Mobile Data Tax India: भारत में पिछले कुछ सालों में डिजिटल क्रांति आई है।आज गांव हो या शहर, हर हाथ में स्मार्टफोन है और हर फोन में सस्ता इंटरनेट।
लेकिन अब इस सस्ते डेटा पर महंगाई का साया मंडरा रहा है।
सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर एक नया टैक्स लगाने की संभावनाओं को टटोल रही है।
सरल शब्दों में कहें तो, अब आप जितना डेटा खर्च करेंगे, उसी हिसाब से आपको टैक्स भी देना पड़ सकता है।

सरकार की क्या है योजना?
हाल ही में टेलीकॉम विभाग (Department of Telecommunications) की एक रिव्यू मीटिंग हुई थी।
इस मीटिंग में चर्चा हुई कि क्या मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
सरकार ने अब DoT को इस मुद्दे पर एक विस्तृत स्टडी करने का जिम्मा सौंपा है।
विभाग को यह देखना है कि क्या इस तरह का टैक्स व्यावहारिक है और इसे लागू करने का सबसे सही तरीका क्या हो सकता है।

1 रुपये प्रति GB का गणित: कितनी बढ़ेगी आपकी लागत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चर्चा इस बात पर है कि प्रति 1 GB डेटा इस्तेमाल पर 1 रुपये का टैक्स लगाया जाए।
मान लीजिए, अगर आप महीने भर में 30 GB डेटा इस्तेमाल करते हैं, तो आपके मौजूदा रिचार्ज प्लान के ऊपर 30 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
यह सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन करोड़ों उपभोक्ताओं के स्तर पर यह एक बहुत बड़ी राशि बन जाती है।

खजाने में आएंगे 22,900 करोड़ रुपये
सरकार इस कदम को अपनी कमाई (Revenue) बढ़ाने के एक जरिए के तौर पर देख रही है।
अनुमान है कि अगर 1 रुपये प्रति GB का टैक्स लागू हो जाता है, तो सरकारी खजाने में हर साल करीब 22,900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड जमा हो सकता है।
इस पैसे का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।

पहले से लग रहा है 18% GST: क्या यह ‘दोहरी मार’ है?
यहां यह समझना जरूरी है कि अभी भी हम इंटरनेट के लिए टैक्स दे रहे हैं।
जब भी आप मोबाइल रिचार्ज करवाते हैं या पोस्टपेड बिल भरते हैं, तो उस पर 18% GST पहले से ही लागू होता है।
अगर डेटा यूसेज टैक्स भी आ गया, तो यह उपभोक्ताओं पर “टैक्स के ऊपर टैक्स” जैसा होगा।
सोशल मीडिया, यूट्यूब वीडियो और ऑनलाइन गेमिंग के शौकीनों के लिए यह खबर परेशान करने वाली हो सकती है।

भारत में डेटा की खपत और मौजूदा स्थिति
पूरी दुनिया में भारत सबसे सस्ता इंटरनेट देने वाले देशों में से एक है।
यही वजह है कि यहां औसत डेटा खपत बहुत ज्यादा है।
रील देखने से लेकर वर्क-फ्रॉम-होम तक, इंटरनेट हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है।
टेलीकॉम कंपनियां भी अपनी लागत वसूलने के लिए समय-समय पर टैरिफ बढ़ाती रहती हैं, ऐसे में सरकारी टैक्स का बोझ आम आदमी की जेब और ढीली कर सकता है।

अभी फैसला होना बाकी है
अच्छी बात यह है कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव (Proposal) है।
सरकार ने अभी इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
DoT की स्टडी रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
सरकार को यह भी देखना होगा कि इस फैसले का आम जनता और डिजिटल इंडिया मिशन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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