Labor Law Strike MP: मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में आज सरकारी नीतियों और नए लेबर लॉ (श्रम कानूनों) के विरोध में मजदूरों और कर्मचारियों ने हड़ताल की।
केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर बुलाई गई इस हड़ताल का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मिला-जुला रहा।
जबलपुर और इटारसी जैसे औद्योगिक शहरों में सुबह-सुबह इसका व्यापक असर देखा गया, जहां डिफेंस सेक्टर के कर्मचारियों ने गेट पर खड़े होकर नारेबाजी की।
जबलपुर और इटारसी में क्या हुआ?
इटारसी की ऑर्डनेंस फैक्टरी में ‘ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन’ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार किया।
हालांकि, यह विरोध सांकेतिक था; करीब एक घंटे तक अपनी आवाज बुलंद करने के बाद कर्मचारी वापस काम पर लौट गए।
जबलपुर में भी यही स्थिति रही। राहत की बात यह रही कि आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि बाजार, स्कूल और कॉलेज सामान्य रूप से खुले रहे।
VIDEO | Bhopal, Madhya Pradesh: Members of trade, labour organisations hold protest march in support of nationwide strike. The daylong strike is being observed to protest against what the unions described as anti-worker, anti-farmer and anti-national pro-corporate policies of the… pic.twitter.com/zDmgUfuiwJ
— Press Trust of India (@PTI_News) February 12, 2026
बैंक और बीमा सेक्टर पर असर
बैंकों में लेन-देन करने पहुंचे लोगों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सरकारी बैंकों के साथ-साथ कुछ प्राइवेट बैंक भी इस हड़ताल का हिस्सा हैं।
मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने साफ किया है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सीधे तौर पर काम बंद नहीं कर रहा है, लेकिन उसने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है।
इसके अलावा LIC (बीमा), BSNL और डाक विभाग के कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
इंदौर और रतलाम में आक्रोश
इंदौर के गांधी हॉल में आशा-उषा कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर्स ने बड़ा धरना प्रदर्शन किया।
उनका कहना है कि सरकार की नई नीतियां उनके रोजगार की सुरक्षा छीन रही हैं।
वहीं, रतलाम में ट्रेड यूनियन नेता ईश्वर लाल पुरोहित ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि “36 प्रतिशत वोट लेकर बनी सरकार” अपनी कठोरता दिखा रही है और कर्मचारियों पर ‘काले कानून’ थोप रही है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आज देश के सभी Trade Unions, किसान और मज़दूर — मोदी सरकार की Trade Deal, उनके लाए हुए Labour Laws और मनरेगा छीने जाने पर सड़कों पर हैं।
करोड़ों मेहनतकश किसानों, मज़दूरों और श्रमिकों का भविष्य गिरवी रखने वाली जन-विरोधी TRAP DEAL के खिलाफ़ हम डटकर खड़े हैं।
विदेशी दबाव में आकर,… pic.twitter.com/wrPtSPm7RL
— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 12, 2026
कर्मचारी क्यों हैं नाराज? (प्रमुख मांगें)
कर्मचारियों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह ‘चार लेबर कोड’ हैं।
उनका मानना है कि ये नए कानून कंपनियों को फायदा पहुंचाएंगे और मजदूरों के अधिकार कम कर देंगे।
इसके अलावा, बिजली संशोधन विधेयक, न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा ‘शांति एक्ट’ (SHANTI Act) और विकसित भारत-रोजगार मिशन 2025 को रद्द करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई जा रही है।
कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार मनरेगा को पुराने स्वरूप में पूरी तरह बहाल करे।


