Who should not watch Holika Dahan: होली का त्योहार रंगों, खुशियों और आपसी मेलजोल का प्रतीक है।
होली खेलने से एक दिन पहले ‘होलिका दहन’ की परंपरा निभाई जाती है, जो बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का संदेश देती है।
इस साल होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा।
जहां पूरा देश इस अग्नि की पूजा करता है, वहीं शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोगों के लिए इस अग्नि के दर्शन करना वर्जित माना गया है।

आइए जानते हैं कि वे कौन से 5 लोग हैं जिन्हें होलिका दहन से दूर रहना चाहिए और इसके पीछे के धार्मिक व वैज्ञानिक कारण क्या हैं।
1. नई नवेली दुल्हन के लिए नियम
शादी के बाद पहली होली पर अक्सर नई दुल्हन को उसके मायके भेज दिया जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है।
कहा जाता है कि होलिका का विवाह ‘इलोजी’ नाम के राजकुमार से तय हुआ था, लेकिन शादी के मुहूर्त से ठीक पहले होलिका अग्नि में भस्म हो गई।
राजकुमार की माता ने अपनी होने वाली बहू को जलते हुए देखा था, जो एक अशुभ घटना थी।

इसी कारण माना जाता है कि नई दुल्हन को जलती हुई होलिका नहीं देखनी चाहिए, क्योंकि यह उनके नए वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता।
2. सास और बहू का एक साथ होना
गांवों और बड़े बुजुर्गों के बीच यह मान्यता आज भी बहुत प्रबल है कि सास और बहू को कभी भी एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए।
ऐसी धारणा है कि अगर वे एक साथ अग्नि के दर्शन करती हैं, तो उनके रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।

घर की शांति और आपसी प्रेम बनाए रखने के लिए दोनों को अलग-अलग समय पर पूजा करने की सलाह दी जाती है।
3. गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान
गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की परिक्रमा करने या अग्नि के पास जाने से मना किया जाता है।
- धार्मिक कारण: मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं जो गर्भस्थ शिशु को प्रभावित कर सकती हैं।
- वैज्ञानिक कारण: जलती हुई होलिका का तापमान बहुत अधिक होता है, जो गर्भवती महिला और बच्चे के लिए असहज हो सकता है।
- साथ ही, धुएं और भीड़भाड़ से सांस लेने में तकलीफ होने का खतरा रहता है।

4. इकलौती संतान के माता-पिता
एक पुरानी मान्यता के अनुसार, जिन माता-पिता की केवल एक ही संतान (खासकर पुत्र) होती है, उन्हें होलिका की मुख्य अग्नि को सीधे धधकते हुए नहीं देखना चाहिए।
इसका संबंध भक्त प्रह्लाद से जोड़ा जाता है, जो अपने पिता हिरण्यकश्यप की इकलौती संतान थे और जिन्हें उनकी बुआ होलिका गोद में लेकर अग्नि में बैठी थीं।
हालांकि प्रह्लाद बच गए थे, लेकिन उस घटना की याद में इकलौती संतान वाले माता-पिता को सावधानी बरतने को कहा जाता है।

5. नवजात शिशु और छोटे बच्चे
होलिका दहन अक्सर चौराहों पर किया जाता है।
लोक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।
नवजात शिशु बहुत कोमल और संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें इस शोर-शराबे और भारी धुएं वाली जगह से दूर रखना ही समझदारी है।

तंत्र-मंत्र जैसी आशंकाओं के चलते भी बच्चों को घर के भीतर रखने की परंपरा है।
नकारात्मकता से बचने के कुछ खास उपाय
होलिका दहन से पहले के 8 दिन (होलाष्टक) में शुभ कार्यों की मनाही होती है।
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं:
- बच्चों को नजर दोष से बचाने के लिए उनके कान के पीछे काला टीका लगाएं।
- घर में हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।
- होलिका दहन की अगली सुबह उसकी राख (भस्म) को घर लाकर माथे पर तिलक लगाएं, इससे नकारात्मकता दूर होती है।
परंपराएं हमारे समाज का आधार हैं। चाहे वह नई दुल्हन का मायके जाना हो या गर्भवती महिलाओं का अग्नि से दूर रहना, इन सबके पीछे कहीं न कहीं सुरक्षा और अपनों की भलाई का भाव छिपा होता है।

इस साल 3 मार्च को पूरे विधि-विधान और सावधानी के साथ होलिका पूजन करें और खुशियों वाली होली मनाएं।


