Homeएंटरटेनमेंटदिल्ली से गुजरात बदला नेशनल अवॉर्ड्स का ठिकाना तो भड़के राज और...

दिल्ली से गुजरात बदला नेशनल अवॉर्ड्स का ठिकाना तो भड़के राज और उद्धव ठाकरे: संजय राउत बोले- कलाकार करें बॉयकॉट

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

National Film Awards controversy: भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ (National Film Awards) के 72 साल के इतिहास में एक नया मोड़ आ गया है।

अब तक यह आयोजन पारंपरिक रूप से देश की राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया जाता रहा है।

हालांकि, इस वर्ष 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन दिल्ली के बाहर गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित एकता नगर (केवड़िया) में करने की तैयारी चल रही है।

इस फैसले के सामने आते ही देश का राजनीतिक और फिल्मी पारा चढ़ गया है।

महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस बदलाव पर कड़ा ऐतराज जताया है, जबकि बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है।

राज ठाकरे बोले: ‘दिल्ली और मुंबई की अहमियत खत्म करने की कोशिश’

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का स्थल दिल्ली से गुजरात स्थानांतरित किए जाने पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए सीधे तौर पर सवाल उठाया कि आखिर दशकों पुरानी इस गौरवशाली परंपरा को अचानक तोड़ने की क्या मजबूरी आन पड़ी?

राज ठाकरे ने कहा कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महत्व धीरे-धीरे कम करने के बाद अब केंद्र सरकार देश की राजधानी नई दिल्ली के कद को भी घटाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने तर्क दिया:

* महाराष्ट्र और दक्षिण भारत का योगदान:

भारतीय सिनेमा की नींव महाराष्ट्र की धरती पर दादासाहेब फाल्के ने रखी थी। इसके अलावा तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में विशाल पैमाने पर सिनेमा बनता है, जिसने वहां की संस्कृति और राजनीति को नया आकार दिया है। यदि दिल्ली से बाहर कार्यक्रम ले ही जाना था, तो इन राज्यों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?

* वैश्विक मिसाल (ऑस्कर): उन्होंने अमेरिका के ‘ऑस्कर अवॉर्ड्स’ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां चाहे राष्ट्रपति बुश हों, ओबामा हों या ट्रंप—किसी ने भी ऑस्कर समारोह को उसके पारंपरिक स्थल लॉस एंजिलिस से हटाकर अपने गृह राज्य में ले जाने की कोशिश नहीं की।

 * गुजरात पर ही फोकस क्यों?:

राज ठाकरे ने सिर्फ फिल्म अवॉर्ड्स ही नहीं, बल्कि क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 और कॉमनवेल्थ जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों को गुजरात केंद्रित करने पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग खुद कुछ नया या बड़ा ऐतिहासिक काम करने में नाकाम रहे हैं, वे नाम और स्थान बदलकर नया इतिहास रचने का भ्रम फैला रहे हैं।

संजय राउत की बॉयकॉट की अपील और उद्धव ठाकरे का रुख

शिवसेना (UBT) के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने इस फैसले की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए इसे देश की परंपराओं का अपमान बताया।

राउत ने कहा कि यह कोई ‘वाइब्रेंट गुजरात’ का प्रादेशिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरे भारत का राष्ट्रीय सम्मान है।

उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी का महत्व घटाया जा रहा है।

संजय राउत ने देश के सभी सम्मानित अभिनेताओं, निर्देशकों और तकनीशियनों से अपील की कि वे इस आयोजन का बहिष्कार (Boycott) करें और गुजरात जाने से इनकार कर दें।

वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक दीवार खड़ी करने का काम कर रही है।

परेश रावल का पलटवार: ‘क्या गुजरात भारत से बाहर है?’

राजनीतिक बयानबाजी और विवाद के बीच बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता और पूर्व सांसद परेश रावल ने सरकार के इस फैसले का पुरजोर बचाव किया है।

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए परेश रावल ने विरोधियों को आड़े हाथों लिया और कहा:

क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है? वह भी हमारे ही देश का एक अभिन्न अंग है। ऐसे भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम गुजरात में क्यों आयोजित नहीं हो सकते? मेरी राय में राष्ट्रीय पुरस्कारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन देश के हर राज्य में बारी-बारी से होना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”

केवड़िया (एकता नगर) को चुनने के पीछे की वजह

अधिकारियों और रिपोर्टों के अनुसार, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन 22 सितंबर को एकता नगर में आयोजित होने की संभावना है।

इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विजेताओं को सम्मानित कर सकती हैं।

एकता नगर में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थित है, जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानी जाती है।

सरकार का उद्देश्य इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन को राष्ट्रीय एकता और पर्यटन स्थल से जोड़ना है।

संयोगवश, इस वर्ष आनंद एल. राय की डॉक्यूमेंट्री ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – एकता का प्रतीक’ को भी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि 18 जुलाई 2026 को घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और कार्तिक आर्यन (‘चंदू चैंपियन’) व ममूटी (‘ब्रह्मयुगम’) को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया है।

#NationalFilmAwards #RajThackeray #SanjayRaut #PareshRawal #EktaNagar #StatueOfUnity #BollywoodNews #IndianCinema

- Advertisement -spot_img