Solar Eclipse 2026: साल 2026 खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।
इस वर्ष कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें से साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने जा रहा है।
खास बात यह है कि इसी दिन फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी है, जिसे मंगलवार होने के कारण ‘भौमवती अमावस्या’ कहा जाता है।
भारत में प्रभाव और सूतक काल
आम जनमानस में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस ग्रहण का असर भारत में होगा?
ज्योतिषियों और खगोलविदों के अनुसार, 17 फरवरी को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
शास्त्रों का नियम है कि जो ग्रहण आंखों से दिखाई न दे, उसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल मान्य नहीं होता।
इसलिए, भारत में रहने वाले लोग बिना किसी डर के अपने नियमित देव-पितृ कार्य, पूजा-पाठ और दान-पुण्य कर सकेंगे।
37 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने जा रहा है।
करीब 37 साल बाद कुंभ राशि में ऐसी स्थिति बन रही है जब सूर्य के साथ राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा एक साथ मौजूद रहेंगे।
इससे पहले 7 मार्च 1989 को ऐसी ही ग्रह स्थिति देखी गई थी।
कुंभ राशि में सूर्य और राहु की युति ‘ग्रहण योग’ का निर्माण कर रही है, जो वैश्विक राजनीति और पर्यावरण पर गहरा असर डाल सकती है।
कहां-कहां दिखेगा ग्रहण?
यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है।
यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका, अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, मॉरीशस, नामीबिया और तंजानिया जैसे देशों में दिखाई देगा।
इन क्षेत्रों में सूर्य एक चमकती हुई अंगूठी की तरह नजर आएगा।
समय और अवधि
भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण दोपहर 3:27 बजे शुरू होगा और शाम 6:06 बजे समाप्त होगा।
ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट की होगी।
हालांकि, कुछ गणनाओं के अनुसार पूर्ण मोक्ष रात 7:57 बजे तक हो सकता है।
भौमवती अमावस्या पर क्या करें?
चूंकि भारत में सूतक प्रभावी नहीं है, इसलिए श्रद्धालु पवित्र नदियों (जैसे पुष्कर, गंगा) में आस्था की डुबकी लगा सकेंगे।
मंगलवार को अमावस्या होने से इसे पितृ दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान करने से सुख-शांति आती है।
ज्योतिषीय भविष्यवाणियां और सावधानियां
भविष्यवक्ताओं का मानना है कि भले ही यह ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन ग्रहों की स्थिति वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल ला सकती है:
- प्राकृतिक आपदाएं: भूकंप, बाढ़ और सुनामी जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
- राजनीति और सीमा तनाव: विश्व स्तर पर सीमा विवाद और हिंसक प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
- राशियों पर प्रभाव: मकर और कुंभ राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा भारी रह सकता है। इन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने और सूर्य मंत्रों का जाप करने की सलाह दी गई है।
17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण एक बड़ी खगोलीय घटना है, लेकिन भारतीय संदर्भ में यह केवल अध्ययन का विषय है, डर का नहीं।
आप अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का पर्व पूरे उत्साह से मना सकते हैं।


