Air purifier gst rate: केंद्र सरकार ने एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) की दर कम करने से साफ इनकार कर दिया है।
यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका पर चल रही सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें प्रदूषण को देखते हुए एयर प्यूरीफायर को जरूरी सामान बताते हुए उस पर टैक्स कम करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने जताई थी चिंता, पूछा था- गरीब कैसे खरीदेगा?
याचिका पर सुनवाई कर रही हाईकोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस विकास महाजन और विनोद कुमार) ने पहले ही प्रदूषण की गंभीर स्थिति और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर पर गहरी चिंता जताई थी।
अदालत ने कहा था कि एक एयर प्यूरीफायर की कीमत आमतौर पर 10,000 से 15,000 रुपये के बीच होती है।
ऐसे में कोई गरीब परिवार इसे कैसे खरीद पाएगा?

कोर्ट ने सवाल उठाया था कि क्या इसे और सस्ता (सब्सिडाइज्ड) नहीं किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि प्रदूषण से अमीर-गरीब सभी प्रभावित होते हैं और यह पूरे देश का मुद्दा है।
सरकार ने दिए ये कारण, कहा- ‘मेडिकल डिवाइस नहीं है’
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने अदालत को स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस (चिकित्सा उपकरण) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
चिकित्सा उपकरणों पर आमतौर पर कम जीएसटी (5% या 12%) लगता है, जबकि एयर प्यूरीफायर पर अभी 18% जीएसटी लागू है।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि किसी भी सामान का वर्गीकरण और उसकी जीएसटी दर तय करना एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है, जिसे जीएसटी काउंसिल संभालती है।
इसमें लाइसेंसिंग, नियामक जांच और विस्तृत विचार-विमर्श शामिल होता है।
इसे किसी रिट याचिका के जरिए जल्दबाजी में नहीं बदला जा सकता।
सरकार ने दी ये चेतावनी
सरकार ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एयर प्यूरीफायर के लिए जीएसटी कम की गई, तो इसी तरह की मांग अन्य कई उत्पादों और सेक्टरों से भी आने लगेगी, जिससे राजस्व पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर वित्त मंत्री समेत उच्च नीति स्तर पर पहले ही विचार हो चुका है और अदालत जीएसटी काउंसिल को टैक्स दरें बदलने का निर्देश नहीं दे सकती।

याचिकाकर्ता का पक्ष और अगली सुनवाईयाचिकाकर्ता, वकील कपिल मदान ने अपनी दलील में कहा कि वे टैक्स हटाने की नहीं, बल्कि सही वर्गीकरण की मांग कर रहे हैं।
उनका दावा है कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल उपकरणों की तरह देखे जाने के बजाय गलत तरीके से ऊंचे टैक्स स्लैब में रखा गया है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि इस स्तर पर, रिकॉर्ड में सरकार का विस्तृत जवाब (काउंटर-एफिडेविट) न होने के कारण वह कोई अंतरिम राहत (जैसे अंतरिम आदेश) नहीं दे सकती।

9 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को, कोर्ट की छुट्टियों के बाद तय की गई है।
इस फैसले का असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा जो प्रदूषण से बचने के लिए एयर प्यूरीफायर को जरूरी मानते हैं, लेकिन उनकी ऊंची कीमत एक बड़ी रुकावट है।


