Dead Person Aadhaar Card: आधार कार्ड भारत के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान पत्र है।
लेकिन, हाल में सामने आई एक रिपोर्ट ने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग 6 करोड़ ऐसे लोगों के आधार कार्ड सक्रिय हैं, जिनकी मौत हो चुकी है।
इसका मतलब है कि इन मृत लोगों के आधार कार्ड का इस्तेमाल अभी भी कहीं न कहीं हो रहा है।
क्यों है यह एक गंभीर मामला?
जब किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार कार्ड सक्रिय रह जाता है, तो इसका दुरुपयोग होने का खतरा पैदा हो जाता है। इससे निम्नलिखित प्रकार की धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है:
- बैंक धोखाधड़ी: मृतक के नाम पर बैंक खाते खुल सकते हैं या उनके खातों का इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों के लिए किया जा सकता है।
- सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी: मृत व्यक्ति के नाम पर सरकारी पेंशन, राशन या अन्य लाभों का गलत तरीके से इस्तेमाल हो सकता है। इससे सही हकदारों को उनका लाभ नहीं मिल पाता।
- फर्जीवाड़ा: फर्जी दस्तावेज बनाने या पहचान छुपाने के लिए मृतकों के आधार नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या कर रहा है UIDAI?
आधार जारी करने वाली संस्था यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) इस समस्या से अवगत है और मृतकों के आधार निष्क्रिय करने का काम कर रही है।
UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भुवनेश कुमार के अनुसार:
- देश के महापंजीयक (RGI) से अब तक लगभग 1.55 करोड़ मृतकों की सूची मिली है।
- इनमें से 1.17 करोड़ मृतकों के आधार कार्डों को पहचान कर निष्क्रिय किया जा चुका है।
- UIDAI को उम्मीद है कि दिसंबर तक कुल 2 करोड़ आधार कार्ड निष्क्रिय कर दिए जाएंगे।
लोग भी नहीं कर रहे हैं मदद:
UIDAI ने इस समस्या से निपटने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां परिवार के लोग मृतक सदस्य का आधार नंबर दर्ज करके उसे निष्क्रिय करा सकते हैं।
लेकिन, अफसोस की बात है कि अब तक सिर्फ 3,000 लोगों ने ही इस पोर्टल का इस्तेमाल किया है।
इनमें से भी केवल 500 मामलों में ही पुष्टि हो सकी है और आधार निष्क्रिय किए गए हैं।
अन्य चुनौतियां:
- अधूरा डेटा: UIDAI को सभी राज्यों से मृत्यु के आंकड़े नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे पूरी तस्वीर साफ नहीं हो पा रही।
- तकनीकी दिक्कत: करीब 48 लाख रिकॉर्ड ऐसे हैं जिनका मिलान नहीं हो पाया है, क्योंकि कुछ जानकारी क्षेत्रीय भाषाओं में दर्ज है।
- 100 साल से अधिक उम्र वाले आधार: UIDAI के पास 8.3 लाख ऐसे आधार कार्ड हैं जहाँ धारक की उम्र 100 साल से ज्यादा दर्ज है। इनकी जाँच की जा रही है।
बैंक और सरकारी व्यवस्था पर असर:
इस समस्या का असर बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है:
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 8 लाख मृतकों के बैंक खाते बंद किए हैं।
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 4 लाख मृतकों के खातों की पहचान की है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन प्रणाली में 4.5 लाख मृतकों के राशन कार्ड अभी भी सक्रिय पाए गए।
- पेंशन व्यवस्था में 22 लाख पेंशनरों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
मृतकों के सक्रिय आधार कार्ड एक बड़ी व्यवस्थागत खामी है जो देश की वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए खतरा बन सकती है।
इस पर नियंत्रण पाने के लिए UIDAI के साथ-साथ आम नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
परिवारों को चाहिए कि किसी सदस्य की मृत्यु के बाद तुरंत UIDAI के पोर्टल पर जाकर उसका आधार निष्क्रिय करा दें।
साथ ही, राज्य सरकारों को भी मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और मजबूत व पारदर्शी बनाने की जरूरत है।


