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भारत माता को बेचने में शर्म नहीं आई- राहुल के सवाल पर भड़के रिजिजू, बोले- भारत को कोई नहीं बेच सकता

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi Lok Sabha: लोकसभा में बजट सत्र के दौरान उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील और भारत की सुरक्षा को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया।

उनके भाषण में ऐसी बातें थीं कि सत्ता पक्ष के मंत्रियों, खासकर किरेन रिजिजू, ने इसका कड़ा विरोध किया।

‘भारत माता को बेचने’ वाले बयान पर तकरार

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत काफी आक्रामक अंदाज में की।

उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से सवाल पूछा कि क्या उन्हें “भारत को बेचने में शर्म नहीं आई?”

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश के हितों को ताक पर रखकर अमेरिका के साथ ऐसी डील की है जो भारत की संप्रभुता के खिलाफ है।

राहुल ने भावुक होते हुए कहा कि “आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है।”

राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह सामान्य स्थिति में ऐसा नहीं करते, लेकिन वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उन पर दबाव बना रहे हैं।

राहुल के शब्दों में— “प्रधानमंत्री डरे हुए हैं और उनकी आंखों में वह डर साफ देखा जा सकता है।”

एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी का नाम

राहुल गांधी ने कहा- अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं हुई? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है।

मैं हरदीप पुरी से भी पूछना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि अनिल अंबानी को एपस्टीन से किसने मिलवाया था, और हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने उन्हें मिलवाया था

“हम किसी के नौकर नहीं हैं”

राहुल गांधी ने एक बड़ा मुद्दा ‘भारतीय डेटा’ का उठाया।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में अगर अमेरिका को अपनी सुपरपावर की कुर्सी बचाए रखनी है, तो उसे भारतीय लोगों के डेटा की जरूरत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना सोचे-समझे डेटा की चाबी अमेरिका के हाथों में थमा दी है।

राहुल के मुताबिक, अगर उनकी ‘इंडिया ब्लॉक’ की सरकार होती, तो वह ट्रम्प से बराबरी पर बात करते।

उन्होंने दो टूक कहा, “हम किसी के नौकर नहीं हैं।

अमेरिका यह तय नहीं करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे और किससे नहीं।”

किसानों और बजट पर घेराबंदी

किसानों की स्थिति पर बात करते हुए राहुल ने कहा कि इस ट्रेड डील से भारतीय किसानों की कमर टूट जाएगी।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका से आयात कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे हमारे अपने बाजार प्रभावित होंगे।

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि अमेरिका के लिए टैरिफ घटाकर जीरो कर दिया गया, जबकि भारत के हितों को कुचल दिया गया।

हम युद्ध के दौर में जी रहे हैं

राहुल ने यह भी कहा कि पूरी दुनिया इस समय युद्ध की आग में है—चाहे वह गाजा हो या यूक्रेन।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध का दौर खत्म हो गया है। लेकिन असल में, हम युद्ध के दौर में जी रहे हैं।

आप देख सकते हैं कि यूक्रेन में युद्ध है, गाजा में युद्ध था, मिडिल ईस्ट में युद्ध है, ईरान में युद्ध का खतरा है।

हमने ऑपरेशन सिंदूर किया था। तो हम अस्थिरता की दुनिया में जा रहे हैं।

उन्होंने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने इसमें सुरक्षा चुनौतियों और “वेपनाइजेशन ऑफ फाइनेंस” (पैसे और डेटा का हथियार के रूप में इस्तेमाल) पर एक शब्द भी नहीं कहा।

किरेन रिजिजू का पलटवार

राहुल के इन आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई।

रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी देश की तरक्की नहीं देख सकते।

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं, तो वह सदन के पटल पर सबूत पेश करें।

सदन में इस दौरान काफी शोर-शराबा हुआ और जब स्पीकर ने हस्तक्षेप किया, तो स्थिति और भी गर्मा गई।

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