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सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल पर लगाई रोक, कहा- नया नाम बताओ, वरना रिलीज नहीं होगी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Supreme Court on Ghuskhor Pandat: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर देशभर में छिड़े विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को कड़ी फटकार लगाई है।

कोर्ट का साफ कहना है कि आप क्रिएटिव फ्रीडम (रचनात्मक स्वतंत्रता) के नाम पर समाज के किसी खास वर्ग या समुदाय को बदनाम नहीं कर सकते।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ब्राह्मण समाज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

इस दौरान बेंच ने कहा, जब तक फिल्म का बदला हुआ नाम नहीं बताया जाएगा, तब तक इसे रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

3 फरवरी 2026 को जब नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी स्टारर इस फिल्म का टीजर रिलीज किया।

फिल्म में मनोज बाजपेयी ‘अजय दीक्षित’ नाम के एक पुलिस अफसर का रोल कर रहे हैं, जिसे फिल्म में लोग ‘पंडत’ कहते हैं।

कहानी एक ऐसे भ्रष्ट अधिकारी की है जिसका बार-बार डिमोशन होता है।

विवाद इसी बात पर है कि ‘भ्रष्ट’ शब्द के साथ ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल क्यों किया गया?

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि जब तक फिल्म का नाम नहीं बदला जाता, इसे रिलीज करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड (CBFC) को भी नोटिस जारी किया है।

जज ने निर्माता नीरज पांडे से आज ही फिल्म का नया नाम बताने को कहा है और एक हलफनामा (Affidavit) मांगा है जिसमें यह साबित करना होगा कि फिल्म किसी समुदाय का अपमान नहीं करती।

समाज और वकीलों का विरोध

ब्राह्मण समाज और मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का तर्क है कि ‘पंडत’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है।

इसे ‘घूसखोर’ जैसे शब्द के साथ जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह एक पूरे समुदाय की छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश है।

उनका कहना है कि फिल्म मेकर्स अक्सर सनसनी फैलाने के लिए ऐसे विवादित नाम रखते हैं।

मेकर्स की सफाई

विवाद बढ़ता देख नेटफ्लिक्स ने फिल्म का टीजर और सभी वीडियो हटा लिए हैं।

निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी सफाई में कहा कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है।

‘पंडत’ सिर्फ एक किरदार का उपनाम है, इसका किसी जाति या धर्म को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं था।

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हालांकि, कोर्ट फिलहाल इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा है और अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की है।

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