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म्यूजिक लीजेंड एआर रहमान को नहीं मिल रहा बॉलीवुड में काम, जावेद अख्तर ने बताई असली वजह

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

AR Rahman Bollywood: भारतीय संगीत जगत के ‘मोजार्ट’ कहे जाने वाले ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने हाल ही में बॉलीवुड इंडस्ट्री के बदलते समीकरणों पर खुलकर बात की है।

रहमान के एक हालिया इंटरव्यू ने सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

रहमान का मानना है कि पिछले 8 सालों में उनके लिए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का माहौल काफी बदल गया है।

पहले जैसा काम नहीं मिल रहा है…

एक इंटरव्यू के दौरान एआर रहमान ने संकेत दिया कि उन्हें बॉलीवुड में अब पहले जैसा काम नहीं मिल रहा है।

इसके पीछे उन्होंने ‘सांप्रदायिक एंगल’ और ‘पावर शिफ्ट’ की ओर इशारा किया।

अब बिजनेस मैन चला रहे हैं इंड्रस्टी

रहमान के मुताबिक, पहले संगीत निर्देशक और संगीतकार के बीच की आपसी समझ से बनता था, लेकिन अब यह नियंत्रण बड़े म्यूजिक लेबल्स और कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चला गया है।

रहमान ने कहा कि फैसले अब रचनात्मक लोग नहीं, बल्कि बिजनेस चलाने वाले लोग ले रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि कई बार उन्हें पता चलता है कि किसी प्रोजेक्ट के लिए उनका नाम तय था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनी ने अपने किसी पसंदीदा कलाकार को काम दे दिया।

जावेद अख्तर ने दावों को नकारा

दूसरी तरफ मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने रहमान के इन दावों से असहमति जताई है।

अख्तर का कहना है कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में रहमान को आज भी बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता है।

जावेद अख्तर के अनुसार, काम न मिलने का कारण सांप्रदायिक नहीं बल्कि व्यावहारिक है।

उन्होंने कहा कि रहमान अक्सर अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स और वर्ल्ड टूर्स में व्यस्त रहते हैं, इसलिए छोटे या नए निर्माता उनके पास जाने से झिझकते हैं।

उन्हें लगता है कि रहमान जैसे बड़े कद के कलाकार के पास उनके लिए समय नहीं होगा।

फिल्म ‘रामायण’ और धर्म पर रहमान के विचार

इंटरव्यू के दौरान एक अहम सवाल रहमान के मुस्लिम होने और फिल्म ‘रामायण’ के लिए संगीत देने को लेकर पूछा गया।

इस पर रहमान ने जवाब दिया, “मैंने अपनी शिक्षा एक ब्राह्मण स्कूल में पूरी की है, जहां रामायण और महाभारत की कहानियां हमारे जीवन का हिस्सा थीं।”

रहमान के अनुसार, रामायण किसी धर्म विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और आदर्श चरित्र की कहानी है।

उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब की सीख का जिक्र करते हुए कहा कि ज्ञान जहां से भी मिले, उसे ग्रहण करना चाहिए।

‘रामायण’ प्रोजेक्ट से जुड़ने पर उन्हें अपने धर्म या नाम की वजह से किसी भी विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है।

भविष्य की राह

रहमान ने स्पष्ट किया कि काम की कमी उनके आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचाती है।

वे काम की तलाश में इधर-उधर नहीं भटकते, बल्कि चाहते हैं कि उनकी ईमानदारी और मेहनत के कारण काम खुद उनके पास आए।

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बता दें कि ‘रोजा’ से अपना सफर शुरू करने वाले रहमान ने ‘ताल’, ‘लगान’, ‘रॉकस्टार’ जैसी फिल्मों से भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।

फिलहाल वे नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ और ‘छावा’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

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