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ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर भारत ने 5 दिन बाद जताया दुख, विदेश सचिव ने दी श्रद्धांजलि

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

india condoles khamenei death: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच भारत ने पहली बार ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर आधिकारिक तौर पर दुख व्यक्त किया है।

गुरुवार को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे।

वहां उन्होंने शोक पुस्तिका (Condolence Book) में संदेश लिखकर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी और ईरान के राजदूत से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की।

बता दें कि 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों में खामेनेई की मौत हो गई थी।

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5 दिनों की चुप्पी के बाद पहला रिएक्शन

पिछले 5 दिनों से खामेनेई की मौत पर भारत सरकार ने चुप्पी साधी हुई थी।

विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार के इस रुख को लेकर निशाना भी साधा था।

विपक्ष ईरान के साथ भारत के पुराने रिश्तों की ओर इशारा करते हुए इसकी मांग कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद में मिडिल-ईस्ट की स्थिति पर अपनी चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा था कि भारत ने हमेशा ऐसे विवादों का समाधान निकालने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी की मांग की है।

समंदर में तबाही: ईरानी वॉरशिप ‘IRIS देना’ शिकार बना

इस जंग की सबसे डरावनी खबर श्रीलंका के तट से आई है।

भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘मिलन-2026’ नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS देना को अमेरिकी नौसेना ने टॉरपीडो से हमला कर डुबो दिया।

यह घटना श्रीलंका के गाले शहर से करीब 75 किलोमीटर दूर हुई।

श्रीलंकाई नौसेना के मुताबिक, अब तक समंदर से 87 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि 60 लोग अब भी लापता हैं।

यह ऐतिहासिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने युद्ध के दौरान दुश्मन के जहाज पर टॉरपीडो का इस्तेमाल किया है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका इस जंग में अब तक ईरान के लगभग 20 छोटे-बड़े युद्धपोत नष्ट कर चुका है।

इजराइल का दावा और ईरान की दो-टूक

युद्ध के छठे दिन इजराइली सेना (IDF) ने दावा किया है कि ईरान की ओर से होने वाले मिसाइल हमलों की तीव्रता कम हुई है।

हालांकि, इजराइल अभी भी हाई अलर्ट पर है क्योंकि उसे यमन के हूती विद्रोहियों से हमले का डर है।

दूसरी ओर, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने साफ कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका या इजराइल से बातचीत का कोई रास्ता नहीं बचा है।

उन्होंने कहा, “ईरान युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन शुरुआत उधर से हुई है। हमारी ताकत से पूरी दुनिया वाकिफ है।”

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के सवाल पर उन्होंने फिलहाल कोई भी स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन यह संकेत जरूर दिया कि ईरान अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

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