण समाज की आपत्ति के बाद हटाया गया ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर-पोस्टर, डायरेक्टर ने दी ये सफाई

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ghooskhor Pandat Controversy: नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडत पर विवाद बढ़ता जा रहा है।

इस पूरे विवाद का केंद्र फिल्म का ‘टाइटल’ यानी नाम है। फिल्म का नाम है ‘घूसखोर पंडत’।

दिल्ली, यूपी और उज्जैन के बाद अब राजस्थान के जयपुर में ‘सर्व ब्राह्मण महासभा’ सहित देश के कई हिस्सों में ब्राह्मण संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

ब्राह्मण समाज में गुस्सा

उनका तर्क है कि ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल विद्वानों और एक पूरे समुदाय के लिए किया जाता है।

इसके साथ ‘घूसखोर’ (भ्रष्ट) जैसा शब्द जोड़ना न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह एक विशेष जाति की छवि को अपराधी और भ्रष्ट के रूप में पेश करने की कोशिश है।

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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी समुदाय की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है।

इसी विरोध के चलते दिल्ली हाई कोर्ट में फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की याचिका भी दायर कर दी गई है।

डायरेक्टर ने तोड़ी चुप्पी

विवाद को बढ़ता देख फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनकी फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक (Fiction) है।

नीरज पांडे ने कहा, “यह फिल्म एक पुलिस ड्रामा है। इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल किसी जाति को टारगेट करने के लिए नहीं, बल्कि एक काल्पनिक किरदार के उपनाम (Nick name) के तौर पर किया गया है। हमारी मंशा किसी की भावनाओं को आहत करने की नहीं है।”

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मेकर्स ने हटाए टीजर-पोस्टर  

मेकर्स ने फिलहाल नेटफ्लिक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से फिल्म का टीजर, पोस्टर और सारा प्रमोशनल कंटेंट हटा लिया है।

पांडे ने अपील की है कि फिल्म को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि सिर्फ एक नाम के आधार पर।

मनोज बाजपेयी का रिएक्शन

‘घूसखोर पंडत’ को लेकर चल रहे विवाद पर एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी प्रतिक्रिया दी है।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए बयान में उन्होंने कहा कि वह लोगों की भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। 

उन्होंने साफ किया कि एक एक्टर के तौर पर वह किसी फिल्म से उसके किरदार और कहानी के जरिए जुड़ते हैं।

इसका मकसद किसी भी समुदाय पर टिप्पणी करना नहीं था।

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कानूनी शिकंजा और NHRC का नोटिस

मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा।

मुंबई के समता नगर पुलिस स्टेशन में शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सख्त रुख अपनाते हुए FIR दर्ज की गई है।

इतना ही नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में दखल दिया है।

आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

आयोग का मानना है कि इस तरह के विवादास्पद टाइटल से समाज में वैमनस्य फैल सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

फिल्म इंडस्ट्री के भीतर से भी उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि ‘फिल्म मेकर्स कंबाइन’ नामक संस्था ने भी नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स को नोटिस भेजा है।

संस्था का आरोप है कि इस फिल्म के टाइटल के लिए जो अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और अनुमति प्रक्रिया होती है, उसका पालन नहीं किया गया।

बिना टाइटल क्लीयरेंस के फिल्म का प्रमोशन करना नियमों का उल्लंघन है।

आगे क्या होगा?

ऐसा लगता है कि मेकर्स को फिल्म का नाम बदलना पड़ सकता है।

बॉलीवुड में पहले भी ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ (लक्ष्मी) और ‘पद्मावती’ (पद्मावत) जैसी फिल्मों के नाम भारी विरोध के बाद बदले गए हैं।

मनोज बाजपेयी के फैंस इस बात से थोड़े निराश जरूर हैं कि उनकी फिल्म विवादों में फंस गई है, लेकिन मेकर्स का कहना है कि वे कहानी के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।

अब देखना यह होगा कि क्या ‘घूसखोर पंडत’ नए नाम के साथ वापसी करती है या कोर्ट की कार्यवाही इसे और लंबा खींचेगी।

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