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MP के 1.66 लाख किसान PM सम्मान निधि योजना से बाहर, बजट में ₹94 करोड़ की भारी कटौती

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

PM Kisan Samman Nidhi: मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (PM-Kisan) के लाभार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है।

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के करीब 1 लाख 66 हजार किसान इस योजना के दायरे से बाहर हो गए हैं, जिसका सीधा असर योजना के लिए आवंटित होने वाले बजट पर पड़ा है।

बजट में लगभग 93.77 करोड़ रुपये की कमी आई है।

क्या है पूरा मामला?

प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2019 में किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी।

इसके तहत हर पात्र किसान को साल में 2000-2000 रुपये की तीन किस्तों में कुल 6000 रुपये दिए जाते हैं।

मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार ने इसमें अपनी ओर से ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ के 6000 रुपये और जोड़ दिए थे, जिससे किसानों को कुल 12,000 रुपये सालाना मिलने लगे।

लेकिन राज्यसभा में पेश किए गए हालिया आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में लाभार्थियों की संख्या 83.48 लाख (नवंबर 2022) से घटकर अब 81.81 लाख (दिसंबर 2025) रह गई है।

यानी पिछले तीन सालों में 1,66,254 किसान इस सूची से हट गए हैं।

बजट में बड़ी कटौती और आर्थिक प्रभाव

किसानों की संख्या कम होने का सीधा असर राज्य को मिलने वाली केंद्रीय सहायता पर पड़ा है।

आंकड़ों का अध्ययन करें तो:

साल 2022 में प्रति किस्त ₹1,730.12 करोड़ वितरित किए जा रहे थे।

साल 2025 में यह राशि घटकर ₹1,636.35 करोड़ रह गई है।

इसका मतलब है कि हर किस्त में राज्य के किसानों को मिलने वाले कुल फंड में 93 करोड़ 77 लाख रुपये की कमी आई है।

यह एक बड़ी राशि है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोटेट होती थी।

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कांग्रेस बनाम सरकार

इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस विधायक सुजीत सिंह चौधरी का कहना है कि सरकार धीरे-धीरे किसानों को योजनाओं से बाहर करने की साजिश रच रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जो राशि दी जा रही है वह पहले ही ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है और अब उसमें भी कटौती की जा रही है।

दूसरी ओर, प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

सरकार का दावा है कि किसी भी ‘पात्र’ किसान को योजना से बाहर नहीं किया गया है।

उनके अनुसार, यह छंटनी केवल अपात्र या तकनीकी खामियों वाले खातों की हुई है।

e-KYC: सबसे बड़ी बाधा

खबर का एक तकनीकी पहलू यह भी है कि 74,271 किसानों की किस्तें केवल इसलिए रुकी हुई हैं क्योंकि उन्होंने अभी तक e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) की प्रक्रिया पूरी नहीं की है।

सरकार का कहना है कि जैसे ही ये किसान अपना सत्यापन (Verification) पूरा कर लेंगे, उनकी रुकी हुई राशि उनके खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

इसके अलावा, कई किसान ऐसे भी हो सकते हैं जिनकी मृत्यु हो गई है या जिन्होंने अपनी जमीन बेच दी है, जिससे वे अपात्र हो गए हैं।

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मध्य प्रदेश के किसानों के लिए यह खबर एक चेतावनी की तरह है।

एक ओर जहां तकनीकी कारणों से हजारों किसानों का पैसा अटका है, वहीं दूसरी ओर लाभार्थियों की संख्या में आई इस कमी ने योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसानों को चाहिए कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी कियोस्क या पोर्टल पर जाकर अपनी पात्रता और e-KYC की स्थिति जांचें ताकि वे इस आर्थिक लाभ से वंचित न रहें।

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