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राज्यसभा की जंग: 10 राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को वोटिंग, खड़गे और दिग्विजय समेत कई दिग्गजों की साख दांव पर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rajya Sabha Election 2026: चुनाव आयोग (EC) ने शुक्रवार को देश के 10 राज्यों में खाली हो रही राज्यसभा की 24 सीटों पर द्विवार्षिक (हर दो साल में होने वाले) चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है।

इसके साथ ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी कराए जाएंगे।

इन सभी सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा और इसी दिन शाम तक नतीजे भी साफ हो जाएंगे।

इस बार मुकाबला जनता के सीधे वोटों का नहीं, बल्कि विधानसभाओं के भीतर विधायकों के मतों का है।

जून-जुलाई में खाली हो रही हैं सीटें

यह चुनाव इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि 10 राज्यों के 24 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच खत्म होने जा रहा है।

रिटायर होने वाले इन नेताओं में भारतीय राजनीति के कई बड़े और दिग्गज चेहरे शामिल हैं।

इनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं।

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इन दिग्गजों के रिटायर होने से कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदलने की उम्मीद है।

चुनावी कैलेंडर: कब क्या होगा?

चुनाव आयोग की तरफ से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, इस पूरी चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत 1 जून को आधिकारिक नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी होने के साथ होगी।

  • नामांकन की आखिरी तारीख: उम्मीदवार 8 जून तक अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे।
  • वोटिंग और रिजल्ट की तारीख: 18 जून को सुबह से दोपहर तक विधानसभाओं में वोट डाले जाएंगे और उसी दिन वोटों की गिनती कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

किस राज्य में कितनी सीटों पर है मुकाबला?

इस बार के राज्यसभा चुनाव में सबसे ज्यादा मुकाबला आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में देखने को मिलेगा, जहाँ 4-4 सीटें खाली हो रही हैं।

इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान की 3-3 सीटों पर चुनाव होंगे।

झारखंड की 2 सीटों पर नए सांसद चुने जाएंगे।

वहीं पूर्वोत्तर के चार राज्यों—मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम से 1-1 सीट पर मतदान होगा।

दो सीटों पर उपचुनाव भी होंगे

मुख्य चुनावों के साथ-साथ चुनाव आयोग ने दो राज्यों में उपचुनाव कराने का भी फैसला किया है।

ये दोनों सीटें मौजूदा सांसदों के इस्तीफे के बाद समय से पहले खाली हुई थीं:

1.महाराष्ट्र: यहाँ सुनेत्रा पवार ने विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद 6 मई को राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल जुलाई 2028 तक था।

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2. तमिलनाडु: एआईएडीएमके (AIADMK) के सीनियर नेता सी.वी. शनमुगम ने भी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने के बाद 7 मई को अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी थी।

इन दोनों खाली सीटों को भरने के लिए भी मुख्य चुनाव के साथ यानी 18 जून को ही वोट डाले जाएंगे।

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए विशेष पर्यवेक्षक (Observers) तैनात किए जाएंगे ताकि वोटिंग पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।

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आम भाषा में समझें: कैसे चुने जाते हैं राज्यसभा सांसद?

बहुत से लोग सोचते हैं कि लोकसभा की तरह क्या राज्यसभा के लिए भी हमें वोट डालना होता है?

जवाब है—नहीं।

  • राज्यसभा को संसद का ‘उच्च सदन’ या ‘स्थायी सदन’ कहा जाता है।
  • इसके सांसदों का चुनाव देश की जनता सीधे नहीं करती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए विधायक (MLAs) करते हैं।
  • इसलिए इसे अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) कहा जाता है।
  • राज्यसभा कभी पूरी तरह भंग नहीं होती।
  • इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है।
  • हर दो साल में इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य रिटायर हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुनकर आते हैं।

देश में राज्यसभा की कुल 245 सीटें हैं, जिनमें से 233 पर चुनाव होते हैं और बाकी 12 सदस्यों को राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से सीधे मनोनीत (Nominate) करते हैं।

इसमें जीत का फॉर्मूला भी गणित पर आधारित होता है। किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कितने वोटों की जरूरत होगी, यह उस राज्य की कुल विधानसभा सीटों और खाली हो रही राज्यसभा सीटों की संख्या को मिलाकर तय किया जाता है।

वोटिंग के दौरान एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 मानी जाती है और वे प्राथमिकता (Preference) के आधार पर उम्मीदवारों को वोट देते हैं।

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