Makar Sankranti 2026: भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का त्यौहार केवल ऋतु परिवर्तन का नहीं, बल्कि नई ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
साल 2026 की मकर संक्रांति ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण होने जा रही है।
इस वर्ष ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी 2026 को दोपहर 03:07 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
इसी के साथ ‘खरमास’ समाप्त हो जाएगा और सूर्य देव ‘उत्तरायण’ हो जाएंगे।
बाघ पर सवार संक्रांति देवी का स्वरूप
हर साल संक्रांति देवी का आगमन अलग-अलग स्वरूपों में होता है। इस वर्ष संक्रांति देवी कुमारी अवस्था में आ रही हैं।
उनका वाहन ‘व्याघ्र’ (बाघ) है और उपवाहन ‘अश्व’ (घोड़ा) है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, संक्रांति देवी ने पीले वस्त्र धारण किए हुए हैं और उनके हाथों में अस्त्र के रूप में गदा है।

वे कुमकुम का लेपन कर चांदी के पात्र में दूध (पायस) का सेवन कर रही हैं।
उनका मुख वायव्य (उत्तर-पश्चिम) दिशा की ओर है और वे पश्चिम दिशा की ओर गमन कर रही हैं।
संक्रांति का यह स्वरूप बताता है कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव बढ़ेगा।
बाघ वाहन होने के कारण वन्यजीव संरक्षण को लेकर सरकारें नई नीतियां बनाएंगी, हालांकि वन्यजीवों को लेकर कुछ चिंताजनक खबरें भी मिल सकती हैं।
6 शुभ संयोगों का महासंगम
इस बार की मकर संक्रांति इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन एक साथ 6 विशेष ज्योतिषीय योग बन रहे हैं:
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सर्वार्थ सिद्धि एवं अमृत सिद्धि योग: ये दोनों योग कार्यों में पूर्ण सफलता और अमरत्व (स्थायित्व) का प्रतीक हैं।
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ध्रुव योग: रात के समय बनने वाला यह योग शुभ कार्यों की नींव रखने के लिए उत्तम है।
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वृद्धि योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किए गए दान और स्नान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
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अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्र: 14 जनवरी को अनुराधा और 15 को ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा, जो नेतृत्व क्षमता और बुद्धि में वृद्धि करते हैं।
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षटतिला एकादशी का संयोग: संक्रांति के साथ एकादशी का होना अत्यंत दुर्लभ है। भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का यह सुनहरा अवसर है।
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गुरुवार का विशेष संयोग: भगवान विष्णु और सूर्य देव की संयुक्त आराधना से आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होगी।

‘मंदाकिनी’ नाम और कृषि पर प्रभाव
बुधवार और अनुराधा नक्षत्र के संगम के कारण इस संक्रांति का नाम ‘मंदाकिनी’ है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंदाकिनी संक्रांति अच्छी वर्षा का संकेत देती है।
इससे आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में समृद्धि आएगी और फसलों की पैदावार बेहतर रहेगी।
हालांकि, चांदी के पात्र में भोजन करने के कारण बाजार में चांदी और सोने की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
बाजार और जनजीवन पर असर
संक्रांति के प्रभाव से आगामी महीनों में कुछ आर्थिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
कपास, शक्कर, तिल, मूंग, चना, केसर और हल्दी जैसे खाद्य पदार्थों के दामों में तेजी आने के योग हैं।
व्यापार के लिहाज से समय उन्नति कारक रहेगा।
स्वास्थ्य की दृष्टि से आम जनता को थोड़ा सतर्क रहना होगा।
विशेषकर छोटे बच्चों और महिलाओं को मौसमी बीमारियों या शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों में कुछ प्रशासनिक या प्राकृतिक चुनौतियां आ सकती हैं।
फरवरी से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
यद्यपि 14 जनवरी से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे, लेकिन शहनाइयों की गूंज के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
जनवरी के महीने में ‘शुक्र तारा’ अस्त होने के कारण विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं हैं।
विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक कार्य फरवरी 2026 से शुरू होंगे।
राशियों पर प्रभाव और उपाय
मकर संक्रांति का यह गोचर सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा:
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शुभ प्रभाव: वृषभ, सिंह, कर्क, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए यह समय धन, प्रतिष्ठा और व्यापार में सफलता दिलाने वाला रहेगा। विशेषकर मिथुन और कन्या राशि के लिए यह संक्रांति अत्यधिक लाभदायक है।
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सावधानी बरतें: मेष, वृश्चिक और तुला राशि के जातकों को स्वास्थ्य और धन के मामले में थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए।
उपाय:
जिन राशियों के लिए यह गोचर कष्टकारी है, उन्हें तिल, गुड़, खिचड़ी और गरम वस्त्रों का दान करना चाहिए।
सूर्य देव को अर्घ्य देना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना सभी बाधाओं को दूर करने में सहायक होगा।


