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सागर में चमकी किस्मत: बंजर खेत उगल रहा 500 साल पुराने कीमती रत्न, एक की कीमत 25 हजार!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sagar MP precious stones found: मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के देवरी इलाके में स्थित जैतपुर डोमा गांव इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

वजह यह है कि यहां एक बंजर पड़ी जमीन से अचानक कीमती रत्न (पत्थर) निकलने लगे हैं।

इन रत्नों को देखने और इन्हें पाने के लिए दूर-दूर से लोगों की भीड़ इस खेत पर जुट रही है।

ग्रामीणों का दावा है कि जमीन से निकल रहे इन रत्नों (जिन्हें स्थानीय भाषा में मनके कहा जाता है) की कीमत बाजार में बहुत ज्यादा है।

एक सिंगल मनके की कीमत करीब 25 हजार रुपये तक आंकी जा रही है।

ग्रामीणों के लिए बना कमाई का जरिया

यह बंजर जमीन अब गांव के कई परिवारों के लिए झटके में अमीर बनने या मोटी कमाई करने का जरिया बन चुकी है।

इतिहास और पुरातत्व के जानकारों की मानें तो ये रत्न आज के नहीं, बल्कि करीब 500 साल पुराने हैं।

जानकारों का अनुमान है कि सैकड़ों साल पहले इस जगह पर कोई समृद्ध इंसानी बस्ती रही होगी।

वक्त के साथ वह बस्ती तो उजड़ गई, लेकिन उसके अवशेष आज भी जमीन के नीचे दबे हुए हैं, जो अब धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं।

पहली बार नहीं मिला ऐसा खजाना

गांव वालों का कहना है कि ये जो गोल और सुंदर पत्थर मिल रहे हैं, इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में (खासकर मुगलकाल के दौरान) राजा-महाराजाओं या अमीर लोगों के हार और आभूषण बनाने में किया जाता होगा।

दिलचस्प बात यह है कि सागर जिले में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है।

इससे पहले भी देवरी के ही सिलारी गांव और केसली इलाके के मदनपुर गांव से भी इसी तरह के कीमती रत्न और पुराने मनके मिलने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

सुबह होते ही खेत पर जुट जाती है भीड़

जैसे ही गांव में यह खबर फैली कि मिट्टी में कीमती पत्थर छिपे हैं, लोगों की किस्मत चमकने की उम्मीद जाग गई।

अब तक गांव के करीब 10 लोगों को ये कीमती मनके मिल चुके हैं।

बस फिर क्या था, इस ‘खजाने’ को पाने की चाहत में बड़ी संख्या में ग्रामीण सुबह-सुबह ही अपने घरों से निकलकर इस बंजर जमीन पर पहुंच जाते हैं।

खेत में महिलाएं, पुरुष और छोटे-छोटे बच्चे दिनभर मिट्टी खोदते और उसे खंगालते (छानते) नजर आते हैं।

हर किसी की आंखों में बस एक ही सपना है कि उनके हाथ भी कोई रत्न लग जाए।

मौके पर ही हो जाता है कैश पेमेंट

इन पत्थरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें बेचने के लिए ग्रामीणों को किसी शहर या बड़े जौहरी के पास चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।

इन पत्थरों को खरीदने वाले खरीदार (व्यापारी) खुद इस बंजर खेत के आसपास मंडरा रहे हैं।

जैसे ही किसी ग्रामीण को खुदाई में कोई रत्न मिलता है, वहां मौजूद खरीदार तुरंत उसकी रंगत, क्वालिटी और बनावट की जांच करते हैं और मौके पर ही हजारों रुपये का नकद भुगतान (कैश पेमेंट) कर देते हैं।

एक-एक पत्थर के बदले 25-25 हजार रुपये नकद मिलने से ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

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क्या कहते हैं इतिहास के एक्सपर्ट्स?

इस पूरे मामले पर सागर की डॉ. हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पुरातत्व विभाग (Archaeology Department) के एचओडी प्रो. नागेश दुबे ने अहम जानकारी दी है।

उनका कहना है कि यह पूरा इलाका इतिहास के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है।

शुरुआती रिसर्च और मलबे को देखकर लगता है कि आज से करीब 500 साल पहले यहां कोई बड़ी बस्ती बसी होगी।

उस दौर में लोग सजना-संवरना पसंद करते थे और रत्नों से बने गहने पहनते थे।

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बारिश ने खोला सदियों पुराना राज

प्रो. दुबे ने समझाया कि वैज्ञानिक और ऐतिहासिक भाषा में इन कीमती पत्थरों को ‘मनका’ (Beads) कहा जाता है।

सदियों पहले जब वह पुरानी बस्ती खत्म हो गई, तो ये चीजें मिट्टी के नीचे दफन हो गईं।

अब लगातार हुई बारिश और प्राकृतिक रूप से मिट्टी के कटाव (Siltation) की वजह से ऊपरी मिट्टी बह गई और ये मनके सतह पर आ गए।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ये पत्थर असल में कितने साल पुराने हैं और किस काल के हैं, इसकी पूरी और सही जानकारी एक बड़े और विस्तृत पुरातात्विक सर्वे (Archaeological Investigation) के बाद ही सामने आ पाएगी।

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