Makar Sankranti Shattila Ekadashi: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है, लेकिन साल 2026 की संक्रांति सामान्य से कहीं अधिक प्रभावशाली होने वाली है।
इस साल 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिष गणना के अनुसार, ऐसा अद्भुत नजारा पूरे 19 साल बाद देखने को मिलेगा।
इससे पहले यह संयोग 15 जनवरी 2007 को बना था।
क्या है इस संयोग का महत्व?
मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करते हैं।
इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे ‘देवताओं का दिन’ कहा जाता है।
दूसरी ओर, षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है।
इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग करने का विधान है।
जब सूर्य (आत्मा के कारक) और विष्णु (सृष्टि के पालनहार) की कृपा एक ही दिन मिलती है, तो यह साधकों के लिए अक्षय पुण्य की प्राप्ति का मार्ग खोल देती है।

शुभ मुहूर्त और समय (Panchang 2026)
वर्ष 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी, बुधवार को दोपहर के समय होगा।
- सूर्य गोचर समय: दोपहर 03:13 बजे (लगभग)।
- पुण्य काल: दोपहर 03:04 बजे से शाम 05:57 बजे तक।
- महापुण्य काल: दोपहर 03:04 बजे से दोपहर 03:28 बजे तक (यह दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम है)।
- अतिरिक्त योग: इस दिन ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘अमृत सिद्धि योग’ भी बन रहे हैं, जो किए गए कार्यों में सफलता सुनिश्चित करते हैं।
इन 3 राशियों पर होगी धन-वर्षा
ज्योतिषियों के अनुसार, इस महासंयोग से मुख्य रूप से तीन राशियों को जबरदस्त लाभ होने की उम्मीद है:
- मेष राशि: करियर में तरक्की और सूर्य के प्रभाव से मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
- सिंह राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा और पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं।
- वृश्चिक राशि: आर्थिक पक्ष मजबूत होगा और भगवान विष्णु की कृपा से अटके हुए काम पूरे होंगे।
दान और पूजन की विशेष विधि
चूंकि इस दिन एकादशी भी है, इसलिए ‘तिल’ का महत्व बढ़ गया है।
श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे जल में काले तिल डालकर स्नान करें।
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” का जाप करें।
एकादशी होने के नाते इस दिन विष्णु जी को तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाएं।
खिचड़ी का दान, गर्म वस्त्रों का वितरण और तिल-गुड़ का दान इस दिन सात जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का महत्व भी सर्वोपरि है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति सुलभ होती है।


