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125 साल पुराने गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर: भारत की कड़ी फटकार के बाद लाइन पर आया पाकिस्तान, अब लिया ये बड़ा फैसला

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Gurdwara demolished in Pakistan: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखूपुरा जिले में स्थित फारूखाबाद (फरूखाबाद) इलाके से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है।

यहाँ लगभग 125 साल पुराने एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे— ‘श्री गुरु सिंह सभा साहिब’ के भवन को गिराए जाने का मामला इस वक़्त सुर्खियों में है।

स्थानीय खबरों और सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों के मुताबिक, इस पवित्र सिख धर्मस्थल के एक बड़े हिस्से को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।

जैसे ही यह खबर सामने आई, दुनिया भर के सिख समुदाय में गहरी नाराजगी और गुस्सा फैल गया।

भारत सरकार ने भी इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और पाकिस्तान को इस कायराना हरकत के लिए कड़ी फटकार लगाई है।

भारत की सख्त चेतावनी के बाद अब पाकिस्तान सरकार भी दबाव में आ गई है और डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) में जुट गई है।

एक बिजनेसमैन की करतूत और स्थानीय लोगों का विरोध

शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराने के पीछे पाकिस्तान के एक स्थानीय रसूखदार बिजनेसमैन (व्यवसायी) का हाथ बताया जा रहा है।

उसने बिना किसी सरकारी अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के ही चुपके से इस 125 साल पुराने पवित्र भवन को ढहाने का काम शुरू कर दिया।

जब स्थानीय सिख समुदाय और अन्य लोगों को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने मौके पर पहुँचकर इसका कड़ा विरोध किया।

स्थानीय लोगों के भारी विरोध और हंगमे के चलते वह बिजनेसमैन गुरुद्वारे के पूरे हिस्से को तो नहीं गिरा सका, लेकिन तब तक गुरुद्वारे के भवन को काफी नुकसान पहुँच चुका था।

इस घटना के बाद से ही पाकिस्तान में रहने वाले सिखों और अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) का बड़ा एक्शन

इस घटना की भनक लगते ही भारत में भी सिख संगठनों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने इस मामले पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई।

कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तुरंत एक्शन में आया।

इस प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश से मुलाकात की।

कमेटी ने विदेश मंत्रालय को पाकिस्तान में सिखों के साथ हो रहे लगातार अत्याचारों की पूरी जानकारी दी।

उन्होंने याद दिलाया कि अभी हाल ही में पाकिस्तान में एक गुरुद्वारे के सेवादार और उनकी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार से अपील की कि वह इस मामले में तुरंत दखल दे, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने उन्हें आश्वासन दिया कि भारत सरकार इस मुद्दे को बहुत ही कड़े तरीके से इस्लामाबाद (पाकिस्तान सरकार) के सामने उठाएगी।

भारत ने लगाई कड़ी लताड़: विदेश मंत्रालय का सख्त बयान

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए पाकिस्तान सरकार को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने इस घटना की सबसे सख्त शब्दों में निंदा की।

रणधीर जायसवाल ने कहा: “हमें पाकिस्तान के फारूखाबाद में स्थित 125 साल पुराने ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को गिराए जाने की बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबरें मिली हैं। हम एक पवित्र सिख धर्मस्थल के खिलाफ जानबूझकर की गई इस तोड़फोड़ और घटिया हरकत की कड़ी निंदा करते हैं।”

भारत ने साफ शब्दों में कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को गिराया जाना और पाकिस्तान के स्थानीय अधिकारियों या ‘इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ (ETPB – जो अल्पसंख्यकों की संपत्तियों की देखरेख करता है) द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करना बेहद चिंताजनक है।

“यह कोई अकेली घटना नहीं है”

भारत ने पाकिस्तान के उस खोखले दावों की भी पोल खोल दी जिसमें वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की बात करता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दुर्भाग्य से यह कोई पहली या अकेली घटना नहीं है।

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों (जैसे सिख, हिंदू और ईसाई) और उनके पूजा स्थलों को लगातार और एक सोची-समझी रणनीति (सिस्टमैटिक तरीके) के तहत निशाना बनाया जा रहा है।

भारत ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि:

1. इस पूरे मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच की जाए।

 2. पवित्र धर्मस्थल को नुकसान पहुँचाने वाले दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।

 3. गुरुद्वारा साहिब के जिन हिस्सों को तोड़ा गया है, उन्हें पाकिस्तान सरकार अपने खर्चे पर जल्द से जल्द ठीक कराए और दोबारा बनवाए।

 4. पाकिस्तान अपने देश में सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता के माहौल को खत्म करे।

भारत के दबाव के बाद लाइन पर आया पाकिस्तान

भारतीय विदेश मंत्रालय की इस कड़ी फटकार और दुनिया भर में हो रही थू-थू के बाद पाकिस्तान सरकार को समझ आ गया कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी किरकिरी होते देख पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार तुरंत एक्शन मोड में आई।

विवाद को बढ़ता देख पंजाब (पाकिस्तान) के अल्पसंख्यक मामलों के प्रांतीय मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने बुधवार (1 जुलाई) को खुद इस विवादित स्थल का दौरा किया।

उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और वहां मौजूद पीड़ित स्थानीय सिख परिवारों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें और दर्द सुना।

पाकिस्तानी मंत्री का बयान और जीर्णोद्धार का वादा

मीडिया से बात करते हुए मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने माना कि एक स्थानीय बिजनेसमैन ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी एनओसी के गुरुद्वारे के भवन को गिराने की कोशिश की थी।

उन्होंने कहा कि पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने साफ निर्देश दिए हैं कि सूबे में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनके पूजा स्थलों की रक्षा हर हाल में की जाएगी।

मंत्री अरोड़ा ने औकाफ विभाग (Evacuee Trust Property Board) को तुरंत आदेश दिया कि वे इस जमीन के मालिकाना हक की जांच करें।

शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह जमीन औकाफ बोर्ड के तहत रजिस्टर्ड ही नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर भू-माफिया ने इसे कब्जाने और तोड़ने की कोशिश की।

मंत्री ने आश्वासन दिया है कि इस पवित्र गुरुद्वारे के क्षतिग्रस्त हिस्से का सरकार तुरंत जीर्णोद्धार (Repairs and Reconstruction) कराएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

खोखले दावों के बीच अल्पसंख्यकों का दर्द

भले ही भारत के दबाव में आकर पाकिस्तान के मंत्री ने गुरुद्वारे को दोबारा बनाने का वादा कर दिया हो, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

वहां आए दिन ऐतिहासिक मंदिरों और गुरुद्वारों को निशाना बनाया जाता है, बहुमूल्य जमीनों पर कब्जे होते हैं और अल्पसंख्यकों को डराया-धमकाया जाता है।

सिख समुदाय अब इस बात पर अड़ा है कि जब तक दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता और गुरुद्वारा साहिब को उनके पुराने गौरव के साथ दोबारा नहीं खड़ा किया जाता, तब तक उनका प्रदर्शन और विरोध जारी रहेगा।

भारत सरकार भी इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

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