Saraswati Temples in India: हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का दिन प्रकृति के श्रृंगार और ज्ञान के प्राकट्य का उत्सव है।
साल 2026 में, पर्व 23 जनवरी को मनाया जा रहा है। यह दिन केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि वाणी, कला, संगीत और विद्या की देवी मां सरस्वती के पूजन का सबसे बड़ा दिन है।
मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी के मानस से देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं।
अगर इस शुभ मौके पर आप तीर्थ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो भारत के इन 10 सरस्वती मंदिरों में जरूर जाएं।
1. सावित्री देवी मंदिर, पुष्कर (राजस्थान)
पुष्कर केवल ब्रह्मा जी के लिए ही नहीं, बल्कि देवी सरस्वती के लिए भी पूजनीय है।
रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर धरातल से लगभग 750 फीट की ऊंचाई पर है।

यहां देवी सावित्री के साथ-साथ शारदा और सरस्वती की भी मूर्तियां स्थापित हैं।
यहां की यात्रा न केवल आध्यात्मिक है, बल्कि पहाड़ी से दिखने वाला पुष्कर का नजारा मन को शांति प्रदान करता है।
2. ज्ञान सरस्वती मंदिर, बासर (तेलंगाना)
गोदावरी नदी के किनारे बसा यह मंदिर देशभर में ‘अक्षर अभ्यासम’ संस्कार के लिए प्रसिद्ध है।
यहां छोटे बच्चों की शिक्षा का श्रीगणेश कराया जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध की अशांति से मुक्ति पाने के लिए महर्षि व्यास ने यहीं तपस्या की थी।

यहां माता सरस्वती के विग्रह पर हल्दी का लेप लगाया जाता है, जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. शृंगेरी शारदा पीठम, कर्नाटक
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित यह पीठ भारत के चार प्रमुख मठों में से एक है।
तुंगभद्रा नदी के पावन तट पर स्थित यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।
यहां मां सरस्वती ‘शारदा’ के रूप में विराजमान हैं।

दक्षिण भारत में इसे ज्ञान और संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
4. विद्या सरस्वती मंदिर, वरगल (तेलंगाना)
मेदक जिले में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी शांति और सादगी के लिए जाना जाता है।
यहां का वातावरण ऐसा है कि कोई भी साधक एकाग्रता प्राप्त कर सकता है।
यहां एक वेद विद्यालय भी संचालित होता है, जहां प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को जीवित रखा गया है।

5. बिट्स पिलानी सरस्वती मंदिर (राजस्थान)
आधुनिक काल में निर्मित यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।
1959 में सफेद संगमरमर से निर्मित यह मंदिर इंडो-आर्यन शैली में बना है।
70 स्तंभों पर टिका यह विशाल परिसर शिक्षा और धर्म के सुंदर मेल को दर्शाता है।

यह मंदिर विज्ञान और आध्यात्मिकता के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
6. कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु
यह तमिलनाडु का एकमात्र मंदिर है जो विशेष रूप से सरस्वती को समर्पित है।
इसका संबंध चोल राजाओं और प्रसिद्ध कवि ओट्टक्कूथन से है।
यहां छात्र अपनी कलम और दवात मां के चरणों में चढ़ाते हैं ताकि उन्हें परीक्षा में सफलता मिल सके।
यहां की अरसलार नदी को साक्षात सरस्वती का रूप माना जाता है।

7. दक्षिण मूकाम्बिका (पनचिक्कड़), केरल
केरल के कोट्टायम में स्थित इस मंदिर को ‘पनचिक्कड़ सरस्वती मंदिर’ कहते हैं।
यहां की विशेषता यह है कि मुख्य मूर्ति को प्राकृतिक लताओं ने घेरा हुआ है और पैरों के पास एक जलधारा लगातार बहती रहती है।
यहां ‘विद्यारंभम’ उत्सव के दौरान हजारों बच्चों को पहला अक्षर सिखाया जाता है।

8. महा सरस्वती मंदिर, कोठाद (गुजरात)
कच्छ के रण के पास स्थित यह मंदिर वाणी और स्मृति (याददाश्त) के दोषों को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है।
यहां की सादगी भक्तों को अपनी ओर खींचती है।
परीक्षा के समय यहां छात्रों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो मां से सद्बुद्धि की प्रार्थना करने आते हैं।

9. सरस्वती उद्गम मंदिर, माणा (उत्तराखंड)
भारत के अंतिम गांव ‘माणा’ में स्थित यह स्थान अत्यंत रहस्यमयी और ऊर्जावान है।
यहीं से सरस्वती नदी का प्राकट्य हुआ है।
मान्यता है कि महर्षि व्यास ने इसी तट पर बैठकर वेदों और महाभारत की रचना की थी।
यहां की अलौकिक किरणें वीणा के तारों जैसा आभास कराती हैं।

10. भोजशाला सरस्वती मंदिर, धार (मध्य प्रदेश)
ऐतिहासिक रूप से धार की भोजशाला विद्या का बड़ा केंद्र रही है।
राजा भोज, जो स्वयं प्रकांड विद्वान थे, उन्होंने यहां वाग्देवी (सरस्वती) की स्थापना की थी।
बसंत पंचमी पर यहां भव्य आयोजन होता है।

यह स्थान भारतीय वास्तुकला और प्राचीन शिक्षा व्यवस्था की गौरवगाथा सुनाता है।
यात्रा जो जीवन बदल दे
इन मंदिरों की यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं को जानने और ज्ञान के प्रति समर्पित होने का एक माध्यम है।
बसंत पंचमी के दिन इन स्थानों की ऊर्जा अपने चरम पर होती है।
अगर आप भी जीवन में नई दिशा की तलाश में हैं, तो इस साल मां शारदा के इन पावन धामों में जरूर जाएं।


