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रमजान 2026: रोजेदारों के लिए जरूरी नियम, भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना टूट जाएगा रोजा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ramadan 2026 Rules: रमजान का मुबारक महीना इबादत, बरकत और रूहानी सुकून का पैगाम लेकर आता है।

साल 2026 का रमजान भी भाईचारे और आत्म-शुद्धि का संदेश दे रहा है।

इस्लाम में रोजा रखना सिर्फ सुबह से शाम तक भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी इंद्रियों और मन पर नियंत्रण पाने की एक परीक्षा है।

एक सच्चे रोजेदार के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किन वजहों से उनकी इबादत मुकम्मल होती है और किन गलतियों से रोजा टूट जाता है।

क्या है रोजा और इसकी अहमियत?

रोजे की शुरुआत सूरज निकलने से पहले ‘सेहरी’ के साथ होती है और सूरज ढलने पर ‘इफ्तार’ के साथ इसे खोला जाता है।

इस दौरान रोजेदार न केवल खाने-पीने से बचता है, बल्कि झूठ बोलने, बुराई करने और गलत कामों से भी दूरी बनाता है।

लेकिन कई बार अनजाने में या जानकारी के अभाव में ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिससे रोजा अमान्य हो जाता है।

रोजा टूटने की प्रमुख वजहें

  • जानबूझकर खाना-पीना: अगर कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि उसका रोजा है, कुछ खा या पी लेता है, तो उसका रोजा फौरन टूट जाता है। हालांकि, अगर कोई गलती से या भूल से कुछ खा ले, तो अल्लाह उसे माफ करता है और उसका रोजा बरकरार रहता है।

  • उल्टी से जुड़े नियम: स्वास्थ्य कारणों से खुद-ब-खुद (Natural) उल्टी आने पर रोजा नहीं टूटता। लेकिन अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने गले में उंगली डालकर या किसी अन्य तरीके से उल्टी करता है, तो रोजा टूट जाएगा।

  • शारीरिक शुद्धि: महिलाओं के लिए ‘हैज’ (मासिक धर्म) या ‘निफास’ (बच्चे के जन्म के बाद का रक्तस्राव) शुरू होने पर रोजा टूट जाता है। ऐसी स्थिति में उस दिन का रोजा बाद में रखना अनिवार्य होता है।

  • गलत नीयत: इस्लाम में हर इबादत ‘नीयत’ (इरादे) पर टिकी है। अगर किसी ने मन में यह पक्का इरादा कर लिया कि वह रोजा तोड़ रहा है, भले ही उसने कुछ खाया-पिया न हो, तो भी उसका रोजा खत्म माना जाता है।

  • अप्राकृतिक कृत्य: मास्टरबेशन (हस्तमैथुन) या किसी भी गलत तरीके से वीर्य निकालना इस्लाम में हराम है और इससे रोजा टूट जाता है। रोजे में अपनी भावनाओं और शरीर पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी इबादत है।

क्या है ‘कजा’ का मतलब?

अगर किसी वाजिब कारण से या गलती से रोजा टूट जाता है, तो रमजान के बाद उस एक रोजे के बदले एक रोजा रखना पड़ता है, जिसे ‘कजा’ कहा जाता है।

रमजान हमें धैर्य सिखाता है, इसलिए इस महीने में अनुशासन का पालन करना ही सच्ची बंदगी है।

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