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नाबालिगों के यौन शोषण मामले में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, जानें पूरा मामला

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Shankaracharya FIR Order: प्रयागराज की विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है।

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सानिध्य में रहने वाले नाबालिग बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार और समलैंगिक अपराध किए गए हैं।

उन्होंने धारा 173(4) के तहत याचिका दाखिल कर गुहार लगाई थी कि पुलिस इस मामले में सुनवाई नहीं कर रही है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।

कोर्ट रूम में बच्चों की गवाही

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, एडीजे (पॉक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने बेहद सावधानी से सुनवाई की।

13 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान, अदालत ने पूरे कोर्ट रूम को खाली करवा दिया था ताकि पीड़ित बच्चे बिना किसी दबाव के अपनी बात कह सकें।

कैमरे के सामने बंद कमरे में दो नाबालिग बच्चों ने जज को अपने साथ हुई आपबीती सुनाई।

बच्चों के इन बयानों को रिकॉर्ड किया गया है, जो इस केस में सबसे अहम सबूत माने जा रहे हैं।

Shankaracharya FIR Order

अदालत का कड़ा रुख

शनिवार, 21 फरवरी को अपना फैसला सुनाते हुए विशेष जज विनोद कुमार चौरसिया ने कहा कि आरोप प्रकृति में बेहद गंभीर हैं।

कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट और बच्चों के बयानों पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में केस बनता है।

अदालत ने झूंसी थाना पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज करने और पूरी निष्पक्षता के साथ विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान सभी गवाहों और परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया जाए।

शिकायतकर्ता बोले- ‘न्याय अभी जिंदा है’

कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज काफी भावुक नजर आए।

उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे। पुलिस हमारी बात नहीं सुन रही थी, लेकिन आज न्याय के मंदिर ने साबित कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उन्हें इस मामले को उठाने के लिए जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और उनकी कार को बम से उड़ाने की कोशिश की बात भी कही गई।

सियासी और धार्मिक गलियारों में चुनौती

आशुतोष ब्रह्मचारी ने केवल कानूनी लड़ाई तक ही सीमित रहने की बात नहीं कही, बल्कि उन्होंने राजनीतिक रूप से भी तीखे सवाल दागे।

उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि वे उनके साथ चलें और वाराणसी स्थित विद्यामठ की असलियत देखें।

उन्होंने घोषणा की है कि वे सच्चाई को जनता के सामने लाने के लिए प्रयागराज से वाराणसी तक पैदल ‘सनातन यात्रा’ निकालेंगे।

Shankaracharya FIR Order

शंकराचार्य पक्ष का तर्क

दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकीलों ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है।

उनका कहना है कि यह केवल छवि खराब करने की एक साजिश है और वे इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाशेंगे।

आगे क्या होगा?

पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर कानून के तहत FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस को सबूत जुटाने होंगे।

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए बल्कि ज्योतिष पीठ की गरिमा के लिए भी एक बड़ा संकट हो सकता है।

फिलहाल, पूरे देश की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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