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Ramadan 2026: रोजा रखना होगा आसान! भूख-प्यास से बचने के लिए सहरी में खाएं एनर्जी से भरपूर ये फूड

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ramadan 2026 Sehri Diet: इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना ‘रमजान’ शुरू हो चुका है।

दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह महीना सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी रूह (आत्मा) को पाक करने, सब्र (धैर्य) सीखने और अल्लाह की इबादत में खुद को समर्पित करने का समय है।

चांद का दीदार और तारीखों का गणित

इस्लामी कैलेंडर यानी ‘हिजरी कैलेंडर’ पूरी तरह से चंद्रमा की गति पर आधारित होता है।

यही वजह है कि रमजान की तारीख हर साल बदलती रहती है।

इस बार भारत में 18 फरवरी की शाम को चांद नजर आया। जिसके बाद 19 फरवरी से तरावीह की नमाज और रोजों का सिलसिला शुरू हो गया है।

सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में चांद एक दिन पहले दिखने की संभावना रहती है, जिससे वहां रोजा एक दिन पहले शुरू हो जाता है।

13-14 घंटे का रोजा: सेहत की चुनौती

फरवरी और मार्च के बदलते मौसम में रोजा करीब 13 से 14 घंटे का होगा।

सुबह सूरज निकलने से पहले ‘सहरी’ की जाती है और शाम को सूरज ढलने पर ‘इफ्तार’ के साथ रोजा खोला जाता है।

अक्सर देखा गया है कि रोजेदार दोपहर होते-होते थकान, कमजोरी और तेज प्यास महसूस करने लगते हैं।

इसका सबसे बड़ा कारण सहरी में सही खान-पान का न होना है।

अगर आप चाहते हैं कि आपका रोजा इबादत के साथ-साथ सेहतमंद भी रहे, तो अपनी सहरी की थाली में इन 4 चीजों को जरूर शामिल करें:

प्रोटीन: शरीर की मजबूती के लिए

सहरी में प्रोटीन का होना उतना ही जरूरी है जितना कि इबादत में नीयत।

प्रोटीन पचने में समय लेता है, जिससे आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती।

  • क्या खाएं: अंडा (उबला या ऑमलेट), दालें, पनीर या दही।
  • फायदा: दही प्रोबायोटिक होता है जो पेट को ठंडा रखता है और जलन नहीं होने देता। अंडे की जर्दी और सफेदी आपको दिनभर के कामों के लिए जरूरी ऊर्जा प्रदान करती है।

कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर: धीरे-धीरे मिलने वाली ऊर्जा

सहरी में सफेद ब्रेड या ज्यादा मैदे वाली चीजों से बचें।

इसकी जगह ‘होल ग्रेन’ यानी साबुत अनाज का चुनाव करें।

  • क्या खाएं: दलिया, ओट्स, जौ की रोटी या मल्टीग्रेन पराठा।
  • फायदा: फाइबर वाली चीजें धीरे-धीरे ग्लूकोज रिलीज करती हैं। इससे आपका ब्लड शुगर एकदम से नीचे नहीं गिरता और आपको दोपहर में होने वाले सिरदर्द से राहत मिलती है। ओट्स में दूध और शहद मिलाकर खाने से यह एक ‘सुपर मील’ बन जाता है।

ड्राई फ्रूट्स: कुदरती एनर्जी कैप्सूल

खजूर सिर्फ इफ्तार के लिए नहीं, सहरी के लिए भी बेहतरीन है।

इसके अलावा बादाम और अखरोट आपकी दिमागी सतर्कता बनाए रखते हैं।

  • क्या खाएं: 2-3 खजूर, भीगे हुए बादाम और अंजीर।
  • फायदा: खजूर में मौजूद नेचुरल शुगर तुरंत एनर्जी देती है, जबकि बादाम शरीर को जरूरी फैट्स और मजबूती देते हैं।

हाइड्रेटिंग फूड्स: प्यास 

रोजे में सबसे बड़ी चुनौती प्यास होती है।

सहरी के समय एक साथ ढेर सारा पानी पीने के बजाय ऐसे फल खाएं जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो।

  • क्या खाएं: तरबूज, खरबूजा, खीरा और नारियल पानी।
  • फायदा: ये फल शरीर में पानी को स्टोर करके रखते हैं। नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स का बेहतरीन जरिया है, जो आपको डिहाइड्रेशन से बचाता है।

सावधानी: किन चीजों से बचें?

सहरी में बहुत ज्यादा तला-भुना, मिर्च-मसालेदार खाना या बहुत ज्यादा चाय-कॉफी पीने से बचना चाहिए।

कैफीन (चाय/कॉफी) शरीर से पानी को बाहर निकालता है, जिससे गला जल्दी सूखने लगता है।

वहीं ज्यादा नमक वाला खाना आपको बार-बार प्यास लगने पर मजबूर कर देगा।

रमजान का आध्यात्मिक महत्व

यह महीना हमें याद दिलाता है कि इंसान सिर्फ अपनी जरूरतों का गुलाम नहीं है।

भूख और प्यास पर नियंत्रण पाकर हम अपनी इच्छाओं (नफ्स) पर काबू पाना सीखते हैं।

यह गरीबों के दर्द को समझने और समाज में नेकी फैलाने का महीना है।

कुलमिलाकर, रमजान 2026 आपके लिए खुशियों और बरकतों वाला हो।

लेकिन अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए पूरी शिद्दत से इबादत करें।

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