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हिंदू नववर्ष 2083: इस बार 12 नहीं 13 महीने होंगे, जानें क्यों दो बार आएगा ‘जेठ’ का महीना?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 बेहद खास और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है।

आमतौर पर एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन साल 2026 में हिंदू कैलेंडर (विक्रम संवत 2083) में कुल 13 महीने होंगे।

ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ (जेठ) का महीना दो बार आएगा, जिसे हम ‘अधिक मास’ या ‘पुरूषोत्तम मास’ कहते हैं।

19 मार्च से शुरू हुआ नया साल

हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है।

साल 2026 में यह तारीख 19 मार्च को आई। इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का भी आरंभ हुआ।

भारत के अलग-अलग कोनों में इसे गुड़ी पड़वा, उगादी और चेटीचंड जैसे त्योहारों के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

क्यों जुड़ रहा है ये 13वां महीना? (विज्ञान और ज्योतिष)

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ये extra महीना आता कहां से है? इसे समझने के लिए हमें सूरज और चांद की चाल को समझना होगा:

  • चंद्र वर्ष: चंद्रमा की कलाओं पर आधारित साल लगभग 354 दिनों का होता है।
  • सौर वर्ष: पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने में लगा समय लगभग 365 दिन होता है।

हर साल चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच करीब 11 दिनों का अंतर आ जाता है।

अगर यह अंतर ऐसे ही बढ़ता रहे, तो हमारे त्योहार (जैसे होली, दिवाली) धीरे-धीरे अपनी ऋतुओं से दूर हो जाएंगे।

इस अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल (33 महीने बाद) एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे ‘अधिक मास’ कहा जाता है।

2026 में यह अतिरिक्त समय ज्येष्ठ मास के साथ जुड़ रहा है, इसलिए 17 मई से 15 जून तक ‘ज्येष्ठ अधिक मास’ रहेगा।

ग्रहों की कैबिनेट: गुरु होंगे ‘राजा’ और मंगल ‘मंत्री’

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर नए संवत का एक राजा और एक मंत्री होता है। 2026 (संवत 2083) के राजा बृहस्पति (गुरु) होंगे और मंत्री मंगल।

  • गुरु ज्ञान, धर्म और सुख-समृद्धि के कारक हैं, जो समाज में आध्यात्मिकता बढ़ाएंगे।
  • मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतीक हैं।

इन दोनों का साथ होना यह संकेत देता है कि यह साल पराक्रम और ज्ञान के मेल का होगा।

हालांकि, इस संवत का नाम ‘रौद्र’ है, इसलिए प्राकृतिक बदलावों और सामाजिक उथल-पुथल के प्रति सतर्क रहने की सलाह भी दी जाती है।

अधिक मास में क्या करना चाहिए? (Do’s)

यह महीना आत्मिक शुद्धि और पुण्य कमाने का ‘महाकुंभ’ माना जाता है।

  • मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर जाप करना मानसिक शांति देता है।
  • दान-पुण्य: इस दौरान अनाज, वस्त्र और दीपदान का विशेष महत्व है।
  • धार्मिक पाठ: श्रीमद्भागवत गीता या रामायण का पाठ करना बहुत फलदायी होता है।
  • दीपदान: शाम के समय तुलसी के पास या मंदिर में दीपक जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है।

भूलकर भी न करें ये काम (Don’ts)

चूंकि यह समय केवल ईश्वर की भक्ति के लिए निर्धारित है, इसलिए इसमें सांसारिक मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं:

विवाह और सगाई: इस दौरान शादियां नहीं की जातीं।

  • नया निर्माण: घर की नींव रखना या गृह प्रवेश अशुभ माना जाता है।
  • मुंडन और जनेऊ: बच्चों के संस्कार इस महीने टाल दिए जाते हैं।
  • नया व्यापार: नई दुकान खोलना या बड़े निवेश से बचना चाहिए।
  • तामसिक भोजन: मांस-मदिरा और नशीली चीजों से दूर रहकर सात्विक जीवन जीना चाहिए।

साल 2026 का यह 13 महीनों वाला कैलेंडर हमें अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा सा विराम लेकर ईश्वर से जुड़ने का मौका देता है।

17 मई से 15 जून के बीच का समय अपनी गलतियों को सुधारने और आध्यात्मिक ऊर्जा को संचित करने का सबसे अच्छा अवसर होगा।

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