Rahul Gandhi Privilege Motion: संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के देश बेचने वाले बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
अब मोदी सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन’ (Privilege Motion) का नोटिस लाने का फैसला किया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी ने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और बिना किसी सबूत के प्रधानमंत्री और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
Delhi: Union Minister Kiren Rijiju says, “We are going to file a notice, privileged notice, against Rahul Gandhi for misleading the house and also making baseless statement. There is a very clear cut rules of procedure and conduct of business in the Lok Sabha and Rajya Sabha.… pic.twitter.com/AVUPvrWbgx
— IANS (@ians_india) February 11, 2026
विवाद की शुरुआत?
बुधवार को बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने अपने भाषण में कई ऐसी बातें कहीं जिससे सदन का माहौल गरमा गया।
राहुल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने देश के हितों को बाहरी ताकतों के हाथों ‘बेच’ दिया है।
उन्होंने अडाणी मामले और अमेरिका में चल रही कानूनी कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि यह सब प्रधानमंत्री पर दबाव बनाने का तरीका है।
पूरी खबर यहां पढ़़ें-
भारत माता को बेचने में शर्म नहीं आई- राहुल के सवाल पर भड़के रिजिजू, बोले- भारत को कोई नहीं बेच सकता
#WATCH | Delhi: Union Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju says, “We are going to file a privilege notice against Rahul Gandhi for misleading the house and also making baseless statements. There are very clear-cut rules of procedure and conduct of business in the Lok Sabha… pic.twitter.com/apyA7BQCxw
— ANI (@ANI) February 11, 2026
किन आरोपों पर आपत्ति है?
किरेन रिजिजू ने मुख्य रूप से तीन बातों पर कड़ा ऐतराज जताया है:
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देश को बेचने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि “आपने भारत माता को बेच दिया है और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।” इस पर रिजिजू ने कहा कि इस देश को न कोई खरीद सकता है और न बेच सकता है। ऐसे बयान देना सदन को गुमराह करने जैसा है।
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एपस्टीन फाइल्स और व्यक्तिगत आरोप: राहुल गांधी ने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र किया। रिजिजू का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना (नोटिस) के किसी सदस्य या बाहरी व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगाना संसदीय नियमों के खिलाफ है।
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डेटा और टैक्स हॉलीडे: राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेशी कंपनियों को डेटा पर 20 साल का टैक्स हॉलीडे दे दिया है, जिससे भारत की सुरक्षा और प्राइवेसी खतरे में है।
सदन के नियम क्या कहते हैं?
संसदीय नियमों के मुताबिक, अगर कोई सांसद किसी दूसरे सदस्य या सरकार पर भ्रष्टाचार या गंभीर कदाचार का आरोप लगाता है, तो उसे पहले से स्पीकर को इसकी सूचना देनी होती है और अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने होते हैं।
किरेन रिजिजू ने कहा, “मैंने राहुल गांधी से सदन में ही सबूत मांगे थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ हवा-हवाई बातें कीं। उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए उनके खिलाफ प्रिविलेज नोटिस लाया जाएगा।”
#WATCH | Delhi: Union Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju says, “While giving a speech on the budget, Rahul Gandhi is making allegations without any argument, without any evidence and without giving any notice… His entire speech, whatever wrong things he has said,… pic.twitter.com/VnaqzKDK8O
— ANI (@ANI) February 11, 2026
आगे क्या होगा?
अगर विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार हो जाता है, तो मामला ‘विशेषाधिकार समिति’ के पास जा सकता है।
राहुल गांधी को अपने आरोपों को साबित करने के लिए सबूत देने होंगे।
अगर वे ऐसा नहीं कर पाते, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही हो सकती है या उनके भाषण के विवादित हिस्सों को सदन की कार्यवाही (Records) से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा।

फिलहाल, राहुल गांधी ने चुनौती स्वीकार करते हुए कहा है कि वे सबूत देने को तैयार हैं।
अब देखना यह है कि संसद की इस लड़ाई में जीत दावों की होती है या नियमों की।


