Dharmendra Hema Malini Love Story: बॉलीवुड की दुनिया में यूं तो कई यादगार प्रेम कहानियां बनीं, लेकिन धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की लव स्टोरी सबसे हटकर है।
यह कहानी है उस प्यार और हिम्मत की है जिसने समाज की बंदिशों और पारिवारिक अपेक्षाओं को तोड़कर अपनी एक अलग ही दुनिया बसा ली।
एक तरफ शादीशुदा और चार बच्चों के पिता धर्मेंद्र थे, तो दूसरी तरफ उस दौर की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी।
यह वो कहानी है जब 12 साल छोटी हेमा की खातिर धर्मेद्र दुनिया से लड़ गए।

पहली नजर का प्यार: जब ‘हीमैन’ को अपनी ‘ड्रीमगर्ल’ मिल गई
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की पहली मुलाकात 1970 के दशक की शुरुआत में एक फिल्म प्रीमियर के दौरान हुई थी।
उस वक्त धर्मेंद्र 35 साल के थे और अपने करियर के शिखर पर थे, जबकि हेमा मालिनी महज 22 साल की युवा अभिनेत्री थीं जो ‘ड्रीम गर्ल’ के तौर पर लोगों के दिलों पर राज कर रही थीं।
कहा जाता है कि धर्मेंद्र पहली ही नजर में हेमा के प्यार में पड़ गए थे।
हालांकि, दोनों के बीच नजदीकी तब आई जब उन्होंने साथ में फिल्म ‘तू हसीन और मैं जवान’ (1970) में काम किया।
फिल्म के सेट पर ही दोनों एक-दूसरे को समझने और जानने लगे। यह आकर्षण धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गया।

इसके बाद फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ (1973) की शूटिंग के दौरान उनका रिश्ता और भी मजबूत हो गया।
वे एक-दूसके के साथ घुल-मिल गए और प्यार करने लगे।
शादीशुदा होने का टैग और हेमा के पिता का विरोध
मगर यह प्रेम कहानी इतनी आसान नहीं थी।
धर्मेंद्र पहले से ही प्रकाश कौर से विवाहित थे और उनके चार बच्चे (सनी, बॉबी, विजय और अजीता) थे।
यही वजह थी कि हेमा मालिनी के पिता, वी.एस.आर. चक्रवर्ती, इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे।
उन्होंने हेमा के लिए अभिनेता जीतेंद्र के साथ शादी तय कर दी थी और हेमा ने शुरुआत में इसके लिए हां भी कह दी थी।
लेकिन, दिल की आवाज़ कुछ और कह रही थी।
हेमा ने आखिरकार जीतेंद्र से शादी करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अपने दिल की सुनने का फैसला किया।

दो बार की शादी
समाज और परिवार के विरोध के बीच, धर्मेंद्र और हेमा ने एक-दूसरे से शादी करने का फैसला लिया।
चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत एक शादीशुदा व्यक्ति का दूसरी शादी करना कानूनन मान्य नहीं था, इसलिए उन्होंने एक अलग रास्ता अपनाया।
साल 1980 में, धर्मेंद्र ने इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम बदलकर ‘दिलावर खान’ रख लिया और हेमा मालिनी से निकाह कर लिया।
निकाह के समय हेमा का नाम ‘आयशा बी’ रखा गया।

इस तरह, कानूनी और सामाजिक चुनौतियों को पार करते हुए, दोनों एक-दूसरे के हो गए।
हालांकि, निकाह के कुछ महीनों बाद ही, 2 मई 1980 को, दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से भी विधिवत शादी की, ताकि उनका बंधन और मजबूत हो सके।
एक छत के नीचे नहीं रहे, पर दिलों में एक जगह
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की शादी की सबसे बड़ी और अनोखी बात यह रही कि उन्होंने हमेशा एक-दूसरे की निजता और जिम्मेदारियों का सम्मान किया।
शादी के बाद भी, धर्मेंद्र अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर और अपने बच्चों के साथ रहे, जबकि हेमा मालिनी अपनी दोनों बेटियों, ईशा देओल और अहाना देओल, के साथ अलग रहने लगीं।
यह फैसला किसी कड़वाहट या अलगाव की वजह से नहीं, बल्कि शांति और गरिमा बनाए रखने के लिए लिया गया था।

हेमा मालिनी ने अपनी बायोग्राफी में इस बात को स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा, “मैं किसी को परेशान नहीं करना चाहती थी… मैं जो कुछ भी धरम जी ने मेरे और मेरी बेटियों के लिए किया, उससे खुश हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि वह कोई “पुलिस अधिकारी” नहीं हैं जो धर्मेंद्र पर नजर रखें।
उन्हें हमेशा इस बात पर विश्वास रहा कि धर्मेंद्र एक जिम्मेदार पिता और इंसान हैं।
अलग-अलग रहने के बावजूद, दोनों के बीच का प्यार और सम्मान हमेशा कायम रहा।

दूसरी पत्नी का टैग और समाज की उंगलियां
उस दौर में, हेमा मालिनी पर ‘होमव्रेकर’ होने के आरोप लगे, लोगों ने उनकी पीठ पीछे बातें बनाईं और उन्हें ‘दूसरी पत्नी’ का टैग झेलना पड़ा। लेकिन हेमा ने अपने प्यार के आगे इन सभी बातों को नकार दिया।
उन्होंने कहा, “लोग मेरी पीठ पीछे बातें करते थे। उंगलियां उठाई जाती थीं। आरोप लगाए जाते थे। लेकिन मुझे बस इतना पता था कि वह (धर्मेंद्र) मुझे खुश रखते हैं। और मुझे बस खुशी चाहिए थी।”
हेमा ने कभी भी अपने फैसले को दुनिया के सामने जस्टिफाई करने की कोशिश नहीं की।
उनके लिए उनकी खुशी और उनके प्यार की अहमियत दुनिया की राय से कहीं ज्यादा थी।

प्यार की जीत और एक मिसाल
आज, दशकों बाद, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की यह प्रेम कहानी प्यार की जीत की एक मिसाल बन चुकी है।
उनकी दोनों बेटियां, ईशा और अहाना, अपने-अपने परिवार में खुश हैं।
धर्मेंद्र ने हमेशा अपनी दोनों पत्नियों और सभी बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।

यह कहानी सिखाती है कि प्यार कभी-कभी उलझा हुआ और जटिल हो सकता है, लेकिन अगर इरादे सच्चे हों और एक-दूसरे के प्रति सम्मान हो, तो रिश्ते की नींव मजबूत बनी रहती है।
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने यह साबित किया कि प्यार की अपनी एक भाषा होती है, और कभी-कभी, समाज के बनाए नियमों से हटकर चलना ही सच्ची खुशी का रास्ता होता है।
उनकी यह लव स्टोरी हमेशा उनके फैंस के दिलों में जिंदा रहेगी।
नोट: यह लेख विभिन्न साक्षात्कारों, हेमा मालिनी की बायोग्राफी ‘हेमा मालिनी: बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल’, और विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट्स पर आधारित है।


