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ट्विशा शर्मा केस में बड़ा मोड़: CBI करेगी जांच, MP सरकार ने दी मंजूरी; पति समर्थ की जमानत पर सुनवाई टली

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Twisha Sharma Case CBI Investigation: एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने का फैसला किया है और इसके लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

यह बड़ा फैसला तब आया जब 20 मई को ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा कुछ रिटायर्ड फौजियों के साथ सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे थे।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने दुखी परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि सरकार इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ी है और हर मुमकिन मदद करेगी।

मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि अगर अदालत ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम (Re-postmortem) कराने का आदेश देती है, तो सरकार पार्थिव शरीर को दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने का पूरा इंतजाम करेगी।

इसके अलावा, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी इस उलझे हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की पुरजोर मांग की थी।

अदालत में क्या हुआ?

दूसरी तरफ, इस मामले के मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका पर आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई चल रही थी।

समर वेकेशन बेंच में जस्टिस ए.के. सिंह इस मामले को सुन रहे हैं। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पक्ष रख रहे महाधिवक्ता (Advocate General) प्रशांत सिंह ने अदालत से केस डायरी पेश करने के लिए थोड़ा वक्त मांगा।

इस पर अदालत ने सहमति जताते हुए सुनवाई को दोपहर 2:30 बजे तक के लिए टाल (स्थगित) दिया।

पिता का बड़ा आरोप: ‘केस को दबा रहा है दामाद’

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने समर्थ की जमानत का कड़ा विरोध किया है।

उन्होंने कोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया।

उन्होंने बताया कि समर्थ जुलाई 2023 से अगस्त 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार में लीगल एडवाइजर (कानूनी सलाहकार) के पद पर रह चुका है।

सरकारी महकमे में अपनी पैठ होने के कारण, वह फरार रहने के दौरान भी इस पूरे केस को अपने प्रभाव से दबाने और प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय सिंह को एक चिट्ठी लिखकर कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे को तुरंत पद से हटाने की मांग की है।

शव को रखने और जबरन साइन कराने का विवाद

ट्विशा के पिता ने पुलिस प्रशासन पर मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “पुलिस हमसे कह रही है कि डेडबॉडी को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान चाहिए, जो कि पूरी तरह से झूठ है। अमेरिका जैसे एडवांस देश में भी शवों को रखने के लिए माइनस 80 डिग्री की जरूरत नहीं होती, वहां भी माइनस 4 डिग्री ही काफी होता है।

पुलिस जानबूझकर ऐसा डर का माहौल बना रही है ताकि हम घबराकर बेटी की बॉडी को लेकर यहां से चले जाएं। लेकिन हम साफ कर देना चाहते हैं कि जब तक दोबारा पोस्टमॉर्टम नहीं होगा, हम मरते दम तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।”

नवनिधि शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे शव की सुपुर्दगी (हैंडओवर) के कागजात पर जबरदस्ती दस्तखत कराए, जबकि उन्होंने अपनी बेटी का शव लिया ही नहीं था।

उन्होंने कहा कि पुलिस शुरुआत से ही आरोपियों का साथ दे रही है और एफआईआर दर्ज करने में भी खूब आनाकानी की गई।

पुलिस का कहना था कि जब तक शव को अपने कब्जे में नहीं लोगे, तब तक केस दर्ज नहीं होगा।

चाचा ने कहा- ‘रिटायर्ड जज सास को बचाने में लगा है तंत्र’

ट्विशा के चाचा लोकेश शर्मा ने सीधे तौर पर पुलिस और न्यायपालिका के चक्करों में फंसाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “पहले पुलिस कमिश्नर ने दोबारा पोस्टमॉर्टम की बात मान ली थी, लेकिन अगले ही दिन मुकर गए और कहा कि यह कोर्ट का मामला है। जब हम कोर्ट गए, तो वहां भी कहा गया कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। सब मिलकर हमें गुमराह कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह एक रिटायर्ड जज हैं, इसलिए पूरा शासन-प्रशासन उन्हें बचाने में जुटा है।

घटना के इतने दिन बाद भी क्राइम सीन (घटनास्थल) को सील नहीं किया गया है।

घर का दरवाजा खुला हुआ है और वहां से सबूतों को मिटाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।

बचाव पक्ष का दावा: ‘रिश्ते बहुत अच्छे थे’

वहीं दूसरी तरफ, आरोपी समर्थ सिंह के वकील मृगेंद्र सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

उनका कहना है कि ट्विशा अपने परिवार की इकलौती और लाडली बहू थी।

वह अपने पति और सास के साथ बहुत खुशी-खुशी रह रही थी और उनके आपसी रिश्ते बेहद मधुर थे।

वकील ने दलील दी कि किसी भी नई शादी में, खासकर जब दोनों पार्टनर अलग-अलग बैकग्राउंड या कल्चर से आते हैं, तो थोड़ा-बहुत तालमेल बिठाने में समय लगता है।

ऐसी छोटी-मोटी नोकझोंक हर घर में होती है।

उन्होंने यह भी बताया कि शादी के महज साढ़े चार महीनों के भीतर ट्विशा करीब पांच बार अपने मायके होकर आई थी, जो दिखाता है कि उस पर कोई पाबंदी नहीं थी।

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