Makar Sankranti Black color: हिंदू धर्म में हर रंग का एक विशेष और आध्यात्मिक महत्व है।
लेकिन ज्यादातर मांगलिक कार्यों, पूजा-अनुष्ठानों या त्योहारों पर काले रंग को ‘अशुभ’ मानकर वर्जित किया जाता है।
इसे शोक और नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन, साल का पहला बड़ा त्योहार ‘मकर संक्रांति’ इस नियम का एक बड़ा अपवाद है।
मकर संक्रांति के दिन काले रंग के वस्त्र धारण करना न केवल शुभ माना जाता है, बल्कि यह एक गहरी परंपरा का हिस्सा भी है।
आइए जानते हैं इसके बारे में सब कुछ…
पिता-पुत्र का मिलन
मकर संक्रांति का त्योहार तब मनाया जाता है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर राशि के स्वामी ‘शनि देव’ हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि देव, सूर्य के पुत्र हैं, हालांकि दोनों के बीच मतभेद रहे हैं।

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव स्वयं अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) उनसे मिलने जाते हैं।
चूंकि शनि देव का प्रिय रंग काला है, इसलिए उनके घर आगमन के उत्सव में काले रंग के कपड़े पहनना उन्हें सम्मान देने और प्रसन्न करने का एक तरीका माना जाता है।
इस दिन काला रंग धारण करने से शनि दोषों से मुक्ति मिलती है और सूर्य-शनि दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ठंड से सुरक्षा
मकर संक्रांति का पर्व जनवरी के मध्य में आता है, जब उत्तर भारत और मध्य भारत में कड़ाके की ठंड (शीतलहर) अपने चरम पर होती है।
विज्ञान के अनुसार, काला रंग ऊष्मा (Heat) का सबसे अच्छा अवशोषक (Absorber) होता है।
प्राचीन समय में जब आधुनिक हीटर या गर्म कपड़े आज की तरह सुलभ नहीं थे, तब स्वास्थ्य रक्षा के लिए काले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती थी।
काला रंग सूर्य की किरणों को सोखकर शरीर के तापमान को स्थिर रखता है और ठंड से बचाता है।
पूर्वजों ने इस वैज्ञानिक तथ्य को धर्म और परंपरा से जोड़ दिया ताकि आम जनमानस इसका पालन कर सके और स्वस्थ रहे।

क्षेत्रीय परंपरा: महाराष्ट्र का ‘हल्दी-कुमकुम’
महाराष्ट्र में मकर संक्रांति पर काले रंग का महत्व सबसे अधिक दिखाई देता है।
यहां नवविवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर काली साड़ी (चंद्रकला साड़ी) पहनती हैं।
इसके पीछे मान्यता है कि काला रंग ‘नजरबट्टू’ की तरह काम करता है और नए जोड़े को बुरी नजर से बचाता है।
इस दिन महिलाएं ‘हल्दी-कुमकुम’ का आयोजन करती हैं, जहां काले वस्त्र पहनकर एक-दूसरे को सौभाग्य की सामग्री भेंट की जाती है।

मकर संक्रांति पर अन्य शुभ रंग और उनका महत्व
अगर आप काला रंग नहीं पहनना चाहते, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये रंग भी पहन सकते हैं:
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पीला रंग (Yellow): यह रंग भगवान विष्णु और सूर्य देव की ऊर्जा का प्रतीक है। पीला रंग पहनने से मानसिक शांति और बौद्धिक विकास होता है। यह सुख-समृद्धि का सूचक है।
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लाल रंग (Red): लाल रंग शक्ति, साहस और सुहाग का प्रतीक है। सुहागिन महिलाओं के लिए मकर संक्रांति पर लाल कपड़े पहनना वैवाहिक जीवन में प्रेम और ऊर्जा भरता है।
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नारंगी या केसरिया (Orange/Saffron): यह रंग त्याग, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्योदय के समय सूर्य का रंग भी ऐसा ही होता है, इसलिए इसे पहनना अत्यंत शुभ है।
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हरा रंग (Green): हरा रंग प्रकृति, हरियाली और बुध ग्रह का प्रतीक है। मकर संक्रांति पर हरा पहनने से जीवन में नई शुरुआत और सुख-शांति आती है।
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सुनहरा (Golden): वैभव और सफलता के लिए सुनहरा रंग श्रेष्ठ है। यह सूर्य के तेज को दर्शाता है।

मकर संक्रांति: पूजा और दान का महत्व
14 जनवरी 2026 (बुधवार) को श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करेंगे।
इस दिन तिल, गुड़, कंबल और खिचड़ी के दान का विशेष महत्व है।
सही रंग के चुनाव के साथ-साथ यदि शुद्ध मन से दान किया जाए, तो सूर्य देव की कृपा से आरोग्य और शनि देव की कृपा से कर्मों में सफलता प्राप्त होती है।
मकर संक्रांति पर काले रंग का उपयोग यह संदेश देता है कि कोई भी रंग अपने आप में बुरा नहीं होता, बल्कि उसका समय और संदर्भ उसे विशेष बनाता है।
यह त्योहार धर्म, विज्ञान और प्रकृति के सुंदर संतुलन का प्रतीक है।
तो इस संक्रांति, अपनी पसंद और आस्था के अनुसार रंगों का चयन करें और भगवान भास्कर का स्वागत करें।


