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सावधान! ट्रेन लेट होने पर सीधे टिकट कैंसिल किया तो डूबेगा पैसा, जानें क्या है रिफंड का सही नियम

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Train Late Refund Rules: भारतीय रेलवे से यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए भोपाल उपभोक्ता आयोग का एक हालिया फैसला बेहद महत्वपूर्ण है।

अक्सर देखा जाता है कि जब ट्रेन घंटों देरी से चलती है, तो यात्री गुस्से या जल्दबाजी में अपना टिकट कैंसिल कर देते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि खुद टिकट कैंसिल करने पर रेलवे नियमानुसार ‘कैंसलेशन चार्ज’ काट लेता है?

भोपाल के एक यात्री के साथ ऐसा ही हुआ, जिसे न केवल आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, बल्कि कानूनी लड़ाई में भी हार का सामना करना पड़ा।

Railways Cancelled 46 trains

क्या था पूरा मामला?

भोपाल निवासी एक यात्री ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस के AC-2 श्रेणी में टिकट बुक किया था।

यात्री को दिल्ली पहुंचकर वहां से चंडीगढ़ के लिए शताब्दी एक्सप्रेस पकड़नी थी। यानी यह एक कनेक्टिंग यात्रा थी।

लेकिन आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 3 घंटे की देरी से दिल्ली पहुंची।

इस देरी के कारण यात्री की अगली ट्रेन (शताब्दी एक्सप्रेस) छूट गई।

परेशान होकर यात्री ने वहीं से अपनी दोनों टिकटें कैंसिल कर दीं।

Trains Temporarily Cancelled

जब रेलवे ने रिफंड की राशि में से कैंसलेशन चार्ज काट लिया और पूरा पैसा वापस नहीं किया, तो यात्री ने इसे ‘सेवा में कमी’ बताते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया।

यात्री ने मानसिक क्षतिपूर्ति और पूरे रिफंड की मांग की थी।

आयोग का फैसला और रेलवे का तर्क

मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच (अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य प्रतिभा पांडे) ने की।

आयोग ने माना कि ट्रेन देरी से चली थी, जिससे यात्री को असुविधा हुई।

लेकिन, आयोग ने रेलवे के उस तर्क को सही पाया जिसमें कहा गया कि यात्री ने रिफंड पाने की सही कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि अगर कोई ट्रेन 3 घंटे या उससे अधिक देरी से चल रही है, तो यात्री को TDR (Ticket Deposit Receipt) फाइल करनी चाहिए थी।

यात्री ने TDR फाइल करने के बजाय सीधे ‘टिकट कैंसिल’ बटन दबा दिया या काउंटर से कैंसिल कराया।

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रेलवे के सॉफ्टवेयर और नियमों के अनुसार, जब यात्री खुद कैंसिल करता है, तो यह माना जाता है कि वह स्वेच्छा से यात्रा छोड़ रहा है, इसलिए कैंसलेशन चार्ज काटा जाता है।

यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सबक: TDR क्यों जरूरी है?

अगर आपकी ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आप यात्रा नहीं करना चाहते, तो रिफंड पाने के लिए TDR ही एकमात्र सही रास्ता है।

  1. पूरा रिफंड: TDR फाइल करने पर रेलवे कैंसलेशन चार्ज नहीं काटता और यात्री को पूरा मूल किराया वापस मिलता है।
  2. कनेक्टिंग ट्रेन का नियम: अगर आपकी पहली ट्रेन लेट है और दूसरी छूट गई है, तो दोनों टिकटों को लिंक होना चाहिए या TDR में इसका उल्लेख होना चाहिए।

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रेलवे के अन्य महत्वपूर्ण अधिकार

  • मुफ्त भोजन: अगर राजधानी, शताब्दी या वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें 3 घंटे से ज्यादा लेट हैं, तो IRCTC यात्रियों को मुफ्त भोजन और जलपान देने के लिए बाध्य है।
  • ट्रेन कैंसिल होने पर: अगर रेलवे खुद ट्रेन रद्द करता है, तो रिफंड ऑटोमैटिक आता है, इसके लिए यात्री को कुछ करने की जरूरत नहीं होती।
  • मिस हुई ट्रेन: अगर आपकी ट्रेन छूट गई है, तो स्टेशन छोड़ने के 1 घंटे के भीतर TDR भरकर आप रिफंड का दावा कर सकते हैं।

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कुलमिलाकर, उपभोक्ता आयोग का यह फैसला बताता है कि रेलवे नियमों का ज्ञान होना कितना जरूरी है।

केवल असुविधा होने पर रेलवे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, अगर यात्री स्वयं निर्धारित नियमों (जैसे TDR फाइल करना) का पालन न करे।

ऐसे में अगली बार अगर आपकी ट्रेन लेट हो, तो घबराकर टिकट कैंसिल न करें, बल्कि TDR की प्रक्रिया अपनाएं।

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