HomeTrending Newsक्रिसमस क्यों मनाते हैं, सेंटा क्लॉज से क्या है संबंध? जानिए सब...

क्रिसमस क्यों मनाते हैं, सेंटा क्लॉज से क्या है संबंध? जानिए सब कुछ

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Why Celebrate Christmas 25 December: दुनिया भर में ईसाई समुदाय 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाता है।

यह दिन प्रभु यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे ‘बड़ा दिन’ क्यों कहा जाता है और 25 दिसंबर की तारीख ही क्यों चुनी गई?

आइए, इस त्योहार के पीछे के इतिहास, मान्यताओं और परंपराओं को विस्तार से समझते हैं।

25 दिसंबर को ही क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

बाइबल में यीशु मसीह के जन्म की सटीक तारीख का उल्लेख नहीं मिलता है।

फिर भी, पूरी दुनिया में 25 दिसंबर को ही क्रिसमस मनाया जाता है।

इसकी पहली आधिकारिक घोषणा 221 ईस्वी में इतिहासकार सेक्सटस जूलियस अफ्रीकानस ने की थी।

उन्होंने ही तय किया कि 25 दिसंबर को यीशु का जन्मदिन मनाया जाएगा।

इसके बाद चौथी शताब्दी में रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने भी इस तारीख को आधिकारिक रूप से क्रिसमस के लिए स्वीकार किया।

25 दिसंबर चुनने के पीछे मुख्य कारण:

  1. रोमन त्योहार ‘सैटर्नलिया’: 25 दिसंबर के आसपास रोमन लोग ‘सैटर्नलिया’ नामक एक बड़ा उत्सव मनाते थे, जो कृषि देवता सैटर्न को समर्पित था। इसमें उपहार बांटे जाते थे और खूब आनंद मनाया जाता था। ईसाई धर्म के प्रसार के बाद, चर्च ने इसी मौजूदा उत्सव के दिन को यीशु के जन्मदिन के रूप में मनाना शुरू किया, ताकि लोगों को नए धर्म को अपनाने में आसानी हो।

  2. सूर्य देवता का दिन: रोमन लोग 25 दिसंबर को ‘सोल इनविक्टस’ (अजेय सूर्य) के जन्मदिन के रूप में भी मनाते थे, क्योंकि इस दिन के बाद से दिन बड़े होने लगते हैं। ईसाई विद्वानों ने यीशु को ‘धार्मिकता का सूर्य’ बताया और इस दिन को उनके जन्म के लिए चुना।

  3. गर्भाधान की गणना: एक मान्यता के अनुसार, यीशु की माता मैरी ने 25 मार्च (जिस दिन बाद में ‘एनन्यूसिएशन डे’ मनाया जाने लगा) को गर्भ धारण किया था। इस तारीख से नौ महीने बाद 25 दिसंबर आता है, जो यीशु के जन्म की तारीख मानी गई।

क्रिसमस को ‘बड़ा दिन’ क्यों कहते हैं?

‘बड़ा दिन’ कहने के पीछे कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारण हैं:

1. ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार

ईसाई धर्म में क्रिसमस सबसे बड़ा और खुशी का त्योहार है। यह आशा, प्रेम और उद्धार के संदेश का प्रतीक है।

ईसाई मान्यता है कि इस दिन ईश्वर ने मानव रूप धारण करके यीशु को भेजा, जो दुनिया को पाप से मुक्ति दिलाने आए थे।

इस धार्मिक महत्व के कारण ही इसे ‘बड़ा दिन’ का दर्जा दिया गया।

2. रोमन उत्सव की भव्यता

रोमन साम्राज्य में 25 दिसंबर को मनाए जाने वाले ‘सैटर्नलिया’ उत्सव की बहुत अधिक भव्यता और लोकप्रियता थी।

लोग खूब उपहार बांटते, दावतें करते और मनोरंजन करते थे। इस उत्सव के ‘बड़े’ पैमाने और महत्व के कारण ही आम बोलचाल में यह दिन ‘बड़ा दिन’ कहलाने लगा।

बाद में क्रिसमस ने इस परंपरा को विरासत में संभाल लिया।

3. मकर संक्रांति से संबंध

कुछ विद्वानों का मानना है कि प्राचीन काल में 25 दिसंबर के आसपास ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता था, जो सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है।

यह दिन नए सूर्योदय और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता था।

इसके ‘महत्व’ या ‘बड़े’ दिन होने की अवधारणा भी क्रिसमस से जुड़ गई हो सकती है।

4. दिन की लंबाई

दिसंबर संक्रांति के बाद 25 दिसंबर से दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं।

इस प्राकृतिक बदलाव को भी नए सुर्योदय और आशा के ‘बड़े’ दिन के रूप में देखा जाने लगा, जो ईसाई theology में यीशु को ‘जगत के प्रकाश’ के रूप में दर्शाता है।

सांता क्लॉज का क्रिसमस से क्या संबंध है?

क्रिसमस का एक खास हिस्सा हैं सांता क्लॉज, जो बच्चों के लिए उपहार लाते हैं।

उनकी कहानी चौथी शताब्दी के एक संत सेंट निकोलस से जुड़ी है, जो आधुनिक तुर्की में मायरा के बिशप थे।

वे अपनी दयालुता और गरीबों की गुप्त रूप से मदद करने के लिए प्रसिद्ध थे।

कहा जाता है कि उन्होंने एक गरीब आदमी की तीन बेटियों के लिए दहेज का गुप्त रूप से इंतजाम किया था।

उनकी यह दानशीलता ही आगे चलकर ‘सेंटा क्लॉज’ की परंपरा बनी, जो क्रिसमस की रात बच्चों के लिए उपहार लाते हैं।

क्रिसमस कैसे मनाया जाता है?

  • प्रार्थना और मध्यरात्रि मास: चर्च में विशेष प्रार्थना सभाएं और मध्यरात्रि में मास (प्रार्थना) होते हैं।
  • क्रिसमस ट्री और सजावट: घरों और चर्चों को रोशनी, मालाओं और क्रिसमस ट्री से सजाया जाता है। क्रिसमस ट्री जीवन और अनंत आशा का प्रतीक माना जाता है।
  • उपहार और केक: प्रेम और खुशी बांटने के लिए लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं और केक काटते हैं।
  • कार्ड और गीत: ‘मैरी क्रिसमस’ कहते हुए कार्ड भेजे जाते हैं और क्रिसमस कैरल (धार्मिक गीत) गाए जाते हैं।
  • दावत और परिवार: परिवार और दोस्तों के साथ विशेष दावतें की जाती हैं, जिसमें केक, कुकीज़ और पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं।

क्रिसमस का संदेश

आज क्रिसमस ने एक धार्मिक त्योहार से आगे बढ़कर एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लिया है।

यह दिन प्रेम, दया, भाईचारे, उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक है।

चाहे कोई ईसाई हो या न हो, इस त्योहार का मूल संदेश सभी को एक-दूसरे के करीब लाने, दुखियों की मदद करने और जीवन में आशा का दीप जलाए रखने का है।

यही कारण है कि 25 दिसंबर का यह ‘बड़ा दिन’ पूरी मानवता के लिए एक सुखद और प्रेरणादायक उत्सव बन गया है।

क्रिसमस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! मेरी क्रिसमस!

- Advertisement -spot_img