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नवरात्रि स्पेशल: चारों ओर श्मशान से घिरा है नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर, मनोकामना पूर्ति के लिए होती है तंत्र साधना

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Baglamukhi Temple Nalkheda: मध्य प्रदेश में मां दुर्गा के कई प्राचीन और सिद्ध मंदिर हैं। जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

ऐसा ही एक मंदिर प्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित है।

मां बगलामुखी का यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। यहां देवी त्रिशक्ति रूप में विराजित हैं।

नवरात्रि के मौके पर जानते हैं इस मंदिर का इतिहास और मां बगलामुखी की तंत्र साधना के बारे में…

मंदिर की खास बातें

  • यह मंदिर लखुंदर नदी के किनारे बना है।
  • इस मन्दिर में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी की पूजा होती है।
  • यह मंदिर द्वापर युगीन है।
  • यहां देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते हैं
  • इस मंदिर के चारों ओर श्मशान है।
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कृष्ण की सलाह पर पांडवों ने की स्थापना

मान्यता है कि बगुलामुखी का यह मंदिर महाभारत के समय का है।

मंदिर के पुजारी कैलाश नारायण के मुताबिक कृष्ण की प्रेरणा से पांडवों ने यहां महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए साधना की थी।

तब से ही इस मंदिर में शत्रु नाशक यज्ञ अनुष्ठान कराए जाते हैं।

मां बगलामुखी भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनकी बुरी शक्तियों का नाश करती है।

तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए लोग यहां दूर दूर से आते हैं।

स्वयंभू है मां की मूर्ति, त्रिशक्ति रूप में विराजित

मंदिर में स्थापित माता बगलामुखी त्रिशक्ति माता कही जाती हैं।

मां बगलामुखी की इस विचित्र और चमत्कारी मूर्ति की स्थापना का कोई ऐतिहासिक प्रमाण तो नहीं मिलता।

किवंदिती है कि यह मूर्ति स्वयंभू और जागृत अवस्था में है।

काल गणना के हिसाब से यह स्थान करीब पांच हजार साल से भी पहले से स्थापित है।

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माता की स्वयंभू मूर्ति में तीन देवियां समाहित हैं।

मध्य में माता बगलामुखी, दाएं भाग में मां लक्ष्मी और बाएं भाग में मां सरस्वती।

त्रिशक्ति मां का मंदिर भारतवर्ष में दूसरा कहीं नहीं है।

माता बगलामुखी को महारुद्र (मृत्युंजय शिव) की मूल शक्ति के रूप में जाना जाता है।

मंदिर के चारों ओर श्मशान, होते हैं गुप्त अनुष्ठान और तंत्र साधना

  • माता बगलामुखी का ये मंदिर चारों ओर से साधुओं की समाधि और श्मशान घाट से घिरा है।
  • पश्चिम में ग्राम गुदरावन, पूर्व में कब्रिस्तान और दक्षिण में कच्चा श्मशान है।
  • बगलामुखी तंत्र की देवी हैं, इसलिए यहां पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है।
  • द्वापर युग के इस मंदिर में साधु-संत, तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते हैं।
  • यहां पर विजय या किसी खास कार्य में सफलता के लिए कई तरह के गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं।
  • मंदिर में कई बड़े नेता और फिल्में सितारें हाजिरी लगा चुके हैं।
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मां की पूजा में पीले रंग का महत्व, इसलिए कहलाती हैं पीतांबरा माई

मां बगलामुखी की मूर्ति पीताम्बर यानि पीले होने की वजह से उन्हें पीले रंग की पूजा सामग्री चढ़ाई जाती है।

पीला कपड़ा, पीली चुनरी, पीले रंग की मिठाई और पीले फूल माता रानी को अर्पित किए जाते हैं।

पहले माताजी को देहरा के नाम से जाना जाता था। यहां पूजा में हल्दी और पीले रंग के पूजन सामग्री का विशेष महत्व है।

यह संभवत: अकेला मंदिर है जहां मां को पूजा में खड़ी हल्दी और हल्दी पाउडर चढ़ाया जाता है।

देवी पुराण के अनुसार देवी मां बगलामुखी, समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय द्वीप में अमूल्य रत्नों से सुसज्जित सिंहासन पर विराजमान हैं।

देवी त्रिनेत्रा हैं, मस्तक पर अर्ध चन्द्र धारण करती है। उनके शरीर का रंग पीला है।

देवी ने पीला वस्त्र और पीले फूलों की माला धारण की हुई है। देवी के अन्य आभूषण भी पीले रंग के ही हैं।

देवी, विशेषकर चंपा फूल, हल्दी की गांठ इत्यादि पीले रंग से सम्बंधित तत्वों की माला धारण करती हैं।

मतलब ये कि मां को पीला रंग और पीली वस्तुएं बहुत प्रिय हैं।

इसी वजह से मां बगलामुखी माता का स्वर्ण यानि पीला श्रृंगार किया जाता है और वो पीतांबरा कहलाती हैं।

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कुछ विशेष मौकों पर ही मां का रजत श्रृंगार किया जाता है।

नवरात्रि और मां बगलामुखी जयंती पर्व पर मां को 3 रंगों की चुनरी ओढ़ाई जाती है।

पुत्र प्राप्ति के लिए बनाते हैं स्वास्तिक

मंदिर की पिछली दीवार पर पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए स्वस्तिक बनाया जाता है।

प्रातः काल में सूर्योदय से पहले ही सिंह मुखी द्वार से प्रवेश के साथ ही भक्तों का मां के दरबार में हाजिरी लगाना प्रारंभ हो जाता है।

इन मनोकामनाओं के लिए होती है पूजा

  • नलखेड़ा स्थित माता बगलामुखी के मंदिर में तंत्र साधना के साथ ही मिर्ची यज्ञ जैसे धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
  • माता के मंदिर में होने वाले यज्ञ के लिए दूर-दूर से लोग मंदिर पहुंचते हैं।
  • इतना ही नहीं नवरात्रि में यहां यज्ञ कराने के लिए श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार भी करना पड़ता है।
  • यहां मुख्य रूप से शत्रुओं का नाश, कोर्ट केस जीत, और चुनाव में विजय जैसे कार्यों को पूर्ण करने के लिए यज्ञ आयोजित किया जाता है।
  • यहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर भी माता के दरबार में पहुंचते हैं, जो माता जल्द से जल्द पूरी कर देती हैं।
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दुनिया में मां बगलामुखी के सिर्फ 3 मंदिर 

प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख है जिनमें से एक है बगलामुखी।

मां भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है।

विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है।

एक नेपाल, दूसरी मध्य प्रदेश के दतिया और तीसरी नलखेड़ा में।

नेपाल और दतिया में आद्यि शंकराचार्य ने मां की प्रतिमा स्थापित कराई थी।

जबकि, नलखेड़ा में मां बगलामुखी पीताम्बर रूप में शाश्वत काल से विराजित हैं।

प्राचीन काल में यहां बगावत नाम का गांव हुआ करता था। यह विश्व शक्ति पीठ के रूप में भी प्रसिद्ध है।

मां बगलामुखी की उपासना और साधना से माता वैष्णोदेवी और मां हरसिद्धि के समान ही साधक को शक्ति के साथ धन और विद्या की प्राप्ति हो जाती।

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नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर कैसे पहुंचे

  • नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से 100 किमी दूर है।
  • इंदौर से 156 किमी और भोपाल से 182 किमी दूर है।
  • इंदौर से सड़क मार्ग द्वारा नलखेड़ा पहुंचने के लिए देवास या उज्जैन के रास्ते से बस और टैक्सी उपलब्ध हैं।
  • वायु मार्ग से पहुंचने के लिए नलखेड़ा के निकटतम इंदौर का विमानक्षेत्र है।
  • रेल मार्ग द्वारा इंदौर से 30 किमी पर स्थित देवास या लगभग 60 किमी मक्सी पहुंचकर भी आगर मालवा जिले के कस्बे नलखेड़ा पहुंच सकते हैं।
  • बस अथवा कैब के जरिए भी आगर मालवा पहुंच सकते हैं। यहां से मंदिर पास ही में है।

All Image Credits- Social Media

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