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OTP का झंझट खत्म: अब सिम और फोन खुद देंगे आपकी पहचान, नहीं रुकेगा पेमेंट!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

OTP Free Online Payment: आज के डिजिटल दौर में जब भी हम कोई ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो सबसे बड़ी बाधा OTP (One-Time Password) के आने का इंतजार करना होता है।

कभी नेटवर्क नहीं मिलता, तो कभी मैसेज आने में देरी हो जाती है।

लेकिन अब बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों ने इस समस्या का एक हल खोज लिया है, जिसे ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ कहा जा रहा है।

क्या है साइलेंट ऑथेंटिकेशन?

सरल भाषा में कहें तो, यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बैंक का सिस्टम बैकग्राउंड में ही आपके टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे Jio, Airtel, VI) से संपर्क करेगा।

सिस्टम यह चेक करेगा कि जो सिम कार्ड आपके फोन में लगा है, क्या वही नंबर आपके बैंक खाते में रजिस्टर्ड है?

साथ ही, यह आपके फोन की यूनिक आईडी (IMEI) को भी वेरीफाई करेगा।

अगर सिम और डिवाइस का मेल सही पाया जाता है, तो बिना किसी OTP के आपका ट्रांजैक्शन तुरंत पूरा हो जाएगा।

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फ्रॉड पर कैसे लगेगी लगाम?

आजकल ‘सिम क्लोनिंग’ और ‘e-SIM स्वैप’ के जरिए फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

हैकर्स किसी तरह आपकी सिम का डुप्लीकेट बनवा लेते हैं और फिर आपके बैंक का OTP उनके पास पहुंच जाता है।

नए सिस्टम में यह मुमकिन नहीं होगा। चूंकि बैंक अब सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि सिम कार्ड की असली पहचान (IMSI) और डिवाइस के हार्डवेयर को मैच करेगा, इसलिए अगर हैकर किसी दूसरे फोन में आपकी नकली सिम चलाएगा, तो बैंक उसे तुरंत पकड़ लेगा।

सिम और डिवाइस मैच न होने पर ट्रांजैक्शन उसी पल ब्लॉक कर दिया जाएगा।

यूजर को क्या फायदा होगा?

  1. समय की बचत: आपको बार-बार SMS इनबॉक्स चेक करके OTP कॉपी-पेस्ट करने की जरूरत नहीं होगी।

  2. बेहतर अनुभव: पेमेंट फेल होने की दर कम हो जाएगी, क्योंकि अक्सर OTP देरी से आने के कारण सेशन एक्सपायर हो जाता है।

  3. सिम क्लोनिंग से सुरक्षा: अगर आपका फोन आपके पास है, तो दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हैकर आपके नाम पर पेमेंट नहीं कर पाएगा।

  4. ई-सिम पर भी कारगर: यह तकनीक फिजिकल सिम के साथ-साथ ई-सिम (eSIM) पर भी पूरी तरह सुरक्षित तरीके से काम करेगी।

RBI के नए नियम और सुरक्षा 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (2FA) को अनिवार्य किया है।

साइलेंट ऑथेंटिकेशन इसी का एक हिस्सा है।

इसके अलावा, सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए बैंक अब फेस आईडी (Face ID), फिंगरप्रिंट और एप के अंदर ही जेनरेट होने वाले कोड्स का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।

अब सिर्फ एक पासवर्ड पर निर्भर रहना बीते जमाने की बात हो जाएगी।

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एक्सिस बैंक और अन्य बड़े संस्थान इसके पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

आने वाले समय में, आप वॉट्सऐप के जरिए भी सुरक्षित तरीके से ट्रांजैक्शनल मैसेज प्राप्त कर सकेंगे, जिससे ग्राहकों का भरोसा डिजिटल पेमेंट पर और बढ़ेगा।

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