Supreme Court on Ghuskhor Pandat: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर देशभर में छिड़े विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को कड़ी फटकार लगाई है।
कोर्ट का साफ कहना है कि आप क्रिएटिव फ्रीडम (रचनात्मक स्वतंत्रता) के नाम पर समाज के किसी खास वर्ग या समुदाय को बदनाम नहीं कर सकते।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ब्राह्मण समाज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इस दौरान बेंच ने कहा, जब तक फिल्म का बदला हुआ नाम नहीं बताया जाएगा, तब तक इसे रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
The Supreme Court has directed the makers of the Netflix film “Ghooskhor Pandat” to change the title of the film as it is denigrative of a particular community.
A bench led by Justice BV Nagarathna warned the respondent filmmakers that the Court cannot permit any section of… pic.twitter.com/v3caggnHVw
— ANI (@ANI) February 12, 2026
क्या है पूरा मामला?
3 फरवरी 2026 को जब नेटफ्लिक्स ने मनोज बाजपेयी स्टारर इस फिल्म का टीजर रिलीज किया।
फिल्म में मनोज बाजपेयी ‘अजय दीक्षित’ नाम के एक पुलिस अफसर का रोल कर रहे हैं, जिसे फिल्म में लोग ‘पंडत’ कहते हैं।
कहानी एक ऐसे भ्रष्ट अधिकारी की है जिसका बार-बार डिमोशन होता है।
विवाद इसी बात पर है कि ‘भ्रष्ट’ शब्द के साथ ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल क्यों किया गया?
Delhi: On Ghuskhor Pandat, Advocate Vinod Kumar Tiwari says, “Court said that the term ‘Ghuskhor Pandat’ may fall under freedom of expression as guaranteed by Article 19(1). However, Article 19(2) imposes reasonable restrictions on that freedom. These restrictions must be… pic.twitter.com/ExZHLm2t7c
— IANS (@ians_india) February 12, 2026
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि जब तक फिल्म का नाम नहीं बदला जाता, इसे रिलीज करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड (CBFC) को भी नोटिस जारी किया है।
जज ने निर्माता नीरज पांडे से आज ही फिल्म का नया नाम बताने को कहा है और एक हलफनामा (Affidavit) मांगा है जिसमें यह साबित करना होगा कि फिल्म किसी समुदाय का अपमान नहीं करती।
Delhi: Petitioner Atul Mishra, who demanded a ban on the film Ghooskhor Pandat, says, “When we filed the petition, we demanded that the film’s title be banned and that the teaser they released on social media be taken down. Today, the court accepted both our requests. Their… pic.twitter.com/fHtnlxW4yi
— IANS (@ians_india) February 12, 2026
समाज और वकीलों का विरोध
ब्राह्मण समाज और मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का तर्क है कि ‘पंडत’ शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है।
इसे ‘घूसखोर’ जैसे शब्द के साथ जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह एक पूरे समुदाय की छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश है।
उनका कहना है कि फिल्म मेकर्स अक्सर सनसनी फैलाने के लिए ऐसे विवादित नाम रखते हैं।
It was Yogi Adityanath Ji who took the action against those who were making derogatory web series against the Brahmin community.#GhooskhorPandat pic.twitter.com/RvRpStJeaO
— Squint Neon (@TheSquind) February 6, 2026
मेकर्स की सफाई
विवाद बढ़ता देख नेटफ्लिक्स ने फिल्म का टीजर और सभी वीडियो हटा लिए हैं।
निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी सफाई में कहा कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है।
‘पंडत’ सिर्फ एक किरदार का उपनाम है, इसका किसी जाति या धर्म को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं था।

हालांकि, कोर्ट फिलहाल इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा है और अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की है।
घूसखोर पंडत के लिए सिर्फ नेटफ्लिक्स दोषी क्यों दी जा रही हैं ?
फ़िल्म लिखी है- नीरज पांडे ने
लीड हीरो हैं- मनोज बाजपेयीमनोज बाजपेयी में अजय दीक्षित नामक करप्ट अधिकारी बने हैं, जिसे #GhooskhorPandat नाम दिया गया है
किले का दरवाजा अंदर से ही खुलता है
ब्राह्मण समाज को इस तरह… pic.twitter.com/4g6g6AQOdd
— Abhay Pratap Singh (बहुत सरल हूं) (@IAbhay_Pratap) February 4, 2026


