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भोपाल में अरेरा कॉलोनी से रोहित नगर तक हड़कंप: आवासीय प्रॉपर्टी पर चल रहे 15 कमर्शियल कॉम्प्लेक्स सील

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Municipal Corporation Action: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों जैसे अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां और 1100 क्वार्टर्स में 1 अगस्त को अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

शनिवार से भोपाल नगर निगम (BMC) ने आवासीय भूखंडों (Residential Land) पर बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial Activities) के खिलाफ सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए निगम की टीमों ने मैदान में उतरकर सीलिंग की कार्रवाई की।

दोपहर तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में 15 से अधिक दुकानों, रेस्टोरेंटों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील (Seal) कर दिया गया।

नगर निगम अब तक ऐसे 1018 व्यवसायियों को नोटिस थमा चुका है।

कई जगह कार्रवाई की भनक लगते ही व्यापारियों ने खुद ही बोर्ड टांग दिए कि “इस परिसर में व्यावसायिक गतिविधि बंद कर दी गई है।”

बावड़ियाकलां में जमकर हंगामा: पार्षद पति की निगम अमले से तीखी बहस

कार्रवाई के दौरान वार्ड-52 स्थित बावड़ियाकलां में स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

जब नगर निगम का अमला एक टैटू शॉप को सील करने पहुंचा, तो पूर्व पार्षद और वर्तमान भाजपा पार्षद के पति रामबाबू पाटीदार व्यापारियों के समर्थन में उतर आए।

पाटीदार और निगम के कर्मचारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोंकझोंक और बहस हुई।

स्थिति बिगड़ती देख जोन प्रभारी नीलेश श्रीवास्तव को बीच-बचाव करना पड़ा।

पाटीदार ने कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा:

* रातों-रात नोटिस: नगर निगम ने बिना पर्याप्त समय दिए अचानक व्यापारियों को नोटिस थमा दिए हैं, जिससे शहर भर में असमंजस और डर का माहौल है।

* पक्षपात का आरोप: उन्होंने कहा कि अगर नियमों का पालन कराना ही है तो शुरुआत पुराने शहर (Old City) से होनी चाहिए। सिर्फ नए भोपाल के कुछ खास इलाकों को निशाना बनाना सरासर गलत है।

दूसरी तरफ, निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता और अन्य अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई नियमानुसार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए की जा रही है।

उन्होंने साफ किया कि सभी दुकानदारों को पूर्व में नोटिस जारी किए जा चुके थे।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और स्थानीय रहवासियों की शिकायतें

शहर के प्रमुख आवासीय क्षेत्रों में वर्षों से बड़े-बड़े शोरूम, बैंक, अस्पताल, टैटू शॉप्स और फास्ट फूड कॉर्नर संचालित हो रहे हैं।

अरेरा कॉलोनी और आसपास के इलाकों के रहवासियों की शिकायत थी कि इन कमर्शियल प्रतिष्ठानों की वजह से रिहायशी इलाकों में ट्रैफिक जाम, गाड़ियों की अवैध पार्किंग और शोर-शराबे की गंभीर समस्या पैदा हो रही है।

इस मामले में स्थानीय रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य लोगों ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद नगर निगम के पास कार्रवाई के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

रोहित नगर के मशहूर एसके प्लाजा स्थित ‘शर्मा विष्णु फास्ट फूड’ समेत कई अन्य प्रसिद्ध दुकानों पर निगम ने ताला लगा दिया है।

व्यापारियों का पक्ष: “टैक्स पूरा ले रहे हैं, फिर हम अतिक्रमणकारी कैसे?”

नगर निगम की इस सीलिंग मुहिम से व्यापारियों में भारी आक्रोश है। 10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी और अन्य व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी बात रखी:

* कानूनी शुल्क का भुगतान: व्यापारियों का तर्क है कि वे नगर निगम को व्यावसायिक दर (Commercial Rate) पर प्रॉपर्टी टैक्स दे रहे हैं। बिजली का बिल भी कमर्शियल दर से भरा जा रहा है। इसके अलावा, उनके पास निगम का ट्रेड लाइसेंस और जीएसटी (GST) रजिस्ट्रेशन भी मौजूद है।

* मास्टर प्लान में देरी: व्यापारियों का कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। भोपाल में पिछले 21 सालों से नया ‘मास्टर प्लान’ (Bhopal Master Plan) लागू ही नहीं किया गया है।

* वैकल्पिक समाधान की मांग: व्यापारियों ने मांग की है कि सरकार या तो गुजरात मॉडल की तर्ज पर नया नियम बनाए या 29 जून को भूमि विकास नियमों में किए गए संशोधनों को तुरंत लागू करे, ताकि उनका व्यवसाय बच सके।

मैदान में उतरा ‘भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स’, मिक्स लैंड यूज़ की उठाई मांग

व्यापारियों के समर्थन में ‘भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज’ (BCCI) भी खुलकर सामने आ गया है।

चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल और सचिव अजय देवनानी ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल जाता, तब तक इस सीलिंग कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।

* 2005 के बाद से मास्टर प्लान अटका: चैंबर ने ध्यान दिलाया कि भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान वर्ष 2005 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद शहर का विस्तार तो बहुत हुआ, लेकिन नए व्यावसायिक क्षेत्र चिह्नित नहीं किए गए।

* मजबूरी में आवासीय इलाकों में दुकान: नए कमर्शियल प्लॉट उपलब्ध न होने के कारण व्यापारी 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, सहयोग विहार और 1100 क्वार्टर्स में रिहायशी जमीनों पर दुकानें चलाने के लिए मजबूर हुए।

* लाखों लोगों का रोजगार संकट में: केवल 10 दिनों का कम समय देकर दुकानें बंद कराना न्यायसंगत नहीं है।

इससे हजारों व्यापारियों और उनसे जुड़े लाखों कर्मचारियों व उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

चैंबर ने शहर में ‘मिक्स लैंड यूज’ (Mixed Land Use) की व्यवस्था लागू करने की पुरजोर सिफारिश की है।

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